मौला अली अकबरعको सबीह-ए-मुस्तफा صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم क्यों बनाया गया?

मौला अली अकबरعको सबीह-ए-मुस्तफा صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم क्यों बनाया गया?

_हुज़ूर सय्यदुना मौला अलीع फ़रमाते हैं कि इमाम हसनع सर-ए-अकदस से सीना मुबारक तक आक़ाصَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم की कामिल सबिह थे और इमाम हुसैनعसीना मुबारक से कदमेंन शरीफ़ेंन तक आकाصَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم की कामिल सबीह थे._

*_तो जब सहाबा को प्यारे आक़ा صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم की याद सताती तो वोह मौला अलीع के घर आते और हसनैन करीमेंनع का इकट्ठा दीदार कर लेते तो उन्हें राहत मिलती._*

_लेकिन जब हसनैन करीमेंनع को अपने नानाजान की याद सताती तो वह मौला अली अकबरعका दीदार करते कि वोह सर-ए-अकदस से कदमेंन शरीफ़ेंन तक उनके नानाजान صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم की कामिल सबीह थे!_

*_आशमांन में सिर्फ एक सूरज और एक चाँद हैं, मगर अहलेबैतع के घर का एक एक बच्चा दोपहर का चमकता सूरज और अंधेरी रात का चौदवीं का चाँद हैं_*

_صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم_
*_अल्लाहुम्मा सल्ले अला सैयदना व मौलाना मुहम्मदिव व आला आलैहि व बारीक व सल्लिम._*

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