
पार्ट 1 –
मौला अली अलैहिस्सलाम पर लगाए गए बेतुके और बेहूदे इल्ज़ाम का जवाब –
कुछ अक़्ल के अँधे नासबी और मुनाफ़िक़ीन मौला अली अलैहिस्सलाम पर ये इल्ज़ाम लगाते हैं कि मौला ए क़ायनात ने शराब के नशे में इमामत की और क़ुरान की ग़लत तिलावत की, इसके बाद सूरः निसा की आयत 43 नाज़िल हुई। माज़’अल्लाह। लानातुल्लाहे अलल काज़िबीन।
क़ुरान ओ अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के मानने वाले तो इस इल्ज़ाम को लगाने की हर वजूहात से बाख़बर हैं और जवाब में क़ुरान पाक की सूरः अहज़ाब की आयत 33 ही काफ़ी है कि जिसमें खुद अल्लाह रब उल इज़्ज़त ने फ़रमाया कि मैंने अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम को रिज़्स से दूर कर दिया है और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की तहारत की गवाही भी ख़ुद रब ए काबा ने दे दी है।
إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا
बस अल्लाह का इरादा ये है, “ऐ अहलेबैत (अलैहिमुस्सलाम) कि तुम से हर बुराई को दूर रखे और और इस तरह पाक व पाकीज़ा (साफ़-सुथरा) रखे, जिस तरह पाक व पाकीज़ा (साफ़-सुथरा) रखने का हक़ है।”
शराब रिज़्स में से एक है और मौला अली अलैहिस्सलाम और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम से दूर है। हाँ ये ज़रूर हक़ है कि मौला अली अलैहिस्सलाम पर ऐसा वाहियात इल्ज़ाम लगाने वाले तमाम नासबी, अपने आप में खुद रिज़्स हैं। इन अक़्ल के अँधों ने ये इल्ज़ाम मौला अली पर नहीं लगाया है बल्कि अल्लाह और क़ुरान पर लगाया है। क्या अल्लाह ने जिसे ततहीर किया हो, उसके पास रिज़्स का एक ज़र्रा भी पहुँच सकता है?, क्या तुम्हें, अल्लाह के कुन पर ही शक है?, या फिर तुम्हें अल्लाह की किताब पर ही शक है?
मौला अली अलैहिस्सलाम की फज़ीलत और शान आगे के पार्ट्स में ज़रूर बयान की जाएगी। इस पार्ट में नासबियत की साज़िश का जनाज़ा निकाला जाएगा।
दरअसल बात ये है कि ख़लीफ़ा ए दोम, शराब पीने के बेहद शौक़ीन थे, इन्होंने ज़माना ए जहालियत में बहुत शराब पी फिर जब सूरः बक़र की आयत 219 नाज़िल हुई –
يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ ۖ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَإِثْمُهُمَا أَكْبَرُ مِنْ نَفْعِهِمَا ۗ وَيَسْأَلُونَكَ مَاذَا يُنْفِقُونَ قُلِ الْعَفْوَ ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ
ये आपसे शराब और जुए के बारे में सवाल करते हैं तो कह दीजिए कि इन दोनों में बहुत बड़ा गुनाह है और बहुत से फ़ायदे भी हैं लेकिन इनका गुनाह फ़ायदे से कहीं ज़्यादा बड़ा है और ये राहे ख़ु़दा में ख़र्च के बारे में सवाल करते हैं कि क्या ख़र्च करें तो कह दीजिए कि जो भी ज़रूरत से ज़्यादा हो। ख़ु़दा उसी तरह अपनी आयात को वाज़ेह करके बयान करता है कि शायद तुम दुनिया व आख़ेरत के बारे में फ़िक्र कर सको।
तब ख़लीफ़ा ए दोम को बहुत तक़लीफ़ हुई क्योंकि ये उनके शौक़ और पसंद की चीज़ थी और आपने रसूलुल्लाह सल्लल’लाहू अलैहे व आलिही व सल्लम से इस बारे में बात की और कुछ सुन्नी रिवायात में मौजूद है कि आपने दुआ माँगी कि, “ऐ रब! इस बारे में और साफ़-साफ़ बयान नाज़िल फ़रमाइए।”, बहरहाल सूरः मायदा की आयत 90-91 नाज़िल हुई –
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ईमानवालों! शराब, जुआ और बुत (और) पाँसा यह सब गन्दे शैतानी आमाल (काम) हैं लेहाज़ा उनसे परहेज़ करो ताके कामयाबी हासिल कर सको।
إِنَّمَا يُرِيدُ الشَّيْطَانُ أَنْ يُوقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ فِي الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَنْ ذِكْرِ اللَّهِ وَعَنِ الصَّلَاةِ ۖ فَهَلْ أَنْتُمْ مُنْتَهُونَ
शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के बारे में तुम्हारे दरम्यान बुग़्ज़ और अदावत पैदा कर दे और तुम्हें याद ए ख़ुदा और नमाज़ से रोक दे। तो क्या तुम वाक़ेअन रूक जाओगे?
इसके बाद कुछ सुन्नी रिवायात में आता है कि इन आयात के नाज़िल होने पर जब ख़लीफ़ा ए दोम ने सुना तो कहने लगे, “हम बाज़ आए।”, और कुछ रिवायात में है कि जब रसूलुल्लाह ने, सूरः निसा की आयत 43 बयान फ़रमाई तब ख़लीफ़ा ए दोम ने कहा, “हम बाज़ आए।” यानी दौर ए जहालियत में ख़लीफ़ा ए दोम, शराब और जुएँ के बेहद शौकीन थे और बाद में बाज़ आए हालाँकि वो सच में बाज़ आए भी या नहीं आए?, इस पर भी इख़्तिलाफ़ है और ना चाहते हुए भी हम, इनका ख़ुलासा करने पर मजबूर हो गए हैं। आगे के पार्ट्स में लोगों तक इस बारे में भी हक़ पहुँचाने की कोशिश करेंगे।
ऊपर बयान की इन आयात ए करीमा पर अगर ग़ौर करो तो तुम पाओगे कि आयत ए ततहीर में रिज़्स को अहलेबैत से दूर करने की वही खुद रब ए काबा ने की है और सूरः मायदा की आयत 90 में अल्लाह रब उल इज़्ज़त ने शराब को भी रिज़्स कहा है तो क़ुरान की इन दो आयात से ही वाज़ेह तौर पर रब ए काबा ने खुद गवाही दे दी कि अली अलैहिस्सलाम पर लगाए इल्ज़ाम झूठे और बेबुनियादी हैं।
बहरहाल! हम पहले से ही एक बात कहते आए हैं कि तुम हमारे आबा ओ अज्दाद पर झूठे इल्ज़ाम लगाने से बाज़ आ जाओ बदले में हम तुम्हारे शेख़ साहबों की हक़ीक़त आम नहीं करेंगे लेकिन आपको खुद शौक़ उमड़ पड़ा है अपने बड़ों को उरियाँ कराने का तो ये ही सही।
सूरः निसा की आयत नंबर 43 जिस पर झूठा वाक्या बनाकर मौला अली अलैहिस्सलाम की तरफ़ मंसूब किया गया है, वो दरअसल, ख़लीफ़ा ए दोम के लिए, उनकी शराब पीने की लत की वजह और उनके किए सवाल-जवाब की वजह से नाज़िल हुई है। शराब से जुड़ी इस आयत के नुज़ूल का ताल्लुक़ ख़लीफ़ा ए दोम से है और मौला अली अलैहिस्सलाम से इस आयत के नुज़ूल का कोई ताल्लुक़ नहीं। इस आयत से जुड़ी हदीस, सिहाह सित्ताह में से एक मोअतबर किताब, सुन्नान नसाई, इंटरनेशनल नंबरिंग के मुताबिक हदीस नंबर 5542 में दर्ज है, जो चाहे वो खुद भी तहक़ीक़ कर सकता है।
अगले पार्ट में इस आयत से जुड़ी सहीह रिवायात, शराबियों की असली पहचान ज़ाहिर की जाएगी और कुछ ख़ुलासे किए जाएँगे और मौला अली पर गढ़ी गई झूठी रिवायात की हक़ीक़त भी बयान की जाएगी। इंश आ अल्लाह।
To be continued….

