
अल्लाह फरमाता है:
قُلْ لَا أَسْتَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْراً إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَى
ऐ महबूब ! फरमा दीजिए मैं तुम से कुछ नहीं मांगता, इतना ज़रूर कहता हूँ कि मेरे क़रीबों से मुहब्बत करो।
हमारे रसूलुल्लाहका चार शख्स ऐसे हैं जिन की में कयामत के दिन में शफाअत करूंगा अगर्चे वह तमाम एहले ज़मीन के गुनाहों जितने गुनाह लेकर आऐं (1) मेरी आल की तक्रीम करने वाला (2) उनकी हाजात पूरी करने वाला (3) उनके कामों में दौड़ धूप करने वाला (4) ज़बान और दिल से उनको चाहने वाला। (अल् सवाईक मेहरका )
मजीद इर्शाद फरमाते हैं:
इर्शाद है कि:
से मुझसे मुहब्बत करो अल्लाह की वजह से और मेरे एहले बैत मुहब्बत करो मेरी मुहब्बत की वजह से। (किताबुल शिफा)
सैयदना सिद्दीक अकबर फरमाते हैं कि :-
खुदा की कसम में अपने क़रीबों से ज़्यादा हुज़ूर के एहले बैत को अज़ीज़ रखता हूँ। (सहीह बुखारी)
सैयदना फारूक आज़म ने अपने लख्ते जिगर अब्दुल्लाह की निस्बत हसनैन करीमेन रिजवानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन को दोगुना माले गनीमत दिया (अल् रियाजुल नज़रा ) और एक दफा इमाम हसन से फरमाया कि:
अल्लाह के बाद तुम्हारी बरकत से हमें इज्ज़त व अज़मत अता
हुई।
सैयदना अबु हुरैरा ने इमाम हुसैन के पाए अदस अपने कपड़े से पोंछे और कहा कि :-
अल्लाह की कसम ! जितने आपके फज़ाइल में जानता हूँ लोग जान लें तो आपको कंधों पर उठाए फिरें। (इज़हारुल सआदत)
फरमाते हैं कि: इमाम शाफई
एहले बैत ! तुम्हारी मुहब्बत को अल्लाह ने कुरआन में फर्ज़ करार दिया है। हमारी शान के लिए यही काफी है कि जिसने तुम पर दुरूद न पढ़ा इसकी नमाज़ नहीं होगी।

