हुजूर सैयेदुना मौला अली शेर ए खुदा (عليه السلام) से मोहब्बत जरूरियते दीन मै से है””

हुजूर सैयेदुना मौला अली शेर ए खुदा (عليه السلام) से मोहब्बत जरूरियते दिन मैसे है””

जरूरियाते दिन को पहचान ने के दो तरीके है वो चीज जिसके मूताअलिक कब्र मे सवाल होगा या फिर वो चीज जिसके मूताअलिक रोजे मेहसर सवाल किया जाएगा (immigration test)

وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُمْ مَسْئُولُونَ

और उन्हें (सिरात के पास) रोको उनसे पूछ۔गज होगी

اور انہیں (صراط کے پاس) روکو، اُن سے پوچھ گچھ ہوگی۔‏

(कुरआन ए माजिद सुरह अस۔सफ्फात आयत नंबर 24)

इमाम देलमी (रेहमतुल्लाही अलैहे) ने हजरत अबू सईद खुद्री (रजी अल्लाह अन्हो) से रिवायत बयान की है के: इमाम उल अम्बिया हुजूर मोहम्मद मुस्तफा ﷺ ने फरमाया
وقفوھم انهم مسئولون عن ولایته علیٍ

यानी “के उन्हें खड़ा करो उनसे विलायत ए अली (करमअल्लाहु वजहुल करीम) के बारे मे पूछा जाएगा”

وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُمْ مَسْئُولُونَ

उन्हें खड़ा करो, उनसे पूछा जाएगा” के मूतअलिक मरवी है

ای عن ولایته علیٍ واھل البیت

यानी “के वो मौला अली और अहले बैत के विलायत के मूतअलिक पूछा जाएगा क्योंकी अल्लाह ताअला ने हुजूर नबी ए करीम ﷺ को कुरआन मे हुक्म फरमाया है के
قُلۡ  لَّاۤ اَسۡـَٔلُکُمۡ عَلَیۡہِ  اَجۡرًا  اِلَّا الۡمَوَدَّۃَ  فِی الۡقُرۡبٰی

“अय हबीब आप फरमा दीजिए “मैं इस तबलीग ए रिसालत पर तुमसे कोई अर्ज तलब नहीं करता सिवाए मेरी अहले बैत की मोहब्बत”

(कुरआन ए मजीद सूरह अल۔शूरा आयत ए मुवद्दत)

पूछे जाने का मतलब ये है के क्या उन्होंने अपने नबी ए करीम ﷺ की वसीयत के मुताबिक हक्क़ ए मुवद्दत ए अहले बैत अदा किया है?? या उसे जाया करदिया है और उसे एक हलकी चीज समझा है

فتکون علیهم المطالبته و التبعته
बहरहाल उन चीजों का अहले मेहसर से मुतालबा होगा और सजा मिलेगी

[अस۔सवाइक उल मुहारिका सफह 131, इमाम इब्ने हज्र मक्की]

अल्लाह ताअला हमें रसूलल्लाह ﷺ और उनकी अहले बैत की मवद्दत ओ मोहब्बत मे जिंदा रखे और उन्ही की मवद्दत ओ मोहब्बत मे मौत अता करे और जन्नत मे इन्ही के करीब जगाह अता करे,,
अल्लाहुम्मा आमीन बा तुफैल ए पंजतन पाक (عليهم الصلاة والسلام)

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