उमर_खैय्याम



उमर खैय्याम फारसी जुबान के बहुत बड़े शायर थे उनकी रुबाईयां मशहूर हैं विश्व की तमाम बड़ी भाषाओं में उस का तर्जुमा हुआ है वह शायर के इलावा एक बड़े गणितज्ञ और वैज्ञानिक भी थे गणित में भी उन की किताब काफी प्रसिद्ध है विश्व के अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है लेकिन उन्होंने गणित में अपनी किताब फारसी भाषा में नहीं अरबी भाषा में लिखी है,

इसी तरह उनके दोस्त व गाडफादर निजामुल मुल्क तूसी ने राजनीति शास्त्र में एक किताब लिखी जिस का नाम सियासत नामा है किताब फारसी में है फिर खुद ही इस का अरबी में तर्जुमा किया और उस का नाम सैरुल मलूक रखा

आप देखें उमर खैय्याम से पहले और उनके बाद बहुत से वैज्ञानिक गणितज्ञ खगोलशास्त्री तबीब वैध दार्शनिक ऐसे गुजरे हैं जो ईरानी थे उन की मातृभाषा फ़ारसी थी पर उन्होंने अपनी किताबें फ़ारसी भाषा में न लिख कर अरबी भाषा में लिखा

मोहम्मद ख्वार्जिमी, अब्दुर्रहमान सूफी, अल बैरूनी इब्ने सीना नसीरुद्दीन तूसी अबू रागिब अस्फहानी जैसे बडे-बडे लोगों ने अपनी मातृभाषा में न लिख कर अरबी में लिखना बेहतर समझा क्योंकि अरबी भाषा ने एक वैज्ञानिक व इलमी भाषा का रूप ले लिया था

मुसलमान अरब से निकले और ईरान पर विजय पाई ईरानी राजनीतिक व सैनिक रूप से हार जरूर गए थे लेकिन उन की सभ्यता बहुत मजबूत थी उन की सांस्कृतिक विरासत बड़ी गहरी थी ईरानी सभ्यता ने हार नहीं मानी ईरानी और अरबी सभ्यता में टकराव हुआ दोनों तरफ से संगठन बने प्रतिस्पर्द्धा हुई

लेकिन जल्द ही दोनों में सुलह हो गई दोनों सभ्यताओं ने एक साथ रहना सीख लिया दोनों सभ्यताओं ने एक दूसरे को प्रभावित किया और खुद भी प्रभावित हुईं ईरानी सभ्यता ने खाने-पीने पहनने ओढ़ने में अपना प्रभाव छोड़ा तो इल्म में अरब सभ्यता ने

अरबी भाषा बोलने वाले तीनों महाद्वीप एशिया यूरोप और अफ्रीका में फैले हुए थे जबकि फ़ारसी भाषा के लोग सिर्फ एक क्षेत्र के कुछ देशों में इस लिए फारसी लेखकों को भी अपनी बात दूर तक पहुँचाने के लिए अरबी भाषा का सहारा लेना पड़ा

सभ्यताएं ऐसे ही पनपती हैं तरक्की करती हैं जब वह दूसरी सभ्यता से मिलती हैं तो अपना असर छोड़ती हैं और दूसरी का असर कबूल भी करती हैं

अब कुछ लोग ज्ञान दे रहे हैं कि अरब जंगली बद्दुओं ने ईरान की विशाल सभ्यता को नष्ट कर दिया

अरे भाई आप वाटस ऐप युनिवर्सिटी का ज्ञान अपने पास रखो क्यों हर जगह टांग अड़ाते हो अरब बद्दुओं की भाषा कई शताब्दियों तक ज्ञान विज्ञान की भाषा रही है

Leave a comment