
ऐ मेरी बेटी फातिमा! अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने ज़मीन पर दो मर्तबा नज़र फरमाई…एक बार मुझ मुहम्मद ﷺ को देखा चुना और दूसरी बार तुम्हारे शौहर अली को चुना।
मुझे नबी बनाया और अली को मेरा वसी बनाया और मेरा वसी तमाम वासियों से बेहतर है।
( अल मुज्जम-उल-अवसत )


ऐ मेरी बेटी फातिमा! अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने ज़मीन पर दो मर्तबा नज़र फरमाई…एक बार मुझ मुहम्मद ﷺ को देखा चुना और दूसरी बार तुम्हारे शौहर अली को चुना।
मुझे नबी बनाया और अली को मेरा वसी बनाया और मेरा वसी तमाम वासियों से बेहतर है।
( अल मुज्जम-उल-अवसत )

