मिश्कत ए हक़्क़ानिया जीवनी वारिस पाक- 5

हज़रत वारिस पाक से सम्बन्धित भविष्यवाणियां

लखनऊ में एक सन्त या बुजुर्ग रहते थे जिनका नाम अकबर शाह साहब था। उनके यश से लोग प्रभावित थे। सदैव लोग उनके पास एकत्रित रहते थे। लोग उनको इस समय का ‘कुतुब’ कहते थे। एक दिन की बात है कि हज़रत ख़ादिम अली शाह महोदय आपको साथ लेकर हज़रत अकबर शाह से मिलने गये शाह को साथ लेकर साहब ने आपको देखते ही गोदी में बड़ी प्रसन्नता से बिठा लिया और भविष्यवाणी की ‘साहबजादे अपने समय में अद्वितीय होंगे इस भविष्यवाणी को मौलवी ख़ुदा बख्खा साहब शायक ने पुस्तक ‘तोहफ़्तुल असफिया’ में लिखा है, जिसके परसियन इबारत का अनुवाद निम्नलिखित है :

एक दिन हुजूर सैय्यद वारिस अली शाह साहब हज़रत अकबर शाह साहब का दर्शन करने गए। अकबर शाह पश्चिमी इलाके के शहर लखनऊ में चौक स्थिति मसजिद बसातिया में रहते थे। उनकी ख्याति चारों ओर फैली हुई थी। लोगों की भीड़ उनके दर्शनार्थ एकत्र होती थी। लोग अकबर शाह के सम्बन्ध में कहते थे कि ‘कुतुब’ हैं। उन्होंने हज़रत वारिस पाक को अपनी गोद में खींच लिया और उनके रूप को देखते ही खादिम अली शाह से कहने लगे कि इस बालक जैसा सौभाग्यशाली कोई भी हजारों वर्षों तक इस मुल्क में जन्म नहीं लेगा। यह बालक रूप में देवता हैं और इस मिट्टी के पुतले में नख से शिख तक प्रकाश ही प्रकाश भरा है। इनकी ख्याति का डंका चारों ओर संसार में बजेगा। संपूर्ण मानव तथा जिन्न इसकी बन्दगी और वन्दना करेंगे। आप इस बालक की शिक्षा पूरी तरह हिम्मत से करेंगे । अतः इसके बाद सैय्यदना हज़रत ख़ादिम अली शाह ने आपकी ओर विशेष ध्यान देना आरम्भ कर दिया।

जनाब रहीम शाह साहब का कहना है कि हम ने मौलाना शाह अब्दुर्रहमान साहब मोहिद, सूफी लखनवी के खास आदमी से सुना है कि उक्त सूफी कहा करते थे। इस समय देवा में एक साहबजादा हैं जिनकी ओर सदैव लोगों की भीड़ जमा होती रहेगी और उनके यश का सूर्य पूरब से पश्चिम तक चमकता रहेगा।

मौलाना शाह अब्दुर्रज्जाक साहब बांसवी से लिखित है- मेरी पांचवीं पुश्त में एक सूर्य उदय होगा जिसका प्रकाश मैं देखता हूँ। वास्तव में वही हुआ। पांचवी पुश्त में सरकार वारिस पाक प्रकट हुए जो इस भविष्यवाणी को सार्थक करते हैं ।

इसी तरह शाह नजातुल्लाह साहब जो खादिम अली शाह के धर्मगुरू थे। सीना खोलकर तथा देवा शरीफ की ओर मुंह करके कहते थे। उस सूर्य की रोशनी अपने सीने में भर रहा हूँ जो अब उदय होना चाहता हैं। सारांश यह कि देवा कि भूमि पर वारिस रूपी सूर्य का उदय हुआ जिसकी किरणें भिन्न-भिन्न धर्मों के अनुयाइयों तथा हम सभी लोगों के हृदय को प्रकाशित करती है। साथ ही देवा को वह सम्मान मिला जिससे सभी इश्क अथवा अनुराग वाले माथा टेकते हैं।

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