Hazrat Makhdoom Husamuddin husami r.a

जनाब हज़रत सैय्यद शाह अबुल हसन क़ुत्बी शहीद मानिकपुरी रहमतउल्लाह अलैह ने अपनी तसनीफ़ आईने अवध सफ़ा नम्बर 67 दफ़ा नम्बर 32 बहवाला किताब जज़्बुल क़ुलूब हज़रत मख़दूम हुसामुल हक़ मानिकपुरी रहमतउल्लाह अलैह के अजदाद के मुताल्लिक़ यूँ फ़रमाया है कि- जनाब सैय्यदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन रज़िअल्लाह अन्हु के शहादत के बाद यज़ीद पलीद के हुक्म पर वलीद बिन उक़बा ने हरावल लशकर होकर मदीना मुनव्वरा पर चढ़ाई कर दिया और क़त्ले आम शुरु कर दिया और मुद्दत तक मदीना मुनव्वरा वीरान रहा इसी फ़ितने मे हज़रत अमीर हसन बिन हज़रत अब्दुल्लाह बिन हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़िअल्लाह अन्हु मदीना से मुन्तक़िल होकर शहर यमन मे जा बसे जहां वो और उनकी औलाद शराए दीन-ए-मुहम्मदी की तालीम बाटने मे मसरूफ़ रहें फिर बइनक़िलाब ख़लीफ़ा-ए-अब्बासिया हज़रत अमीर हसन रज़िअल्लाह अन्हु के आठवें जानशीन हज़रत मौलाना शाह इस्माईल क़ुरैशी फ़ारूक़ी रहमतउल्लाह अलैह ने बख़ौफ़ फ़ितना क़याम अपना वहां मुनासिब ना जानकर फ़ारस आयें और फ़िर वहां से बतौर ख़ुद अहेद सुल्तान शम्सउद्दीन अल्तमश देहली पहुँचे लेकिन बवजह आरिफ़ बिल्लाह होने के किसी ख़िदमत सुल्तानी को पसन्द ना फ़रमा कर बहुक्म बातिन वतन मानिकपुर अख़्तियार किया तब हुज़ूर बादशाह से साठ बीघा अराज़ी मानिकपुर ख़ास मे जो अब ख़ानकाह के शक्ल मे है बग़रज़ तामीर मस्जिद ख़ानकाह मदरसा और मकानात के दी गई, बाद तामीर इमारत आपने अपने इल्म ज़ाहिर व बातिन से एक आलम को मुनव्वर फ़रमाया आपका मज़ार मुबारक चौकापारपुर है जो दरगाह मुल्क इमामउद्दीन से मिला हुआ है! हज़रत मौलान शाह इस्माईल क़ुरैशी फ़ारूक़ी रहमतउल्लाह अलैह के तीसरे पुश्त मे हज़रत शाह मख़दूम हुसामुद्दीन हुसामुल हक़ रहमतउल्लाह अलैह जैसी बर्ग़ुज़ीदा शख़्सियत ने जनम लिया जिनके नूर ज़ाहिर व बातिन से न सिर्फ़ मानिकपुर बल्कि ये पूरा आलम मुनव्वर हुआ और क़यामत तक रहेगा आप ख़लीफ़ा व मुरीद हज़रत नूर क़ुतुबे आलम पंडवी रहमतउल्लाह अलैह के है जो औलाद और ख़लीफ़ा हज़रत अलाउल हक़ पंडवी रहमतउल्लाह अलैह के हैं, आपको वलायत मानिकपुर बअहेद सुल्तान इब्राहीम शाह शरकी सन् 804 हिजरी 1402 ईस्वी, 854 हिजरी 1455 ईस्वी को तजवीज़ हुई, इस अजमाल की तफ़्सील बहवाला रफ़ीकुल आरफ़ीन ये है कि हज़रत शाह नूर क़ुतुबे आलम पंडवी रहमतउल्लाह अलैह ने मख़दूम शाह हुसामउद्दीन रहमतउल्लाह अलैह को बाद तक्मील तमाम, पंडवा शरीफ़ से देहली लेजाकर बमजमा उलेमाएकिराम व मशाइख़ एज़ाम बैरूने दरवाज़ा दरगाह सुल्तानुल-मशाएख़ हज़रत निज़ामउद्दीन औलिया रहमतउल्लाह अलैह के बअताए ख़िरका ख़लाफ़त सरफ़राज़ फ़रमाया और दस्तार इमतियाज़ के अपने दस्ते मुबारक से मख़दूम साहेब के सर मुबारक पर बांधा और वलायत मानिकपुर पर मामूर फ़रमाया इस पर किसी ने अर्ज़ किया कि मानिकपुर के साहिबे ख़िदमत हज़रत नसीरउद्दीन रहमतउल्लाह अलैह आपके हमशीरा ज़ादे (भांजे) है और इज्तिमा दो साहिबे वलायत का एक जगह मुहाल है तब हज़रत के ज़ुबान मुबारक से ये इरशादो फ़रमान हुआ कि- नसीर ता नसीर, हुसाम ता क़याम! फ़िर मख़दूम पाक बहुसूल शर्फ़ दस्तूरी देहली से मानिकपुर मे तशरीफ़ लायें और मस्नदे सज्जादा रुश्दो इरशाद पर जलवागर होकर हर ख़ास व आम को अपने फ़ैज़ आम से माला माल फ़रमाया और इल्म बातिन को साथ इल्म ज़ाहिर के ऐसी तत्बीक़ दी कि किसी मशाइख़ व आलिम उस अस्र को बख़ैर तस्लीम के मक़ाम चूँ व चरा का बाक़ी ना रहा उस वक़्त से आज तक जिस क़द्र आलिम व मशाइख़ गुज़रे आपके इरशाद को बतौर तमस्सुक के इस्तदलाल करते हैं और अहले बातिन फ़ैज़याब मज़ार से इस वक़्त तक होते हैं और आपकी एक करामात अब तक ये जारी और सारी है कि हर नेक और बद जो इस दरगाह से जुड़ा है उसका ख़ात्मा बिल ख़ैर होता है!

जनाब अबुल क़ासिम अब्दुल सलाम हुसैनी हसवी ने अपनी किताब अन्साब अशराफ़ सफ़ा नम्बर-367 पर हज़रत शाह मख़दूम हुसामउद्दीन हुसामुल हक़ रहमतउल्लाह अलैह के मुताल्लिक़ इस तरह लिखा है- शाह हुसामुल हक़ मानिकपुरी जो अपने वक़्त के मशाइख़ और अकाबिर औलिया अल्लाह थे, एक अर्से तक इस ख़ानदान मे तज़किया व अहसान के इश्क की दुकान बरक़रार रही जहाँ से हज़ारो तिश्निगाने रूह ने फ़ैज़ हासिल किया और नसलन दर नसलन ये सिलसिला इस ख़ानदान मे चलता रहा और आपकी औलादों ने मुख़्तलिफ़ जगहों पर बूदबाश अख़्तियार किया और अपने इल्म ज़ाहिर व बातिन से उस ख़ित्ते को मुनव्वर फ़रमाया बफ़ज़्ले ख़ुदा तआला इस किताब का मुसन्निफ़ भी आपके सिलसिला-ए-औलादे दुख़्तरी मे पैदा होने का शर्फ़ रखता है जिसका खुलासा ये है कि- अमीर सैय्यद शाह क़ुतुबउद्दीन क़ुत्बी उर्फ़ मुहम्मद आक़िब इब्न हकीम सैय्यद शाह शम्सउद्दीन क़ुत्बी (बब्बू मियां) इब्न सैय्यद शाह मोहिउद्दीन क़ुत्बी (छोटे मियां) इब्न हबीबुन्निसा बीबी बिन्त शाह अब्दुलसमद हुसामी मखदूमज़ादा मानिकपुर शरीफ़ जो चौदवें पुश्त मे औलाद मख़दूम हुसामउद्दीन हुसामुल हक़ रहमतउल्लाह अलैह के हैं!

हज़रत मख़दूम शाह हुसामउद्दीन हुसामुल हक़ रहमतउल्लाह अलैह

मज़ार मुबारक हज़रत मख़दूम शाह हुसामउद्दीन हुसामुल हक़ रहमतउल्लाह अलैह (मानिकपुर)