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माविया पर अल्लाह, फरिश्तों और तमाम लोगों की लानत है

🔥 माविया पर अल्लाह, फरिश्तों और तमाम लोगों की लानत है.. 🔥

✍️ शेख नासिरुद्दीन अलबानी ने सिलसिला अहादीस ए सहीहा (जिल्द 3, सफा 460) में एक सही हदीस नक़ल करते हैं कि-
عن عبادة بن الصامت مرفوعا اللهم من ظلم اهل المدينة واخافهم فاخفه، وعليه لعنة الله والملائكة والناس اجمعين، لا يقبل منه صرف ولا عدل.
(الصحيحة)
“ऐ अल्लाह, जो अहले मदीना पर जुल्म करे और उन्हें डराए-धमकाए तो तू भी उसे डरा दे और ऐसे आदमी पर अल्लाह तआला, फरिश्तों और तमाम लोगों की लानत होती है और उसकी [ना] फर्जी [यानि फर्ज किया हुआ] इबादत कबूल होगी ना नकली।”          (हदीस नं 3392)

इसी रिवायत को इमाम तबरानी ने मुअज्मल अवसत [रकम 3589] में है और इमाम तबरानी की इसी रिवायत को इमाम हैसमी ने मजमआ उल जवाएद की तीसरी जिल्द में सफा नंबर 494 पर रकम नंबर 5823 के तहत नकल करते हुए इसकी सनद को सही कहते हैं, देखें 👇
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वही ए इलाही के बगैर अपनी ख्वाहिश से कुछ ना बोलने वाले नबी करीम सल्ल० के इस फरमान को सामने रखकर माविया को देखें तो पता चलता है क मदीना मुनव्वरा पर यजीद के हमला करने से पहले इसके बाप माविया ने बैत लेने के लिए बुशर बिन अरतात को फौज के साथ मदीना शरीफ भेजकर अहले मदीना को डराया धमकाया और फिर बैत के लिए मदीना शरीफ से हजाज और यमन की तरफ रवाना हुए और यमन में नबी करीम सल्ल० के सगे चचा हजरत अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब के बेटे हजरत उबैदुल्ला बिन अब्दुल्ला को और हज़रत अब्बास के दो छोटे छोटे मासूम पोतों का सर तन से जुदा करके उसकी मां यानि हज़रत उबैदुल्ला बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ल मुत्तलिब की बीवी के गोद में डाल दिया इससे उसकी मां पागल हो गयीं और बाजारों में अपने बच्चों का नाम लेकर चिल्लाती चीखती और दौड़ती थी।
मदीने में बुशर बिन अरतात ने हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्ला अंसारी रजिअल्लाह अन्हु से जब बैत लेना चाहा तो आप छिपकर उम्मुल-मोमिनीन हज़रत उम्मे सलमा रजिअल्लाह अन्हा से मुलाकात की तो हज़रत उम्मे सलमा ने कहा कि ‘आप अपना और मदीने में अपने कबीले वालों का ख़ून बहने से रोके और आप इस गुमराही की बैत कर लें यहां तक कि बुशर ने मुस्लिम औरतों को कैद करके उनकी शर्मगाहों को खोला और इन औरतों को बाजारों में खड़ा कर दिया।

माविया ने खुद तो मदीने पर लश्कर भेजकर बैत के लिए लोगों को डराया धमकाया जिससे लोग अपनी जान और अहले मदीना को पामाल होने से बचाने के लिए अहले मदीना ने बैत कर ली इतना ही नहीं बल्कि अपने आखिरी वक्त में माविया ने अपने बेटे यजीद को वसीयत की थी कि अहले मदीना से जब तुमको मुकाबला करना पड़े तो मुस्लिम बिन उकबा को फौज देकर भेजना और इस वसीयत के मुताबिक यजीद ने मुस्लिम बिन उकबा को फौज देकर अपनी बैत के लिए अहले मदीना पर हमला करने के लिए भेजा जो तारीख ए इस्लाम में वाक्या ए हुर्रह के नाम से इस हादसे को याद किया जाता है, इस वाक्ये से मुताल्लिक मेरा पोस्ट देखें 👇
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अब हम मुस्तनद रिवायत से से चार बातों को देखते हैं कि-
1) माविया ने बुशर बिन अरतात जैसे जालिम को मदीना मुनव्वरा बैत के लिए भेजा

2) बुशर बिन अरतात ने अहले मदीना को धमकी दी और अहले मदीना अपनी जान माल से डर गयें

3) बुशर बिन अरतात ने जुल्म ओ सितम की इंतिहा कर दी।

4) हज़रत उम्मे सलमा के मुताबिक माविया की बैत गुमराही की बैत है जिसे लोगों ने मजबूरन अपनी जान की हिफाजत के लिए किया।
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इमाम बुखारी के उस्ताद इमाम इब्ने अबी शैबा ने मुसन्नफ में हजरत वहब बिन कैसान रजिअल्लाह अन्हु से रिवायत नक़ल किया है कि हजरत जाबिर बिन अब्दुल्ला अंसारी रजिअल्लाह अन्हु को यह फरमाते हुए सुना कि-
بَعَثَ مُعَاوِیَۃُ إلَی الْمَدِینَۃِ بُسْرَ بْنَ أَرْطَاۃَ لِیُبَایِعَ أَہْلَہَا عَلَی رَایَاتِہِمْ وَقَبَائِلِہِمْ فَلَمَّا..

यानि ‘माविया ने बुशर बिन अरतात को मदीना मुनव्वरा भेजा ताकि वो अहले मदीना से उनके झंडों और कबीलों के ऐतबार से बैत कर लें।’

फिर जिस दिन हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्ला के पास अंसार के आने का दिन था उस रोज उनके पास बनू सलमा [के लोग] आए। उन्होंने [आकर] कहा : हजरत जाबिर हैं ?
लोगों ने कहा : नहीं !
उन्होंने [आपस में] कहा : चलो वापस लौट चलो, मैं उस वक्त तक उनसे बैत नहीं लूंगा जब तक उनके अंदर हज़रत जाबिर नहीं होंगे।
हज़रत जाबिर कहते हैं कि : वो लोग मेरे पास आएं और कहा कि –
  نَاشَدْتُک اللَّہَ إلاَّ مَا انْطَلَقْت مَعَنا فَبَایَعْت فَحَقَنْت دَمَک وَدِمَائَ قَوْمِکَ ، فَإِنَّک إنْ لَمْ تَفْعَلْ قُتِلَتْ مُقَاتِلَتُنَا وَسُبِیَتْ ذَرَارِیّنَا..
यानि ‘हम आपको अल्लाह का वास्ता देते हैं कि आप हमारे साथ चलकर बैत कर लें जिससे आपका और हमारे खून महफूज हो जाएं और अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हमारे लड़ सकने वाले लोग कत्ल कर दिए जाएंगे और हमारे बच्चे कैद हो जाएंगे।’
हज़रत जाबिर ने उनसे रात भर का मोहलत मांगी और जब रात हुई तो नबी करीम सल्ल० की बीवी हजरत उम्मे सलमा रजिअल्लाह अन्हा के पास गयें और उनको पूरी बात बताई तो हज़रत उम्मे सलमा ने फरमाया –
  یَا ابْنَ أَخِی ، انْطَلِقْ فَبَایِعْ وَاحْقِنْ دَمَک وَدِمَائَ قَوْمِکَ ، فَإِنِّی قَدْ أَمَرْت ابْنَ أَخِی یَذْہَبُ فَیُبَایِعُ.
यानि ‘ऐ मेरे भतीजे, जाओ बैत कर लो और अपना और अपनी कौम के खून का तहफ्फुज करो क्योंकि मैंने भी अपने भतीजे को बैत का हुक्म दिया है।’

इस हदीस की सनद सही है, देखें मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा की जिल्द नंबर 17 में सफा नंबर 110 पर रकम नंबर 32588 👇
https://share.google/D7ruULfjg1M0X1QPR

इस रिवायत का उर्दू तर्जुमा मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा की जिल्द नंबर 9 में सफा नंबर 99 से 100 पर रकम नंबर 31203 के तहत देखें 👇
https://archive.org/details/musannafibnabishaibah11/musannaf%20ibn%20abi%20shaibah%209/page/n100/mode/1up?view=theater

इस बात को और तफ्सील से इमाम बुखारी ने तारीख ए सगीर में नक़ल किया है।

इमाम बुखारी ने तारीख़ ए सगीर की पहली जिल्द में सफा नंबर 141 पर लिखते हैं कि-
حدثني سعيد بن محمد الجرمي ثنا يعقوب بن إبراهيم ثنا أبي عن محمد بن إسحاق حدثني أبو نعيم وهب بن كيسان مولى الزبير أنه سمع جابر بن عبد الله يقول قدم بسر بن أرطاة المدينة زمان معاوية فقال لا أبايع رجلا من بنى سلمة حتى يأتي جابر فأتيت أم سلمة بنت أبي أمية زوج النبي صلى الله عليه وسلم فقالت بايع فقد أمرت عبد الله بن زمعة بن أخي أن يبايع على دمه وماله أنا أعلم أنها بيعة ضلالة.

यानि ‘हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्ला रजिअल्लाह अन्हु कहते हैं : जब बुशर बिन अरतात माविया के दौर में मदीना आया तो इसने कहा कि मैंने बनू सलमा में से किसी से बैत नहीं लूंगा जब तक जाबिर बिन अब्दुल्ला बैत ना करें।
हज़रत जाबिर कहते हैं : मैं उम्मुल-मोमिनीन हज़रत उम्मे सलमा के पास गया तो उन्होंने फरमाया : बैत कर लो मैंने भी अपने भतीजे अब्दुल्ला बिन जमअह को हुक्म दिया है कि वो (माविया के लिए) अपने ख़ून और माल [की हिफाजत] पर बैत करे और कहा:
أنا أعلم أنها بيعة ضلالة.
यानि ‘मैं जानती हूं कि यह गुमराही की बैत है।’

देखें सफा नंबर 141 पर 👇
https://archive.org/details/Tarikh_Sagher_Bukhari/page/n141/mode/1up?view=theater

इमाम बुखारी ने फिर इसी किताब के सफा नंबर 111 पर लिखते हैं कि-
بعث معاوية بسر بن أرطاة سنة سبع وثلاثين فقدم المدينة فبايع ، ثم انطلق إلى مكة واليمن ، فقتل عبد الرحمن ، وقثم وعبيد الله ابني عباس.
यानि ‘माविया ने बुशर बिन अरतात को 37 हिजरी में [मदीना] भेजा तो उसने मदीने आकर बैत ली फिर वो मक्का और यमन की तरफ रवाना हुआ जहां उसने हज़रत अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब के बेटे हजरत उबैदुल्ला और पोते अब्दुर्रहमान और किस्म को कत्ल किया।’

देखें सफा 111 पर 👇
https://share.google/dz29KeJt4sVnWKeJW

इस बात को इमाम इब्ने हज़र अस्कलानी ने ‘तहजीब उल तहजीब’ में इमाम मिज्ज़ी ने ‘तहज़ीब उल कमाल फी अस्मां उर रिजाल’ की चौथी जिल्द में सफा नंबर 64 पर रकम नंबर 665 के तहत ‘बुशर बिन अरतात’ के हालात में हू-ब-हू इबारत को इमाम बुखारी की तारीख़ ए सगीर से नकल करते हुए लिखा है कि-
وقال البخاري : في التاريخ الصغير : حدثنا : سعيد بن يحيى بن سعيد ، عن زياد ، عن ابن اسحاق ، قال : بعث معاوية بسر بن أبي أرطاة سنة تسع وثلاثين ، فقدم المدينة فبايع ، ثم انطلق إلى مكة واليمن ، فقتل عبد الرحمن ، وقثم ابني عبيد الله بن عباس.
देखें सफा नंबर 64 पर 👇
https://share.google/35zRWock7LH5sR3d9

फिर इमाम शमशुद्दीन ज़हबी ने ‘सियर अलामिन नुबला’ की तीसरी जिल्द में सफा नंबर 137 पर लिखा है कि बुशर बिन अरतात ने हज़रत अब्बास के दोनों बच्चों को कत्ल कर दिया, देखें 👇
https://share.google/tbAB46D35eJTU7FyY

इमाम इब्ने असाकिर ने ‘तारीख ए मदीना दमिश्क’ की दसवीं जिल्द में सफा नंबर 151 से 152 तक तफ्सील से इस वाक्या को सनद के साथ नकल किया है।
इमाम इब्ने असाकिर ने सफा 151 पर लिखा है कि-
أَخْبَرَنا أبو الحسن بن محمد بن أحمد بن عبد الله، أنبأنا أبو منصور محمد بن الحسن النهاوندي، حدثنا أحمد بن الحسين النهاوندي، أخبرنا عبد الله بن محمد بن عبد الرحمن، حدثنا محمد بن إسماعيل البخاري، حدثنا سعيد بن يحيى، عن زياد عن ابن إسحاق، قال:
بعث معاوية بسر بن أبي أرطأة سنة سبع وثلاثين فقدم المدينة فبايع ثم انطلق إلى مكة واليمن فقتل عبد الرحمن وقثم ابني عبيد الله بن عباس .

यानि ‘माविया ने बुशर बिन अरतात को 37 हिजरी में [मदीना] भेजा तो उसने मदीने आकर बैत ली फिर वो मक्का और यमन की तरफ रवाना हुआ जहां उसने हज़रत अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब के बेटे हजरत उबैदुल्ला और पोते अब्दुर्रहमान और किस्म को कत्ल किया।’

फिर सफा नंबर 152 पर लिखा है कि-
بعث معاوية بسر بن أرطأة إلى المدينة ومكة واليمن يستعرض الناس فيقتل من كان في طاعة علي بن أبي طالب.
यानि ‘माविया ने बुशर बिन अरतात को मदीना मुनव्वरा, मक्का शरीफ और यमन की तरफ भेजा ताकि [बैत के लिए] लोगों का जायजा लिया जाए और उन लोगों को कत्ल कर दिया जाए जो हजरत अली के तरफदार हों।’

फिर आगे लिखते हैं कि
‘माविया ने बुशर को शाम से एक लश्कर के साथ रवाना किया तो वो चल पड़ा यहां तक कि मदीना पहुंचा तो उस वक्त वहां के गवर्नर सहाबिए रसूल हजरत अबू अय्यूब अंसारी रजिअल्लाह अन्हु थे जो वहां से हज़रत अली की तरफ़ कूफा भाग गयें फिर बुशर ने मेंबर ए नबवी पर चढ़कर लोगों से कहा कि –
شیخ سمح عهدته ها هنا بالأمس – يعني عثمان رضي الله عنه -وجعل يقول :
يا أهل المدينة، والله لولا ما عهد إلي أمير المؤمنين ما تركت بها محتلماً إلا قتلته.

यानि ‘मैंने इस मुकाम पर हज़रत उस्मान से अहद किया था फिर कहा :
ऐ अहले मदीना, अगर मुझे अमीरुल-मोमिनीन (यानि उस्मान) ने यह अहद ना लिया होता तो मैं तुम्हारे हर बालिग शख्स को कत्ल कर देता।
وبايع أهل المدينة لمعاوية.
यानि ‘फिर अहले मदीना ने माविया की बैत कर ली।’

देखें सफा 151 से 152 पर 👇
https://share.google/8khlw2PJ3CQPdTdPf

मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा की जिल्द नंबर 11 में सफा नंबर 666 से 667 पर रकम नंबर 38771 के तहत हज़रत अबी रबाब और इनके साथियों से मरवी है कि-
हज़रत अबू ज़र गफ्फारी रजिअल्लाह अन्हु दुआ करते हुए फरमां रहे थे कि अल्लाह हमें यौमिल बला और यौमिल औरह से पनाह मांगी।
तो जब आपसे पूछा गया कि क्या बात है ?
तो हज़रत अबू ज़र ने कहा कि – यौमिल बला से मुराद मुसीबत का दिन यानि जब मुसलमान के दो गिरोह आपस में तलवार चलाएंगे और एक दूसरे का खून बहाया जाएगा, और यौमिल औरह से मुराद शर्मगाह खोलने का दिन यानि जब मुसलमान औरतें कैद किए जाएंगी और उनकी पिंडलियों को खोला जाएगा और इनमें से जो अच्छी यानि मोटी पिंडलियों वाली मुस्लिम औरतें होंगी उन्हें खरीदा बेचा जाएगा,- मैंने अल्लाह से दुआ की है कि मैं उस जमाने को ना पाऊं जबकि तुम लोग उस जमाने को पाओगे।
रावी कहता है कि-
فَقُتِلَ عُثْمَان وَأُرْسِلَ مُعَاوِیَۃُ بْنُ أَبِی أَرْطَاۃَ إِلَی الْیَمَنِ فَسَبَی نِسَائً مِنَ الْمُسْلِمَاتِ فَأُقِمْنَ فِی السُّوقِ.
यानि ‘हजरत उस्मान शहीद कर दिए गए फिर [इसके बाद] माविया ने बुशर बिन अरतात को यमन भेजा तो उन्होंने मुस्लिम औरतों को कैद करके बाजार में खड़ा कर दिया था।’

इमाम इब्ने हज़र अस्कलानी ने ‘अल इसाबा फी तम्यीजुस् सहाबा’ में, इमाम अब्दुल बर्र ने ‘अल इस्तियाब’ में और इमाम इब्ने असीर जज़री ने “उस्दुल गाबा फी मआरिफतुस् सहाबा’ में बुशर बिन अरतात के हालात में और बहुत कुछ लिखा है जैसे कि-
وقال الدارقطني : له صحبة ، ولم تكن له استقامة بعد النبي ﷺ.
यानि ‘इमाम दारे क़ुतनी कहते हैं कि यह सहाबी है मगर नबी करीम ﷺ के बाद इसके हालात ठीक नहीं रहे।
كان يحيى بن معين يقول فيه : رجل سوء”.

यानि ‘यहया बिन मोईन कहते हैं कि यह बुरा आदमी था।’

इमाम अब्दुल बर्र ने अल इस्तियाब में लिखते हैं कि-
وقال الدار قطني : له صحبة ولم تكن له استقامة بعد النبي الله ، وهو الذي قتل طفلين لعبيد الله بن عباس بن عبد المطلب باليمن في خلافة معاوية، وهما عبد الرحمن و قثم ابنا عبيد الله بن العباس.
यानि ‘इमाम दारे क़ुतनी कहते हैं कि वह सहाबी है लेकिन नबी करीम ﷺ के बाद उसके हालात ठीक नहीं रहे, यह वही है जिसने हज़रत अबू उबैदुल्ला बिन अब्बास के दो बच्चों को यमन में मारा,- यह वाक्या माविया के ख़िलाफत के ज़माने का है वो दोनों बच्चे अब्दुर्रहमान और किस्म थे।’
इमाम इब्ने असीर जज़री ने उस्दुल गाबा में यहां तक लिखा है कि ‘हजरत अब्बास के दो छोटे पोतों का सर काटकर मां की गोद में डाल दिया जिससे मां पागल हो गई और अपने चेहरे पर तमाचे मारती थी।’
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इन सभी दलीलों से यह बात साबित होता है कि माविया ने बुशर को मदीना पर अपनी बैत के लिए भेजा जो वहां जाकर लोगों को डराया और हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्ला अंसारी रजिअल्लाह अन्हु और बनू सलमा के लोग अपने जान माल की हिफाजत करने के लिए डरकर बैत कर ली और हज़रत उम्मे सलमा ने इस बैत को गुमराही की बैत कहा..और बुशर ने शियाने अली को कत्ल किया और मुस्लिम औरतों को कैद करके बाजारों में बेचा।

क्या नबी करीम सल्ल० के फरमान और इन सभी रिवायतों को सामने रखकर अभी भी हम या कोई माविया पर लानत नहीं कर सकते जबकि नबी करीम सल्ल० ने अहले मदीना को डराने-धमकाने वालों पर अल्लाह की, तमाम मोमिनीन की और फरिश्तों की लानत भेजी है।

यजीद ने वाक्या हुर्रह में अपने बाप माविया के वसीयत के मुताबिक ही मदीना पर बैत के लिए हमला किया था क्योंकि बेटे से पहले खुद यजीद के बाप माविया ने भी यही किया था।
शैख ए मुहक्किक हज़रत शैख अब्दुल हक़ मोहद्दिस देहलवी ने तारीख ए मदीना में लिखा है कि-
“‘इब्ने शैबा सनद सही से बयान करते हैं कि मदीना मुनव्वरा के बूढ़े लोग बातें करते हैं कि माविया ने अपनी मौत के वक्त यजीद पलीद को अपने पास बुलवाकर कहा कि मुझे मालूम होता है कि तुम्हें अहले मदीना से एक दिन निपटना पड़ेगा [तब] तुम्हें जरुरी है कि तुम मुस्लिम बिन उकबा के जरिए  इसका इलाज करना क्योंकि मैं उससे ज्यादा नासिह (अच्छा उपाय बताने वाला) इस मामले में मुझे मालूम नहीं होता।
जब यजीद पलीद बाप की वफात के बाद तख्त ए अमारत पर बैठा तो उसे इस तरह का वाक्या जिस तरह हमने बयान किया है – पेश आया [तो] उसने बाप की वसीयत पर अमल किया और मुहिम अहले मदीना को  सर ए अंजाम दिया।'”
        देखें सफा 45 पर 👇
https://archive.org/details/20220920_20220920_0818/%D8%AA%D8%A7%D8%B1%DB%8C%D8%AE%20%D9%85%D8%AF%DB%8C%D9%86%DB%81%20%D9%85%D9%86%D9%88%D8%B1%DB%81/page/46/mode/1up?view=theater
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अब अगर कोई यह कहे कि अहले मदीना को माविया ने नहीं बल्कि बुशर बिन अरतात ने डराया धमकाया था तो इसमें माविया लानती कैसे हो सकता है ?
तो उससे सवाल यह है कि बुशर को अपनी बैत के लिए मदीना भेजा किसने था और शायद वो शराब के बारे में हदीस नहीं जानता कि सिर्फ शराब पीने वाले पर अल्लाह की लानत और अजाब नहीं है बल्कि आठ लोगों पर लानत है कि शराब पीने वाले, बेचने वाले, खरीदने वाले, इसका हिसाब किताब रखने वाले, लाने वाले, ले जाने वाले… – तो इसी तरह से क्या शराब पीने का जुर्म मदीना मुनव्वरा की बेहुरमती से भी छोटा जुर्म है (अबू दाऊद, 3674) ??
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दो अज़ीम व ज़रूरी चीज़ें कौन सी हैं जो हुज़ूर पाक अलैहिस्सलाम ने अपने आखरी ख़ुतबे में बतौर वसीयत फ़रमाई है

*बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम*

*रसूल अल्लाह हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के क़ौल ओ फ़रमान ए आलीशान के मुताबिक़ वो दो अज़ीम व ज़रूरी चीज़ें कौन सी हैं जो हुज़ूर पाक अलैहिस्सलाम ने अपने आखरी ख़ुतबे में बतौर वसीयत फ़रमाई हैं👉*

आईये हदीस के आईने में देखते हैं➡️

☪️ सहा सित्ता में से एक किताब सही मुस्लिम शरीफ़ में हदीस नम्बर 6225 में इस तरह ज़िक्र हुआ है कि➡️

*”ज़ैद बिन अरक़म रज़ियल्लाहु अन्हू फ़रमाते हैं कि रसूलअल्लाह ने एक दिन मक्का और मदीना के दरमियान वाक़ए मक़ामे “ख़ुम्” के पानी के मक़ाम पर ख़ुत्बा सुनाने को खड़े हुए, आप अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की हम्द की और उसकी तारीफ़ को बयान किया और वाज़ ओ नसीहत की,फिर फ़रमाया के ए लोगों में आदमी हूँ क़रीब है कि मेरे रब्ब का भेजा हुआ मौत का फरिश्ता पैग़ाम ए अजल लाए और में क़ुबूल कर लूँ। में तुम मे दो बड़ी चीज़ें छोड़े जाता हूँ पहली तो अल्लाह की किताब है और उसमे हिदायत है और नूर है,फिर रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने फ़रमाया के दूसरी अज़ीम चीज़ मेरे अहलेबैत हैं, में तुम्हे अपने अहलेबैत के बारे में अल्लाह तआला याद दिलाता हूँ, तीन बार यही फ़रमाया ।(मफ़हूम ए हदीस ए सकलैन)*

अब यहाँ एक बात तो अच्छे से वाज़ेह हो गई के अल्लाह के रसूल अलैहिस्सलाम जो दो अज़ीम चीज़ें छोड़ कर गए हैं उनमें से एक क़ुरआन है और दूसरी हुज़ूर के अहलेबैत हैं।इन्ही दोनों चीज़ों(क़ुरआन व अहलेबैत) से उम्मत को रसूलअल्लाह ने जुड़े रहने और हिदायत लेने की तालीम और वसीयत फ़रमाई है।अब यहाँ पर क़ुरआन के बारे में तो कोई इख़्तिलाफ़ नही है कि उसके बारे में सबको मालूम है कि ये अल्लाह की किताब है,लेकिन अब यहाँ अहलेबैत के बारे में जानना भी ज़रूरी है कि अहलेबैत में आख़िर कौनसी हस्तियाँ शामिल हैं जिनसे जुड़े रहने के लिए हुज़ूर को तीन बार बोलना पड़ा।


➡️एक दूसरी जगह फिर ये रिवायत आयी है जिसमे कुछ और बात साफ़ हो जाती है👉

Sahih Muslim Hadees # 6228

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكَّارِ بْنِ الرَّيَّانِ، حَدَّثَنَا حَسَّانُ يَعْنِي ابْنَ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ سَعِيدٍ وَهُوَ ابْنُ مَسْرُوقٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ حَيَّانَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ، قَالَ: دَخَلْنَا عَلَيْهِ فَقُلْنَا لَهُ: لَقَدْ رَأَيْتَ خَيْرًا، لَقَدْ صَاحَبْتَ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَصَلَّيْتَ خَلْفَهُ، وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِنَحْوِ حَدِيثِ أَبِي حَيَّانَ، غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ:    أَلَا وَإِنِّي تَارِكٌ فِيكُمْ ثَقَلَيْنِ: أَحَدُهُمَا كِتَابُ اللهِ عَزَّ وَجَلَّ، هُوَ حَبْلُ اللهِ، مَنِ اتَّبَعَهُ كَانَ عَلَى الْهُدَى، وَمَنْ تَرَكَهُ كَانَ عَلَى ضَلَالَةٍ    وَفِيهِ فَقُلْنَا: مَنْ أَهْلُ بَيْتِهِ؟ نِسَاؤُهُ؟ قَالَ: لَا، وَايْمُ اللهِ إِنَّ الْمَرْأَةَ تَكُونُ مَعَ الرَّجُلِ الْعَصْرَ مِنَ الدَّهْرِ، ثُمَّ يُطَلِّقُهَا فَتَرْجِعُ إِلَى أَبِيهَا وَقَوْمِهَا أَهْلُ بَيْتِهِ أَصْلُهُ، وَعَصَبَتُهُ الَّذِينَ حُرِمُوا الصَّدَقَةَ بَعْدَهُ
Sahih Hadees

तर्जुमा–सईद बिन मसरूक़ ने बिन हैयान से उन्होंने ज़ैद बिन अरक़म रज़ियल्लाहू अन्हू से रिवायत की कहा हम उनके पास आये और उनसे अर्ज़ की:आप ने बहुत खैर देखी है, आप रसूल अल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के साथ रहे हैं और आप अलैहिस्सलाम के पीछे नमाज़ें पढ़ीं हैं और फिर अबु हैयान की हदीस की तरह हदीस बयान की के रसूलअल्लाह ने फ़रमाया *”देखो में तुम्हारे दरमियान दो अज़ीम चीज़ें छोड़े जा रहा हूँ, एक अल्लाह की किताब है जिसने उसे थाम कर उसकी इत्तेबा किया वो सीधी राह पर रहेगा और जो उसे छोड़ देगा वो गुमराही पर होगा।और दूसरी चीज़ मेरे अहलेबैत हैं।हम ने आप से पूछा कि आप के अहलेबैत कौन हैं? सिर्फ़ आप की अज़वाज ?हुज़ूर ने फ़रमाया नही ,अल्लाह की क़सम ! औरत अपने मर्द के साथ ज़माने का बड़ा हिस्सा रहती है, फिर वो उसे तलाक़ दे देता है तो वो अपने बाप और अपनी क़ौम की तरफ़ वापस चली जाती है।आप स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के बाद आप के अहलेबैत वो हैं जो आप के खानदान से हैं आप के रिश्तेदार जिन पर सदक़ा हराम है।”*


*अहलेबैत से कौन मुराद हैं ?*➡️
Jam e Tirmazi Hadees # 3787

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَصْبَهَانِيُّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عُبَيْدٍ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ رَبِيبِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا سورة الأحزاب آية 33 فِي بَيْتِ أُمِّ سَلَمَةَ، ‏‏‏‏‏‏فَدَعَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاطِمَةَ،‏‏‏‏ وَحَسَنًا،‏‏‏‏ وَحُسَيْنًا فَجَلَّلَهُمْ بِكِسَاءٍ،‏‏‏‏ وَعَلِيٌّ خَلْفَ ظَهْرِهِ فَجَلَّلَهُ بِكِسَاءٍ، ‏‏‏‏‏‏ثُمَّ قَالَ:‏‏‏‏    اللَّهُمَّ هَؤُلَاءِ أَهْلُ بَيْتِي فَأَذْهِبْ عَنْهُمُ الرِّجْسَ وَطَهِّرْهُمْ تَطْهِيرًا   ، ‏‏‏‏‏‏قَالَتْ أُمُّ سَلَمَةَ:‏‏‏‏ وَأَنَا مَعَهُمْ يَا نَبِيَّ اللَّهِ ؟ قَالَ:‏‏‏‏    أَنْتِ عَلَى مَكَانِكِ وَأَنْتِ إِلَى خَيْرٍ   . قَالَ:‏‏‏‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، ‏‏‏‏‏‏وَمَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ، ‏‏‏‏‏‏وَأَبِي الْحَمْرَاءِ، ‏‏‏‏‏‏وَأَنَسٍ، ‏‏‏‏‏‏قَالَ:‏‏‏‏ وَهَذَا غَرِيبٌ هَذَا الْوَجْهِ.
Sahih Hadees

*तर्जुमा–सहा सित्ता की मशहूर किताब तिरमिज़ी शरीफ़ की हदीस नम्बर 3787 में ज़िक्र आया है कि जब आयते करीमा*
*إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا*
*ऐ (पैग़म्बर के) अहले बैत खुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है वैसा पाक व पाकीज़ा रखे* (अल अहज़ाब-33)

नबी करीम अलैहिस्सलाम पर जब ये👆आयत हज़रत उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हू के घर मे उतरीं तो आप अलैहिस्सलाम ने हज़रत फ़ातिमा, हज़रत हसन व हज़रत हुसैन अलैहिस्सलाम को बुलाया और आपने उन्हें एक चादर में ढाँप लिया और अली अलैहिस्सलाम भी आपके पुश्त मुबारक के पीछे थे तो आप ने उन्हें भी चादर में छुपा लिया फिर यूँ फ़रमाया *”ए अल्लाह ये मेरे अहलेबैत हैं”* तू इनसे नापाकी को दूर रख और इन्हें अच्छी तरह से पाक रखना।उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हू ने फरमाया :में भी इनके साथ हूँ? आप अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया तुम अपनी जगह पर रहो और तुम भी नेकी पर हो।

*👆इस हदीस पाक से हमें पता चल जाता है कि अहलेबैत में हुज़ूर के अलावा अमीरूल मोमेनीन हज़रत अली,हज़रत फ़ातिमा ज़हरा,हज़रत इमाम हसन और इमाम हुसैन शामिल हैं और हुज़ूर पाक ने तमाम उम्मत को क़ुरआन के साथ इन्ही हस्तियों से जुड़े रहने को फ़रमाया है।*

*Sahih Bukhari Hadees # 3751*

حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ , وَصَدَقَةُ ، قَالَا : أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ ، عَنْ شُعْبَةَ ، عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدٍ ، عَنْ أَبِيهِ ، عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا ، قَالَ : قَالَ أَبُو بَكْرٍ :    ارْقُبُوا مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي أَهْلِ بَيْتِهِ    .

Sahih Hadees

बुखारी शरीफ की हदीस नम्बर 3751 में *हज़रत अबूबकर रज़ियल्लाहु अन्हू ने फरमाया के नबी करीम स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की ख़ुशनूदी को आप के अहलेबैत के साथ मोहब्बत व ख़िदमत के ज़रिए तलाश करो।*(मतलब हुज़ूर पाक को खुश और राज़ी करना है तो हज़रत अली,हज़रत फ़ातिमा,इमाम हसन और  इमाम हुसैन की मोहब्बत दिल मे होना ज़रूरी है और इन्ही हज़रात की ख़िदमत भी ज़रूरी है।)


*☪️Mishkat ul Masabeeh Hadees # 6183*

وَعَن
أبي ذرٍ أَنَّهُ قَالَ وَهُوَ آخِذٌ بِبَابِ الْكَعْبَةِ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «أَلَا إِنَّ مِثْلَ أَهْلِ بَيْتِي فِيكُمْ مِثْلُ سَفِينَةِ نُوحٍ مَنْ رَكِبَهَا نَجَا وَمَنْ تَخَلَّفَ عَنْهَا هلك» . رَوَاهُ أَحْمد

मिश्कात शरीफ़ की हदीस नम्बर 6183 में हज़रत अबुज़र गफ़्फ़री रज़ियल्लाहु अन्हू से रिवायत है कि उन्होनें कहा: *इस हाल मैं के वो काबे को पकड़े हुए थे, मैंने नबी करीम को फ़रमाते हुए सुना “सुनलो !तुममे मेरे अहलेबैत की मिसाल कश्तिये नूह अलैहिस्सलाम की तरह है, जो इसमें सवार हो गया वो निजात पा गया और जो इससे रह गया वो हलाक हो गया।”*

एक रिवायत और मुलाहिज़ा कीजिए👉


Mishkat ul Masabeeh Hadees # 6182

وَعَنْهُ
قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَحِبُّوا اللَّهَ لِمَا يَغْذُوكُمْ مِنْ نِعَمِهِ فَأَحِبُّونِي لِحُبِّ اللَّهِ وَأَحِبُّوا أَهْلَ بَيْتِي لحبِّي» . رَوَاهُ التِّرْمِذِيّ

Sahih Hadees

इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हू बयान करते हैं रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने फ़रमाया: *”अल्लाह से मोहब्बत करो के उसने तुम्हें नेमतों से नवाज़ा है, और अल्लाह की मोहब्बत की ख़ातिर मुझसे मोहब्बत करो और मेरी मोहब्बत की ख़ातिर मेरे अहलेबैत से मोहब्बत करो”*

🙏❤️ऊपर मौजूद तमाम रिवायात से ये बात अच्छे से समझ आ जाती है कि हुज़ूर ने अपने ख़ुतबे में जिन दो अज़ीम और ज़रूरी चीज़ें अपने बाद छोड़ी हैं उनमें से एक क़ुरआन है और दूसरी हुज़ूर के अहलेबैत हैं, और क़ुरआन के साथ अहलेबैत को इसलिए जरूरी क़रार दिया क्योंकि क़ुरआन को समझने के लिए हुज़ूर अलैहिस्सलाम के बाद अहलेबैत ही ऐसी शख़्सियत हैं जो सही दीन व सुन्नत को अवाम तक पहुंचा सकते हैं।इसलिए अगर हुज़ूर के मुताबिक़ सही दीन व सुन्नत को हासिल करना है तो हमें क़ुरआन के साथ साथ अहलेबैत को भी अपनाना पड़ेगा।❤️🙏

🖋️ *अबु मोहम्मद👳‍♂️*

Syeda Fatima Alaihissalam ke Fazail mein Hadith…

*Hazrat miswar bin makhrama r.z se Rivayat Hai Rasool Allah sallal Allaho alyhe walehi wasallam ne farmaya*
👉🏻 _*FATIMA MERE JISM KA TUKDA HAI*_ JIS NE ISKO NARAZ KIYA US NE MUJH KO NARAZ KIYA.. JIS CHIZ SE USE KHUSHI HOTI HAI US SE MUJE KHUSHI HOTI HAI…
Ref:-
Bukhari sharif hadis no 3637
Muslim sharif hadis no6308
Musnad ahmed hadis no 11375
Hakim alMustdrak hadis no 4734

“Hazrat Abdullah Bin Abbas (رضي الله ﺗﻌﺎﻟﯽٰ عنه) Se Riwayat Hai Ki Huzoor (صلى الله عليه وآله وسلم)‎ Ne Hazrat Fatimah (سلام الله عليها) Se Farmaya : Allah Ta’ala Tumhein Aur Tumhari Aulaad Ko Aag Ka Azaab Nahin Dega.”


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“Hazrat Abdullah Bin Mas’ood (رضي الله ﺗﻌﺎﻟﯽٰ عنه) Se Riwayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram (صلى الله عليه وآله وسلم)‎ Ne Farmaya : Be Shak Fatimah (سلام الله عليها) Ne Apni Ismat Wa Paak Daamani Kee Aisi Hifaazat Kee Hai Ki Allah Ta’ala Ne Use Aur Us Kee Aulaad Ko Aag Se Mahfooz Farma Diya Hai.”
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“Hazrat Jabir Bin Abdullah (رضي الله ﺗﻌﺎﻟﯽٰ عنه) Se Riwayat Hai Ki Rasool Allah (صلى الله عليه وآله وسلم)‎ Ne Farmaya : Meri Beti Ka Naam Fatimah Is Liye Rakkha Gaya Hai Ki Allah Ta’ala Ne Use Aur Us Se Mahabbat Rakhne Waalo’n Ko Dozakh Se Alag Thalag Kar Diya Hai.”
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(Allahu Akbar Subhan Allah ❤)

Reference :
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1 – Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 11/210, Raqam-11685,
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2 – Bazzar Fi Al-Musnad, 05/223, Raqam-1829,
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3 – Daylami Fi Musnad-ul-Firdaws, 01/346, Raqam-1385,
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*रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम ने फ़रमाया:- ए फातिमा ع  क्या तुम इस बात पे राज़ी नहीं हो कि अल्लाह ﷻ ने तमाम अहले जमीन में से सिर्फ दो मर्दों ही को चुना है – उन में से एक मै मुहम्मद ﷺ और दूसरा तुम्हारा शौहर अली अलैहिस्सलाम है*



قال رسول اللهﷺ: : اے فاطمہ ع! کیا تم اس بات پر راضی نہیں ہو کہ اللہﷻ تعالیٰ نے تمام اہل زمین میں سے صرف دو مردوں ہی کو چنا ہے۔ ان میں سے ایک میں محمدﷺ اور دوسرا تمہارا شوہر علی علیه‌السلام۔

📚 अल मुस्तदरक अला सहिहीन फ़िल हदीस