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Iftar Ka Asal Waqt Kya Hai? |  Mufti Fazal Hamdard

*ज़रा सोचिए कि क्या आप क़ुरआन के हुक्म के मुताबिक अपना रोज़ा इफ़्तार करते हैं ??*

*📖 क़ुरआन – सूरह अल-बक़रह, आयत 187*

ثُمَّ أَتِمُّوا الصِّيَامَ إِلَى اللَّيْلِ
*“फिर रोज़े को रात तक पूरा करो।”*

*मग़रिब (Maghrib) क्या है?*

*मग़रिब वह समय है जब सूरज डूब जाता है और आसमान नारंगी रोशनी से चमक रहा होता है।*

*अल-लैल (रात) क्या है?*

*अल-लैल वह समय है जब सूरज ग़ुरूब होने के बाद वो नारंगी रोशनी जो आसमान में सूरज गुरूब होने की जगह पर दिखाई देती रहती है वो नारंगी रोशनी ग़ायब हो जाती है और अंधेरा छा जाता है और सितारे दिखाई देने लगते हैं।*

*नोट:-*

*आयत “ثُمَّ أَتِمُّوا الصِّيَامَ إِلَى اللَّيْلِ” में अल्लाह तआला ने रोज़े की सीमा स्पष्ट कर दी है कि रोज़ा रात तक पूरा करना है।*
*इसका मतलब यह है कि जैसे ही सूरज पूरी तरह ग़ुरूब हो जाए,और आसमान में छाई वो नारंगी रोशनी पूरी तरह ख़त्म हो जाए तो रोज़ा मुकम्मल हो जाता है और इफ़्तार करना जायज़ हो जाता है।*

Iftar ke Waqt ki Ahadees:
Sunnat-e-Nabwi (ﷺ): Hazrat Umar ibn al-Khattab (R.A) se riwayat hai ke RasoolAllah (ﷺ) ne farmaya, “Jab raat idhar (purab) se aaye aur din udhar (pashchim) se chala jaye aur suraj doob jaye, to rozedaar ko apna roza iftar kar lena chahiye” Sunnah.com.

Iftar ka Sahi Waqt:
Sunset: Sooraj ki tikkhi (disk) mukammal ghaib ho jane par.

Ehtiyat: Hanafia ke nazdeek, jab suraj doob jaye aur thora andhera ho jaye, tab iftar karna behtar hai.