
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद दीनोरी रहमतुल्लाह तआला अलैहि
आप हज़रत अबू इसहाक शामी चिश्ती के पीरो मुर्शिद हैं। हम्दान और बगदाद के बीच एक शहर में पैदा हुए बो दीनोर के नाम से मशहूर है।
आप बड़े पाए के बुजुर्ग हुए हैं, आप के इल्म और जुम्ला कमालात का तमाम जमाना काइल है। और चिश्तिया सिलसिले के पीरों में आप को बहुत ऊँचा मुकाम हासिल है। आप निहायत दौलतमन्द थे। दौलतमन्द होने के साथ-साथ आप इन्तिहाई दर्जे के गरीब परवर भी थे। जब यादे इलाही ने आप पर गल्बा किया तो आपने अपनी सारी दौलत राहे खुदा में लुटा दी। आपने हजरते खिजिर अलैहिस्सलाम से भी मुलाकात की थी और उन्हीं के इर्शाद पर आप ख्वाजा हुबैरा बसरी के मुरीद हुए थे।
आप की ये करामत बहुत मशहूर है कि एक बार आप बुत खाने की तरफ जानिकले और बुत पूजने वालों से फरमाया, “तुम को शरम नहीं आती कि खुदा को छोड़कर बूतों की पूजा करते हो।” आप के इस कहने का बुत परस्तों पर ऐसा असर हुआ कि वहाँ मौजूद सारे के सारे बुत परस्त कलिमा पढ़कर दाखिले इस्लाम हुए। १४, मुहर्रमुलहराम सन् (३१९) हिजरी में आप की वफात हुई।

