हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह की वो रहस्यमयी प्लेट और दरवाजा, जो इतिहास और ईमान को जोड़ती है

*हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह की वो रहस्यमयी प्लेट और दरवाजा, जो इतिहास और ईमान को जोड़ती है* 🕌

*कभी आपने हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह के सामने मौजूद जामा’त खाना मस्जिद (खिलजी मस्जिद) के दरवाज़े को ध्यान से देखा है*?

*वहीं लगी हुई है एक गोल धातु की प्लेट*…

*जिस पर अरबी में ऐसे नाम खुदे हैं, जो सिर्फ़ नाम नहीं — बल्कि इस्लामी इतिहास की रूह हैं*

*बीच में लिखा है — “अल्लाह”*
*और उसके चारों तरफ़ ये पाक नाम दर्ज हैं*:
☪️ *मुहम्मद* ﷺ
☪️ *अली*
☪️ *फ़ातिमा*
☪️ *हसन*
☪️ *हुसैन*
*ये सभी नाम पैगंबर मुहम्मद ﷺ और उनके अहले-बैत से जुड़े हैं* —
*यानी नुबूवत, रिसालत, इमान और कुर्बानी का पूरा सिलसिला एक ही प्लेट पर* ✨

*🪔 इतिहास + आस्था + रूहानियत का संगम*

*ये प्लेट सिर्फ़ एक सजावट नहीं है*…
*ये इस बात की गवाही है कि*
*दिल्ली की सरज़मीन सिर्फ़* *सल्तनतों की नहीं*,
*औलिया, सूफिया और इमान *की भी राजधानी रही है* 🕌
*खिलजी दौर की ये मस्जिद*
*सिर्फ़ इबादत की जगह नहीं थी*,
*बल्कि*:

*दीन की तालीम का मरकज़*

*सूफी तहज़ीब का निशान*

*अहले-बैत से मोहब्बत की मिसाल*

*और इस्लामी पहचान का जीता-जागता सबूत थी* ❤️

*उस दौर में ऐसी निशानियां बनाना*
*एक साफ़ पैग़ाम था — 👉 “हमारी पहचान ताक़त से नहीं, आस्था से है*।”
👉 *“हमारी जड़ें सल्तनत में *नहीं, रसूल ﷺ से जुड़ी हैं*।

*ज़्यादातर लोग रोज़ वहाँ से गुज़र जाते हैं*…
*लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि*
👉 *ये प्लेट क्या है*
👉 *किस दौर की है*
*👉 *और इसका मतलब क्या है*
*अगले पोस्ट में बताएँगे — इस प्लेट का ऐतिहासिक रहस्य और किसने इसे बनवाया था*… 👑

*अगर आपके दिल में भी*
*अल्लाह, रसूल ﷺ और अहले-बैत से मोहब्बत है*…

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