हुजूरे पाक से इश्क की अलामत

हुजूरे पाक से इश्क की अलामत

हज़रत शैख अमानुल्लाह अब्दुल मुल्क पानी पती कुद्दस सिर्रहू (997 हि.) ने फ़रमायाः

दुरवैशी मेरे नज़दीक दो चीज़ों में है, एक ( 1 ) खुश अखलाकी और (2) मुहब्बत एहले बैत । मुहब्बत का कामिल दर्जा यह है कि महबूब के मुतअल्लिकीन से भी मुहब्बत की जाए, अल्लाह तआला से कमाल मुहब्बत की निशानी यह है कि हुज़ूर से मुहब्बत हो और हुज़ूर से इश्क की अलामत यह है कि आप के एहले बैत से मुहब्बत हो। अगर आप पढ़ते पढ़ाते आपकी गली से सैयद जादे खेलते कूदते निकलते आप (सूफी अमानुल्लाह पानीपती) हाथ से किताब रख कर सीधे खड़े हो जाते और जब तक सैयद ज़ादे मौजूद रहते आप बैठते न थे।” ( अख़बारुल अख्यार फी इसरारुल अबरार )

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