Once a trader became separated from his caravan of companions. He came across Shaykh Fadhl Ibn Ahmed. The Shaykh questioned him with regards to his situation the trader explained his predicament. Meanwhile a lion passed them; the Shaykh said, “Climb onto the back of this lion.” He said to the lion, “Carry him and take him back to his caravan.” The lion then proceeded on its way with the trader on its back. Once Saleh, slave to Hadhrat Fadhl went to the bazaar. Both his hands were busy and his trousers became loose. Shaykh hadn’t yet set eyes on Saleh however he said to those that were seated around him, “Go and find Saleh and tell him to rectify his trousers.” ” (Jame’ Karamaatul Auliya)
Yaum e Shahadat Hazrat Muhammad ibn Abu Bakr as-Siddiq (Radi Allaho tala anho) ___
Hazrat Abu Bakr as-Siddiq (Radi Allaho tala anho) ke Bete, Hazrat Muhammad (Radi Allaho tala anho) ki Shahadat ka din:
16 Ramzan ke din, Hazrat Muhammad ibn Abu Bakr as-Siddiq (Radi Allaho tala anho) Roze ki halat main Shahid huwe the.
ALLAH Unke Marateeb buland farmaye, Aameen.
Jo log Hazrat Abu Bakr as-Siddiq (Radi Allaho tala anho) ki Mohabbat ka dawa karte hain, wo Unke bete Hazrat Muhammad (Radi Allaho tala anho) ki Shahadat ka tazkara kyun nahin karte?
Note: Hazrat Abu Bakr as-Siddiq (Radi Allaho tala anho) ke bade bete, Hazrat Abdur Rehman (Radi Allaho tala anho) ne Yazid ke Khalifa banaye jane ki mukhalefat ki thi, Unki Shahadat ka bhi tazkara kyun nahin karte? ____
Ham Imam Hassan (Aleyhesalaam) va Imam Hussain (Aleyhesalaam) ke sath sath,
Hazrat Muhammad ibn Abu Bakr (Radi Allaho tala anho) va Hazrat Abdur Rehman ibn Abu Bakr (Radi Allaho tala anho) ki Shahadaton ka Tazkara bhi Ham karte hain!
मुआविया बिन अबू सूफियान ने खलीफा ए अव्वल हजरत अबू बकर सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो) के बेटे को शहीद करके गधे की खाल मै सी के आग मै जला दिया तारीख ए तब्री, जिल्द : शोअम, सफाह नं: 306
जब हजरत आयशा (रजी अल्लाह ताअला अन्हा) को मोहम्मद बिन अबू बकर (राजी अल्लाह ताअला अन्हो) के कतल की खबर मिली तो उन्हें इसका बहुत अफसोस हुआ इस वाक़िए के बाद हजरत आयशा (रजी अल्लाह ताअला अन्हा) हर नमाज के बाद मुआविया और अमर के लिए बददुआ करते – मोहम्मद इब्ने अबू बकर (रजी अल्लाह ताअला अन्हो) के कतल के बाद हजरत आयशा (रजी अल्लाह ताअला अन्हा) ने उनकी औलाद को अपने पास रखा इस तरह कासम बिन मोहम्मद बिन अबू बकर (रजी अल्लाह ताअला अन्हो) ने उनके पास परवरिश पाई (जो ताबाइन मै मदीना के सबसे बड़े आलिम है) तारीख ए तब्री, जिल्द : शोअम, सफाह नं: 306 _______ Note=: हजरत मोहम्मद इब्ने अबू बकर (रजी अल्लाह ताअला अन्हो) खलीफा ए अव्वल हजरत अबू बकर सिद्दीक के सगे बेटे है और उम्मूल मोमिनिन हजरत आयशा (रजी अल्लाह ताअला अन्हा) के सगे भाई है,,
नबी ए करीमص ने मौला अली अलैहिस्सलाम से फरमाया कि- “मेरे बाद उम्मत तुमसे गद्दारी करेगी, तुम मेरे दीन पर क़ायम रहोगे और मेरी सुन्नत पर शहीद किए जाओगे। जिसने तुमसे मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने तुमसे बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा और आपकी दाढ़ी अनकरीब सर के ज़ख्म से तर होगी।” – कंजुल-उम्माल, हदीस नंबर 32997.
नबी-ऐ-क़रीम, रऊफ़-ओ-रहीम ﷺ के बाद यह उम्मत मौला अली अलैहिस्सलाम से गद्दारी करेगी!!!!!
ऐहले’सुन्नत की मशहूर और मोतबर कुतुब ‘कंज़ुल-उम्माल’, ‘मुसनद अबी याला’, मुस्तदरक अलस-सहीऐन (रक़म 4686) और ‘इजालतुल खुफ़ा’ में हदीस है कि मोहम्मद ﷺ ने मौला अली ع से फ़रमाया कि:- “मेरे बाद उम्मत तुमसे गद्दारी करेगी, तुम मेरे दीन पर क़ायम रहोगे और मेरी सुन्नत पर शहीद किये जाओगे। जिसने तुमसे मोहब्बत करी उसने मुझसे मोहब्बत करी और जिसने तुमसे बुग़्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा और आपकी दाढ़ी अनक़रीब सर के ज़ख्म से तर होगी।” – कंज़ुल-उम्माल, हदीस नंबर 32997, इमाम हाकिम निशापुरी ने और इमाम ज़हबी ने भी इसे सही कहा है।
लगभग यही बात इमाम अबी याला (वफ़ात 307 हिजरी) ने अपनी मशहूर किताब मुस्नदे अबू याला में लिखा है कि:- “हज़रत अली ع फ़रमाते हैं कि हम रसूल अल्लाह ﷺ के साथ मदीने की गलियों में टहल रहे थे और आपने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था, फ़िर अचानक हम सब एक बाग के पास पहुंचे तो मैंने कहा कि या रसूल अल्लाह ﷺ ! यह कितना अच्छा बाग है। आप ﷺ ने फ़रमाया कि आपके लिए जन्नत में इससे भी अच्छा बाग है। इसी तरह हम सात बागों से गुज़रें और हर बार यही सवाल किया तो रसूल अल्लाह ﷺ ने यही जवाब दिया कि आपके लिए जन्नत में इससे भी अच्छा बाग है। फ़िर रास्ते में मोहम्मद ﷺ रोने लगें तो मैंने कहा कि या रसूल अल्लाह ﷺ आप क्यूं रो रहे हैं??? तो आप ﷺ ने फ़रमाया कि “उस बुग़्ज़ की वजह से रो रहा हूं जो लोगों के सीने में तेरे लिए है..जिसका इज़हार मेरे (विसाल के) बाद करेंगें। फ़िर मैंने अर्ज़ किया कि क्या मेरा दीन सलामत रहेगा??? आपने कहा कि आपका दीन सलामत रहेगा।”
क्या सचमुच इस उम्मत के उन क़लमा पढ़ने वालों ने मौला अली ع के साथ गद्दारी और नाइंसाफ़ी करी, जो हयाते मुस्तफ़ा ﷺ में आपको मौला कहते थे और यह उम्मत अली ع को अपना मौला मानकर मुबारकबाद दिया करते थी….?
हज़रत शाह वली उल्लाह मुहद्दिस देहलवी ने ‘इजालतुल-खुफ़ा’ में और शाह अब्दुल हक मुहददिस देहलवी ने मदारिजुन्नबुवत में लिखा है कि मोहम्मद ﷺ ने मौला अली ع को नसीहत करी कि जब लोगों का बुग़्ज़ ज़ाहिर हो और तुम पर ज़ुल्म हो तो मेरे बाद तुम पर लाज़िम है कि सब्र करो!!!!! यह बात ऐहले’सुन्नत वल जमाआत के कई मोतबर किताब से साबित है कि मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ने मौला अली ع से पेशनगोई/भविष्यवाणी कर गये थे कि मेरे बाद यानि मेरे विसाल होने के बाद मेरी यह उम्मत तुमसे (यानि अली ع और इनके खानदान से) गद्दारी करेगी और लोगों के दिलों में तुम्हारे लिए जो बुग़्ज़ आज छिपा हुआ है वोह ज़ाहिर होगा।
इसके अलावा अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी ने मदारिजुन्नबुवत में लिखा है कि नबी करीम ﷺ ने हज़रत अली ع से कहा कि मेरे बाद तुम्हें मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा और तब तुम सब्र से काम लेना।
नबी ﷺ की मशहूर हदीस है कि अली से कोई बुग़्ज़ नहीं करेगा सिवाय मुनाफ़िक और कोई मोहब्बत नहीं करेगा सिवाय मोमिन के… यानि अली ع की मोहब्बत ईमान है और अली ع का बुग़्ज़ मुनाफ़िक़त है।