ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहिया से बेहतरीन कोई ओरत

रसूलल्लाह ﷺ ने फरमाया
खुदा की कसम खुदा ने मुझे ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहिया से बेहतरीन कोई ओरत अता नही की
वो मुझ पर उस वक़्त ईमान लाई
जब सब लोग कुफ्र इख़्तियार किए हुवे थे
उसने मेरी उस वक़्त तस्दीक़ की जब लोग मुझे झुठलाते थे
REF BOOK AL BIDAYAH WAN NIHAYAH JILD 3 SAFA 144

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ سَيِّدِنَا مُحَمَّد

गदीर के मुनकिर को हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बद्दुआ है

*गदीर के मुनकिर को हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बद्दुआ है*

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*अब्दुर्रहमान बिन अबी लैला से मरवी है,वो कहते हैं-में रहबा में सैयदना अली अलैहिस्सलाम के पास मोजूद था,उन्होंने कहा : में हर उस आदमी को अल्लाह का वास्ता देकर कहता हूं जो “गदीर ए खूम” वाले दिन रसूल अल्लाह स्वल्लालहो अलयहे वा आलेही वा सल्लम के पास मोजूद था और आप अलेहिस्सलाम को ये फरमाते हुए सुना, वो खड़ा हो जाए, ये बात सुनकर बारह आदमी खड़े हो गए, सब ने कहा: हमने नबी करीम स्वल्लाहो अलयहे वा आलेही वा सल्लम को देखा और ये फरमाते हुए सुना : जबकि हुज़ूर पाक अलयहिस्सलाम ने हज़रत अली का हाथ भी पकड़ा हुआ था के “में जिस जिस का भी मौला(आका वा सरपरस्त) हूं उन सबका मौला (आका वा सरपरस्त) ये अली भी है”  ए अल्लाह जो इस अली से दुश्मनी रखे तू भी उस से दुश्मनी रख,जो अली की मदद करे तू भी उसकी मदद कर और जो अली को छोड़ जाए तू भी उसे छोड़ दे! सिर्फ़ तीन आदमी नही उठे,तो सैयदना अली अलैहिस्सलाम ने उन तीनों पर बद्दुआ की और उन तीनों को उनकी बद्दुआ लग भी गई।*

(मुस्नद अहमद रिवायत न 12307)