Hazrat Abdul Aziz Ibn Yahya R.A

Abdul Aziz Ibn Yahya

A thief came to Abdul Aziz and took off with his cloak whilst he was in the mosque. He tried to run away through the door but found it locked. He put the cloak down then tried the door it opened. He did this a number of times; each time he experienced the same outcome. The Shaykh then questioned him, “What is the matter?” The thief explained all that took place. The Shaykh replied, “Leave it and go away the owner of this has donned this cloak and spent a great many years in night prayers.” (Jame’ Karamaatul Auliya)

चौदह सितारे इमाम मेहदी- 1

हज़रत इमाम मेहदी (अ.स.) की विलादत ब सआदत

मुवर्रेख़ीन का इत्तेफ़ाक़ है कि आपकी विलादत ब सअदत 15 शाबान 225 हिजरी यौमे जुमा बवक़्ते तुलूए फ़जर वाक़े हुई है। जैसा कि दफ़यातुल अयान , रौज़तुल अहबाब , तारीख़ इब्नुल वरदी , नियाबुल मोवद्दता ,, तारीख़े कामिल , तबरी , कशफ़ुल ग़म्मा , जिलाउल उयून , उसूले काफ़ी ,, नूरूल अबसार , इरशाद , जामए अब्बासी , आलामु वुरा और अनवारूल हुसैनिया वग़ैरा में मौजूद है।

बाज़ उलेमा का कहना है कि विलादत का सन् 256 हिजरी और माद्दए तारीख़ नूर है। यानी आप शबे बराअत के एख़तेताम पर बवक़्ते सुबहे सादिक़ आलमे ज़हूर व शहूद में तशरीफ़ लाये हैं।

हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) की फुफी जनाबे हकीमा ख़ातून का बयान है कि एक रोज़ मैं हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) के पास गई तो आपने फ़रमाया कि ऐ फुफी आप आज हमारे ही घर में रहिये , क्यों कि ख़ुदा वन्दे आलम मुझे आज एक वारिस अता फ़रमायेगा। मैंने कहा यह फ़रज़न्द किस के बतन से होगा ? आपने फ़रमाया कि बतने नरजिस से मुतावल्लिद हो गा। जनाबे हकीमा ने कहा ! बेटे मैं तो नरजिस में कुछ भी हमल के आसार नहीं पाती , इमाम (अ.स.) ने फ़रमाया कि ऐ फुफी नरजिस की मिसाल मादरे मूसा जैसी है , जिस तरह हज़रते मूसा का हमल विलादत के वक़्त से पहले ज़ाहिर नहीं हुआ उसी तरह मेरे फ़रज़न्द का हमल भी बर वक़्त ज़ाहिर होगा। ग़रज़ कि इमाम के फ़रमाने से उस वक़्त वहीं रही। जब आधी रात गुज़र गई तो मैं उठी और नमाज़े तहज्जुद में मशग़ूल हो गई , और नरजिस उठ कर नमाज़े तहज्जुद पढ़ने लगी। उसके बाद मेरे दिल में यह ख़्याल गुज़रा कि सुबह क़रीब है और इमाम हसन असकरी (अ.स.) ने जो कहा था वह अभी तक ज़ाहिर नहीं हुआ। इस ख़्याल के दिल में आते ही इमाम (अ.स.) ने अपने हुजरे से आवाज़ दी , ऐ फुफी ! जल्दी न किजिये , हुज्जते ख़ुदा के ज़हूर का वक़्त बिलकुल क़रीब है। यह सुन कर मैं नरजिस के हुजरे की तरफ़ पलटी , नरजिस मुझे रास्ते में ही मिलीं , मगर उनकी हालत उस वक़्त मुताग़य्यर थी। वह लरज़ा बर अन्दाम थीं और उनका सारा जिस्म कांप रहा था।(अल बशरा , शराह मोअद्दतुल क़ुरबा पृष्ठ 139 )

मैंने यह देख कर उनको अपने सीने से लिपटा लिया और सूरा ए क़ुल हो वल्लाह , इन्ना अनज़लना व आयतल कुरसी पढ़ कर उन पर दम किया। बतने मादर से बच्चे की आवाज़ आने लगी , यानी मैं जो कुछ पढ़ती थी वह बच्चा भी बतने मादर में वही कुछ पढ़ता था। उसके बाद मैंने देखा कि तमाम हुजरा रौशन व मुनव्वर हो गया। अब जो मैं देखती हूं तो एक मौलूद मसऊद ज़मीन पर सजदे में पड़ा हुआ है। मैंने बच्चे को उठा लिया। हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) ने अपने हुजरे से आवाज़ दी ऐ फुफी ! मेरे फ़रज़न्द को मेरे पास लाईये। मैं ले गई , आपने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और ज़बान दर दहाने वै क़रद और अपनी ज़बान बच्चे के मूँह में दे दी और कहा कि ऐ फ़रज़न्द , ख़ुदा के हुक्म से बात करो , बच्चे ने इस आयत बिस्मिल्लाह हिर रहमानिर रहीम व नर यदान नमन अल्ल लज़ीना असतज़अफ़रा फ़िल अर्ज़ व नजअल हुम अल वारीसैन की तिलावत की जिसक तरजुमा यह है , कि हम चाहते हैं कि एहसान करें उन लोगों पर जो ज़मीन पर कमज़ोर कर दिये गए हैं और उनको इमाम बनायें और उन्हीं को रूए ज़मीन का वारिस क़रार दें।

इसके बाद कुछ सब्ज़ तारों ने आकर हमें घेर लिया , इमाम हसन असकरी (अ.स.) ने उन मे से एक तारे को बुलाया और बच्चे को देते हुए कहा ख़दह फ़ा हिफ़ज़हू इसको ले जा कर इसकी हिफ़ाज़त करो यहां तक कि ख़ुदा इसके बारे में कोई हुक्म दे। क्यो कि ख़ुदा अपने हुक्म को पूरा कर के रहेगा। मैंने इमाम हसन असकरी (अ.स.) से पूछा कि यह तारा कौन था और दूसरे तारे कौन थे ? आपने फ़रमाया कि यह जिब्राईल थे और वह दूसरे फ़रिश्तगाने रहमत थे। इसके बाद फ़रमाया कि ऐ फुफी इस फ़रज़न्द को उसकी माँ के पास ले आओ ताकि उसकी आंखें खुनुक हों और महजून व मग़मूम न हो और यह जान ले कि ख़ुदा का वादा हक़ है। व अकसरहुम ला यालमून लेकिन अकसर लोग इसे नहीं जानते इसके बाद इस मौलूदे मसऊद को उसकी माँ के पास पहुँचा दिया गया।(शवाहेदुन नबूवत पृष्ठ 212 प्रकाशित लखनऊ 1905 0 )

अल्लामा हायरी लिखते हैं कि विलादत के बाद आपको जिब्राईल परवरिश के लिये उड़ा ले गये।(ग़ायतुल मक़सूद जिल्द 1 पृष्ठ 75 )

किताब शवाहेदुन नबूवत और वफ़यातुल अयान व रौज़ातुल अहबाब में है कि जब आप पैदा हुए तो मख़्तून और नाफ़ बुरीदा थे और आपके दाहिने बाज़ू पर यह आयत मन्कूश थी। जाअल अक़्क़ो वा ज़ाहाक़ल बातिल इन्नल बातेला काना ज़हूक़ा यानी हक़ आया और बातिल मिट गया और बातिल मिटने ही के का़बिल था। यह क़ुदरती तौर पर बहरे मुताक़ारिब के दो मिसरे बन गये हैं। हज़रत नसीम अमरोहवी ने इस पर क्या ख़ूब तज़मीन की है। वह लिखते हैं

चश्मो , चराग़ दीदए नरजिस

ऐने ख़ुदा की आँख का तारा

बदरे कमाल , नीमए शाबान

चौदहवां अख़्तर औज बक़ा का

हामिए मिल्लत माहिए बिदअत

कुफ्र मिटाने ख़ल्क़ में आया

वक़्ते विलादत माशा अल्लाह

कु़रआन सूरत देख के बोला

जाअल अक़्क़ो वल हक़्क़ुल बातिल

इन्नल बातेला काना ज़हुक़ा

मोहद्दिस देहलवी शेख़ अब्दुल हक़ अपनी किताब मनाक़िबे आइम्मा अतहार में लिखते हैं कि हकीमा ख़ातून जब नरजिस के पास आईं तो देखा कि एक मौलूद पैदा हुआ है। जो मख़तून और मफ़रूग़ मुंह है यानी जिसका ख़तना किया हुआ है और नहलाने धुलाने के कामों से जो मौलूद के साथ होते हैं बिलकुल मुसतग़नी है। हकीमा ख़ातून बच्चे को इमाम हसन असकरी (अ.स.) के पास लाईं , इमाम ने बच्चे को लिया और उसकी पुश्ते अक़दस और चश्मे मुबारक पर हाथ फेरा। अपनी ज़बाने मुतहत उनके मुंह में डाली और दाहिने कान में अज़ान और बाएं में अक़ामत कही। यही मज़मून फ़सल अल ख़त्ताब और बेहारूल अनवार में भी है। किताब रौज़तुल अहबाब और नियाबुल मोवद्दता में है कि आपकी विलादत बमुक़ाम सरमन राय ‘‘सामरह मे हुई है।

किताब कशफ़ल ग़म्मा पृष्ठ 120 में है कि आपकी विलादत छिपाई गई और पूरी सई की गई कि आपकी पैदाईश किसी को मालूम न हो सके। किताब दमए साकेबा जिल्द 3 पृष्ठ 194 में है कि आपकी विलादत इस लिये छिपाई गई कि बादशाहे वक़्त पूरी ताक़त के साथ आपकी तलाश में था। इस किताब के पृष्ठ 192 में है कि इसका मक़सद यह था कि हज़रते हुज्जत को क़त्ल कर के नस्ले रिसालत का ख़ात्मा कर दे।

तारीख़े अबूल फ़िदा में है कि बादशाहे वक़्त मोतज़ बिल्लाह था। तज़किरए ख़वासुल उम्मता में है कि उसी के अहद में इमाम अली नकी़ (अ.स.) को ज़हर दिया गया था। मोतज़ के बारे में मुवर्रेख़ीन की राय कुछ अच्छी नहीं है। तरजुमा तारीख़ अल खुलफ़ा अल्लामा सियूती के पृष्ठ 363 में है कि उसने अपनी खि़लाफ़त में अपने भाई को वली अहदी से माज़ूल करने के बाद कोड़े लगवाये थे और ता हयात क़ैद में रखा था। अकसर तवारीख़ में है कि बादशाहे वक़्त मोतमिद बिन मुतावक्किल था जिसने इमाम हसन असकरी (अ.स.) को ज़हर से शहीद किया। तारीख़े इस्लाम जिल्द 1 पृष्ठ 67 में है कि ख़लीफ़ा मोतमिद बिन मुतावक्किल कमज़ोर मतलून मिज़ाज और ऐश पसन्द था। यह अय्याशी और शराब नोशी में बसर करता था। इसी किताब के पृष्ठ 29 में है कि मोतमिद हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) को ज़हर से शहीद करने के बाद हज़रत इमाम मेहदी (अ.स.) को क़त्ल करने के दरपए हो गया था।

Manaqib e Sayyeda Khadijah tul Kubra

10 Ramzan ul Mubarak

Yaume Wisaal:-

Zuaja e Imaam ul Ambiya Madar e Syyeda e Kaynat Malka e Arab Mohsina e Islaam Ummul Momineen Syyeda Khadija Tul Kubra (Salamun Aleha)

Aapki Wiladat 555 Esvi Me Hui, Aapka Wisaal 10 Ramzan ul Mubarak 10 Nabawi Mutabik 619 Esvi Me Hua, Aap Shehansha e Qull Huzoor Ahmad e Mujtuba Muhammad Mustafa (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ki Pehli Zauja e Mohtarma Syyeda e Kaynat Syyeda Fatima Zehra (Salamun Aleha) Ki Walida Majida Aur Hazraat e Hasnain Karimain (Alaihimus Salam) Ki Nani Jan Thi, Aapke Damad Mola e Kaynat Mola Imaam Ali (Alaihis Salam) Aur Ameer ul Momineen Hazrat Syedna Usman Ghani (Razi Allahu Tala Anhu) Hain, 595 Esvi Me Huzoor (Alaihis Salam) Ne 4 Miskaal Sona Maher Ke Ewaz Me Aapse Nikah Farmaya, Khutba e Nikah Mohsine Islaam Hazrat Syedna Abu Talib (Alaihis Salam) Ne Padha, Huzoor (Alaihis Salam) Ne Aapse Bhut Zada Muhabbat Farmate The, Aapki Hayaat Me Huzoor (Alaihis Salam) Ne Kisi Dusri Aurat Se Nikah Nahi Kiya, Hazrat Syedna Ibrahim (Razi Allahu Tala Anhu) Ke Alawa Huzoor (Alaihis Salam) Ki Tamaam Aulad Apse Hi Hain, Huzoor (Alaihis Salam) Ne Aapki Shan Me Farmaya:- Jis Tarha Apne Zamane Ki Behtareen Aurat Maryam Hain, (Hazrat Syedna Isa Alaihis Salam Ki Walida Majida) Aur Apne Zamane Ki Behtareen Aurat Khadija Hain, Aapne Aurto Me Sabse Pehle Islaam Apnaya Aur Huzoor (Alaihis Salam) Ke Sath Namaz Padhna Aur Ibadat Karna Shuru Kiya, Jab Ahle Makkah Ne Huzoor (Alaihis Salam) Ki Mukhalifat Karna Shuru Kiya Tab Aap Har Haal Me Huzoor (Alaihis Salam) Ke Saath Rahi Aur Hosla Deti Rahi, Aapka Is Ummat Par Aesa Ehsan Hain Jo Koi Ada Nahi Kar Sakta Aapne Sabse Pehle Apna Maal Islaam Ke Liye Kharch Kiya, Aapne Apni Tamaam Milkiyat Huzoor Alaihis Salam Ko De Di Thi, Khud Allah Kareem Aur Hazrat Jibrael (Alahis Salam) Aap Par Apna Salaam Bhejte Hain, Jis Saal Aapka Wisaal Hua Usi Saal Hazrat Syedna Abu Talib (Alaihis Salam) Ka Bhi Wisaal Hua Tha, Huzoor (Alaihis Salam) Ko Aap Dono Ke Duniya Se Tashrif Le Jane Ka Itna Gum Hua Aapne Us Pure Saal Ko Gum Ka Saal Karar Diya, Aapka Mazar Mubarak Jannat ul Mualla, Makka Mukarrama, Saudia Arabia Me Marjai Khaliak Hain…

पाक मल्लिका ऐ फ़िरदौस ऐ बरी,जवजा ऐ रसूल, उम्मुल मोमिनीन  हज़रत ख़दीजा س सबसे पहली शख़्सियत हैं जिन्होंने इस्लाम कुबूल किया। आप मक्का की सबसे ज़्यादा दौलमंद बीवी थी। आप ने  रसूल अल्लाह ﷺ से निकाह के लिए रसूल अल्लाह ﷺ के घर रिश्ता भेजा। आप का निकाह हज़रत अबुतालिब عَلَیهِ‌السَّلام ने पढ़ाया।
आप रसूल अल्लाह ﷺ
के साथ लगभग 25 साल अपनी हयात तक रही। आप जब तक हयात रही रसूल अल्लाह ﷺ ने दूसरी शादी नही करी। हज़रत ख़दीजा س हिजरत से तीन साल पहले आपकी वफ़ात हुईं और उसी साल हज़रत अबुतालिब عَلَیهِ‌السَّلام की भी वफ़ात हुईं।इस साल आप ﷺ
बहुत ग़मगीन हुए और उस साल का नाम  अमूल हुजन रखा  (ग़म का साल)यह नुबूवत का 10 वां साल था । क़ुरआन में अल्लाह ﷻ ने हज़रत ख़दीजा س की शान में कई आयत मौजूद है।
Surah 93, आयत 8 में अल्लाह ﷻ अपने नबी से फ़रमाते हैं وَ وَجَدَکَ عَآئِلًا فَاَغۡنٰی ؕ
“और तुम्हें नादार पाया और फ़िर मालदार कर दिया “
आप रसूल अल्लाह ﷺ
फ़रमाते हैं
وَعَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «خَيْرُ نِسَائِهَا مَرْيَمُ بِنْتُ عِمْرَانَ وَخَيْرُ نِسَائِهَا خَدِيجَةُ بِنْتُ خُوَيْلِدٍ» مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ قَالَ أَبُو كُرَيْبٍ: وَأَشَارَ وَكِيعٌ إِلَى السَّمَاء وَالْأَرْض
हज़रत अली عَلَیهِ‌السَّلام बयान करते है मैंने रसूल अल्लाह ﷺ को फ़रमाते सुना अपने ज़माने में मरियम बिन्ते इमरान सबसे बेहतर ख़ातून थी और इस ज़माने में हज़रत ख़दीजा س सबसे बेहतरीन ख्वातीन है
मिश्कात उल मसाबीह, 6184
रसूल अल्लाह ﷺ फ़रमाते हैं कि
हज़रत ख़दीजा س तब गवाही मेरे सच्चे होने की दी थी कि जब सब मुझे झूठा बता रहे थे और जब सब मुझसे दूर भाग रहे थे तब उन्होंने इस्लाम फ़ैलाने के लिए  सारा माल दे दिया था।
हदीस शरीफ़ की एक और  रिवायत में हज़रत अबू हुरैरा बयान करते हैं कि हज़रत ख़दीजा س एक बार रसूल अल्लाह ﷺ के लिए बर्तन में खाना लेकर आ रही थी उस वक़्त हज़रत जिब्राईल अमीन रसूल अल्लाह ﷺ के पास आए और फ़रमाया कि जब हज़रत ख़दीजा س जब आएं तो उन से कहना कि अल्लाह ﷻ ने उन्हें सलाम कहा है और मैं भी सलाम पेश करता हूं।

नमुसे रिसालत ﷺ की सबसे बड़ी मुहाफ़िज़ा और दीन ऐ इस्लाम के लिए अपना सब-कुछ  दौलत और अपनी नस्ल बीवी फ़ातिमा ज़हरा س की औलाद इमाम हुसैन عَلَیهِ‌السَّلام इमाम हसन عَلَیهِ‌السَّلام की नस्ल से सभी को  कुरबान करने वाली खातून हज़रत ख़दीजा س पर लाखो सलाम

یہ ہم جودولتِ ایماں اُٹھائےپھرتے ہیں
یہ سب  ہے تیری بدولت خدیجۃؑ الکبرا

*Sayyeda Khadijah Ko Allah Pak Ki Taraf Se Salam*

Hazrat Abu Huraira Razi Allahu Tala Anhu Bayan Karte Hain :- Sayyedna Jibrail Alahis Salam Huzoor Nabi e Kareem ﷺ Ki Khidmat Me Hazir Hue Aur Arz Kiya Ya Rasool Allah ﷺ Ye Khadijah Aapki Khidmat Me Hazir Hain Inke Paas Ek Bartan Hain Jisme Salan Hai Ya Farmaya Khana Ya Koi Mashrub Hain Jab Ye Aapke Pas Aaye To Unko Allah Ta’ala Ki Taraf Se Aur Meri Taraf Se Salam Kahen Aur Unhe Jannat Me Ek Mahal Ki Basharat De Dijiyega Jahan Na Shor Hoga Na Takleef.

📚 *Reference* 📚
Sahih Muslim, Kitab ul Fazail, Jild 3, Safa 634.

*Manaqib e Sayyeda Khadijah tul Kubra*

Ameer ul Momineen Hazrat Maula Imaam Ali Alahis Salam Farmate Hain :- Huzoor Nabi e Kareem ﷺ Ne Farmaya Apne Zamane Me Mariyam Salamullah Alaiha Sabse Afzal Aurat Thi Aur Is Ummat Me Khadijah Sabse Afzal Hain.

📚 *Reference* 📚
Sahi Bukhari, Kitab ul Manaqib, Jild 2, Safa 482.