
AHLE BAYT ALAIHIS SALAM aur Ayat e Tatheer || Dr. Syed Faizan Warsi.




हज़रत इमाम अली नक़ी (अ.स.) ने अपने इमाम हसन असकरी (अ.स.) की शादी नरजिस ख़ातून से कर दी जो क़ैसरे रोम की पोती और शमऊन वसी ए ईसा (अ.स.) की नस्ल से थीं।(जिला अल उयून पृष्ठ 298 ) इसके बाद आप 3 रजब 254 ई 0 को दरजा ए शहादत पर फ़ाएज़ हुए। आपकी शहादत के बाद हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) की इमामत का आग़ाज़ हुआ। आपके तमाम मोतक़दीन ने आपको मुबारक बाद दी और आप से हर क़िस्म का इस्तेफ़ादा शुरू कर दिया। आपकी खि़दमत में आमदो रफ़्त और सवालात व जवाबात का सिलसिला जारी हो गया। आपने जवाबात में ऐसे हैरत अंगेज़ मालूमात का इन्केशाफ़ फ़रमाया कि लोग दंग रह गए। आपने इल्मे ग़ैब और इल्मे बिलमौत तक का सबूत पेश फ़रमाया और इसकी भी वज़ाहत की कि फ़लां शख़्स को इतने दिनों में मौत आ जायेगी।
अल्लामा मुल्ला जामी लिखते हैं कि एक शख़्स ने अपने वालिद समेत हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) की राह में बैठ कर यह सवाल करना चाहा कि बाप को पांच सौ दिरहम और बेटे को तीन सौ दिरहम अगर इमाम दें तो सारे काम हो जाऐ , यहां तक कि इमाम हसन असकरी (अ.स.) इस रास्ते पर आ पहुँचे। इत्तेफ़ाक़ यह दोनों इमाम (अ.स.) को पहचानते न थे। इमाम (अ.स.) ख़ुद इन दोनों के क़रीब गए और उन से कहा कि तुम्हें आठ सौ दिरहम की ज़रूरत है। आओ मैं तुम्हें दे दूं। दोनों हमराह हो लिये और रक़म माहूद हासिल कर ली। इसी तरह एक और शख़्स क़ैद ख़ाने में था। उसने क़ैद की परेशानी की शिकायत इमाम (अ.स.) को लिख कर भेजी और तंग दस्ती का ज़िक्र शर्म की वजह से न किया। आपने तहरीर फ़रमाया कि तुम आज ही क़ैद ख़ाने से रिहा हो जाओगे और तुम ने जो शर्म से तंग दस्ती का ज़िक्र नहीं किया , इसके मुताअल्लिक़ मालूम करो कि मैं अपने मुक़ाम पर पहुँचते ही सौ दिनार भेज दूंगा। चुनान्चे ऐसा ही हुआ। इसी तरह एक शख़्स ने आपसे अपनी तंग दस्ती की शिकायत की। आपने ज़मीन कुरेद कर एक अशरफ़ी की थैली निकाली और उसके हवाले कर दी। इसमें सौ दीनार थे। इसी तरह एक शख़्स ने आपको तहरीर किया कि मिशक़ात के मानी क्या हैं ? नीज़ यह कि मेरी औरत हामेला है इससे जो फ़रज़न्द पैदा होगा उसका नाम रख दीजिए। आपने जवाब में तहरीर फ़रमाया कि मिशक़ात से मुराद क़ल्बे मोहम्मदे मुस्तफ़ा (स अ व व ) और आखि़र में लिख दिया ‘‘ अज़मुल्लाह अजरकुम व अख़लफ़ अलैक ’’ ख़ुदा तुम्हें अज्र दे और नेमुल बदल अता करे। चुनान्चे ऐसा ही हुआ कि उसके यहां मुर्दा लड़का पैदा हुआ। इसके बाद उसकी बीवी हामला हुई , फ़रज़न्दे नरीना मुतावल्लिद हुआ। मुलाहेज़ा हों।(शवाहेदुन नबूवत पृष्ठ 211 )
अल्लामा अरबली लिखते हैं कि हसन इब्ने ज़रीफ़ नामी एक शख़्स ने हज़रत से मिलकर दरयाफ़्त किया कि क़ाएमे आले मोहम्मद (अ.स.) पोशीदा होने के बाद कब ज़ुहूर करेंगे ? आपने तहरीर फ़रमाया जब ख़ुदा की मसलहत होगी। इसके बाद लिखा कि तुम तप रबआ का सवाल करना भूल गए जिसे तुम मुझसे पूछना चाहते हो , तो देखो ऐसा करो कि जो इसमें मुबतिला हो उसके गले में आयत ‘‘ या नार कूनी बरदन सलामन अला इब्राहीम ’’ लिख कर लटका दो शिफ़ायाब हो जायेगा। अली बिन ज़ैद इब्ने हुसैन का कहना है कि मैं एक घोड़े पर सवार हो कर हज़रत की खि़दमत में हाज़िर हुआ तो आपने फ़रमाया कि इस घोड़े की उम्र सिर्फ़ एक रात बाक़ी रह गई है चुनान्चे वह सुबह होने से पहले मर गया। इस्माईल बिन मोहम्मद का कहना है कि मैं हज़रत की खि़दमत में हाज़िर हुआ और मैंने उनसे क़सम खा कर कहा कि मेरे पास एक दिरहम भी नहीं है। आपने मुस्कुरा कर फ़रमाया कि क़सम मत खाओ तुम्हारे घर दो सौ दीनार मदफ़ून हैं। यह सुन कर वह हैरान रह गया। फिर हज़रत ने गु़लाम को हुक्म दिया कि उन्हें अशरफ़ियां दे दो।
अब्दी रवायत करता है कि मैं अपने फ़रज़न्द को बसरे में बिमार छोड़ कर सामरा गया और वहां हज़रत को तहरीर किया कि मेरे फ़रज़न्द के लिया दुआ ए शिफ़ा फ़रमाएं। आपने जवाब में तहरीर फ़रमाया ‘‘ ख़ुदा उस पर रहमत नाज़िल फ़रमाए ’’ जिस दिन यह ख़त उसे मिला उसी दिन उसका फ़रज़न्द इन्तेक़ाल कर चुका था। मोहम्मद बिन अफ़आ कहता है कि मैंने हज़रत की खि़दमत में एक अरज़ी के ज़रिये से सवाल किया कि ‘‘ क्या आइम्मा को भी एहतेलाम होता है ? ’’ जब ख़त रवाना कर चुका तो ख़्याल हुआ कि एहतेलाम तो वसवसए शैतानी से हुआ करता है और इमाम (अ.स.) तक शैतान पहुँच नहीं सकता। बहर हाल जवाब आया कि इमाम नौम और बेदारी दोनों हालतों में वसवसाए शैतानी से दूर होते हैं जैसा कि तुम्हारे दिल में भी ख़्याल पैदा हुआ है , फिर एहतेलाम क्यों कर हो सकता है। जाफ़र बिन मोहम्मद का कहना है कि मैं एक दिन हज़रत की खि़दमत में हाज़िर था , दिल में ख़्याल आया कि मेरी औरत जो हामेला है अगर उससे फ़रज़न्दे नरीना पैदा हो तो बहुत अच्छा हो। आपने फ़रमाया कि ऐ जाफ़र लड़का नहीं लड़की पैदा होगी। चुनान्चे ऐसा ही हुआ।(कशफ़ुल ग़म्मा पृष्ठ 128 )
जाफ़र बिन शरीफ़ जरजानी का बयान करते हैं कि मैं हज से फ़राग़त के बाद हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) की खि़दमत में हाज़िर हुआ और उनसे अर्ज़ कि मौला ! अहले जरजान आपकी तशरीफ़ आवरी के ख़्वास्त गार और ख़्वाहिश मन्द हैं। आपने फ़रमाया तुम आज से 190 दिन के बाद जरजान पहुँचोगे और जिस दिन तुम पहुँचोंगे उसी दिन शाम को मैं भी पहुँचूगा। तुम उन्हें बा ख़बर कर देना। चुनान्चे ऐसा ही हुआ। मैं वतन पहुँच कर लोगों को आगाह कर चुका था कि इमाम (अ.स.) की तशरीफ़ आवरी हुई। आपने सब से मुलाक़ात की और सब ने शरफ़े ज़ियारत हासिल किया। फिर लोगों ने अपनी मुशकीलात पेश की। इमाम (अ.स.) ने सब को मुतमईन कर दिया। इसी सिलसिले में नसर बिन जाबिर ने अपने फ़रज़न्द को पेश किया , जो नाबीना था। हज़रत ने उसके चेहरे पर दस्ते मुबारक फेर कर उसे बीनाई अता कि। फिर आप उसी रोज़ वापस तशरीफ़ ले गए।(कशफ़ुल ग़म्मा पृष्ठ 128 ) एक शख़्स ने आपको एक ख़त बिला रौशनाई के क़लम से लिखा। आपने उसका जवाब मरहमत फ़रमाया और साथ ही लिखने वाले का और उसके बाप का नाम भी तहरीर फ़रमाया दिया। यह करामात देख कर वह शख़्स हैरान हो गया और इस्लाम लाया और आपकी इमामत का मोतक़िद बना गया।(दमए साकेबा पृष्ठ 172 )

*`अहले बैत से मुखालिफत करने वाला शैतान की जमात से है सहिह उल इस्नाद हदीस`*
हजरत अब्दुल्ला बिन अब्बास (राजी अल्लाह अन्हुमा) फरमाते है: रसूल अल्लाह (सलअल्लाहु अलैहे वआलेही वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: सितारे जमीन वालों के लिए डूबने से बचाव (का सबब) है और मेरे *अहले बैत* मेरी उम्मत को इख्तीलाफ से बचाने का सबब है, *अरब का कोई कबीला अगर उनकी मुखालिफत करेगा तो वो शैतान की जमात करार पाएगा,,*
अल मुस्तद्रक हाकिम जिल्द:4 हदीस नं: 4715
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: इस हदीस के मद्दे नज़र में तमाम लोगों से पूछना चाहता हूं के क्या ये फरमान रसूल अल्लाह saws ने यूं ही बेवजह बोल दिया था या उनको इस बात का इल्म था के मेरे इस दुनिया से जाने के बाद मेरे अहलेबेत (हज़रत अली,हज़रत फातिमा ,इमाम हसन,इमाम हुसैन अलैहिमुस्सलाम अजमइन) से अलग अलग वक्त इख्तलाफ करने और जंग करने भी कुछ लोग आयेंगे ??
मेरा तो ये अकीदा है की अल्लाह के रसूल saws कोई भी कलाम बेवजह नही करते बल्कि वो को भी बोलते हैं वो हुक्म ऐ खुदा होता है।
अब अगर ये बात खुद नबी saws ने बयान फरमाई है तो फिर जो जो भी इंसान इन अहलेबेत अलेहिस्सलाम के मुकाबले में आया और इन हज़रात को ज़हनी या जिस्मानी नुकसान पहुंचाया या तकलीफ पहुंचाई वो सब लोग नबी saws के हुक्म के मुताबिक़ *शैतान की जमात* क़रार पाएंगे।
अब आप लोग ख़ुद तहकीक की जिए के
हज़रत अली अलैहिस्सलाम के मुक़ाबले कौन आया ??
हज़रत फातिमा ज़हरा सलाम उल्लाह अलेहा के मुकाबले कौन कौन आया??
हज़रत इमाम हसन अलेहिस्सलाम के मुक़ाबले कौन आया??
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मुकाबले में कौन आया??
*फैसला आप खुद कीजिए??*

ENOCH (IDRIS)
Enoch (Idris) was born in the seventh generation from Adam and was the great grand father of Noah. He was a great prophet and was the recipient of numerous revelations from God. He was the originator of the art of writing, astrology, astronomy, mathematics, sewing, weights and measures and many useful instruments and implements.
It is known that despite his knowledge and piety, the people of his time ignored his teachings and the Lord brought His punishment towards them in the form of a prolonged. drought. When they repented, Enoch prayed for their forgiveness and the Lord sent down rain to quench the land and swell the rivers for trade and prosperity.
Enoch often observed fasting and spent so much of his time in prayers that even the angels in the heavens wondered over his worship. It is said that he was taken away alive by God and is kept in occultation by His Will. Enoch left a large progeny. on Earth from whom God chose great leaders and prophets.
(Idris is known as Enoch in Torah)
References: The Qur’an: Sura Mariam and Anbiya