
🤔 *आख़िर हमें हमारे आलिम/मौलवी साहब ये क्यों नही बताते के अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद saws ने हमें ये बताया है कि मेरे बाद अमीर/इमाम /ख़लीफ़ा की तादाद 12 होगी,जबकि अहलेसुन्नत की बड़ी बड़ी किताबों में हदीसों में ये बात वाज़ेह तौर पर मौजूद हैं !*
ये देखिए 👇
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ ، سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ سَمُرَةَ ، قَالَ : سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، يَقُولُ : يَكُونُ اثْنَا عَشَرَ أَمِيرًا ، فَقَالَ كَلِمَةً لَمْ أَسْمَعْهَا ، فَقَالَ أَبِي ، إِنَّهُ قَالَ : كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ .
मैंने नबी (सल्ल०) से सुना, *आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि (मेरी उम्मत में) बारह अमीर होंगे।* फिर आप (सल्ल०) ने कोई ऐसी बात फ़रमाई जो मैंने नहीं सुनी। बाद में मेरे वालिद ने बताया कि आप (सल्ल०) ने ये फ़रमाया कि वो सब-के-सब क़ुरैश ख़ानदान से होंगे।
Sahih Bukhari#7222
किताब : हुकूमत और अदालत के बयान में
➡️सही मुस्लिम शरीफ़ में तो रसूलअल्लाह saws ने साफ़ साफ़ फ़रमाया है कि वो 12 इमाम/अमीर मेरे जानशीन होंगें, मुलाहिज़ा फरमाएँ👇
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: ح وحَدَّثَنَا رِفَاعَةُ بْنُ الْهَيْثَمِ الْوَاسِطِيُّ، وَاللَّفْظُ لَهُ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ اللهِ الطَّحَّانَ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ: دَخَلْتُ مَعَ أَبِي عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ: «إِنَّ هَذَا الْأَمْرَ لَا يَنْقَضِي حَتَّى يَمْضِيَ فِيهِمِ اثْنَا عَشَرَ خَلِيفَةً»، قَالَ: ثُمَّ تَكَلَّمَ بِكَلَامٍ خَفِيَ عَلَيَّ، قَالَ: فَقُلْتُ لِأَبِي: مَا قَالَ؟ قَالَ: «كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ
हुसैन (बिन-अब्दुर-रहमान) ने हज़रत जाबिर-बिन-समुरा (रज़ि०) से रिवायत की कि मैं अपने वालिद (हज़रत समुरा-बिन-जुनादा (रज़ि०)) के साथ रसूलुल्लाह (सल्ल०) की ख़िदमत में हाज़िर हुआ, *मैंने आप (सल्ल०) को ये फ़रमाते हुए सुना : इस बात का ख़ात्मा उस वक़्त तक नहीं होगा जब तक उस में मेरे बारह जा-नशीं न गुज़रें।* फिर आपने कोई बात की जो मुझ पर वाज़ेह नहीं हुई। मैंने अपने वालिद से पूछा : आप (सल्ल०) ने क्या फ़रमाया है? उन्होंने कहा : आपने फ़रमाया है। : वो सब क़ुरैश में से होंगे।
Sahih Muslim#4723
किताब : हुकूमत के मामलों का बयान
➡️एक जगह और ज़िक्र हुआ है 👇
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «لَا يَزَالُ أَمْرُ النَّاسِ مَاضِيًا مَا وَلِيَهُمُ اثْنَا عَشَرَ رَجُلًا»، ثُمَّ تَكَلَّمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِكَلِمَةٍ خَفِيَتْ عَلَيَّ، فَسَأَلْتُ أَبِي: مَاذَا قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ فَقَالَ: «كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ
अब्दुल-मलिक-बिन-उमैर ने हज़रत जाबिर-बिन-समुरा (रज़ि०) से रिवायत की कि मैंने *रसूलुल्लाह (सल्ल०) को ये फ़रमाते हुए सुना : लोगों की इमारत जारी रहेगी यहाँ तक कि बारह लोग उनके वाली बनेंगे।* फिर नबी (सल्ल०) ने कोई बात कही जो मुझ पर वाज़ेह नहीं हुई, मैंने अपने वालिद से पूछा : रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने क्या फ़रमाया? उन्होंने कहा : रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया : वो सब क़ुरैश में से होंगे।
Sahih Muslim#4724
किताब : हुकूमत के मामलों का बयान
*📣 सहा सित्ता की किताबों में सबसे बड़ी किताबों में मौजूद इन हदीसों का कोई भी आलिम या मौलाना कभी भी कहीं भी ज़िक्र क्यों नही करते हैं ? क्या ये हदीसें मोतबर नही हैं या माज़ अल्लाह इनकी कोई हैसियत नही है ? जबकि इसमें खुल कर इस बात का ज़िक्र आया है कि हुज़ूर अलैहिस्सलाम के बाद उनके 12 ख़लीफ़ा या जानशीन होंगें जो तब तक होंगे जब तक ये दीन ए इस्लाम मौजूद रहेगा !!*
حَدَّثَنَا هَدَّابُ بْنُ خَالِدٍ الْأَزْدِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، قَالَ: سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ سَمُرَةَ، يَقُولُ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «لَا يَزَالُ الْإِسْلَامُ عَزِيزًا إِلَى اثْنَيْ عَشَرَ خَلِيفَةً»، ثُمَّ قَالَ كَلِمَةً لَمْ أَفْهَمْهَا، فَقُلْتُ لِأَبِي: مَا قَالَ؟ فَقَالَ: «كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ
हम्माद-बिन-सलमा ने सिमाक से हदीस बयान की, उन्होंने कहा : मैंने हज़रत जाबिर-बिन-समुरा (रज़ि०) को ये कहते हुए सुना : *रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया : बारह ख़लीफ़ाओं (के अहद) तक इस्लाम ग़ालिब रहेगा।* फिर आपने एक कलिमा फ़रमाया जिसको मैं नहीं समझ सका, मैंने अपने वालिद से पूछा : आप (सल्ल०) ने क्या फ़रमाया? उन्होंने कहा : आप (सल्ल०) ने फ़रमाया : वो सब क़ुरैश में से होंगे।
Sahih Muslim#4726
किताब : हुकूमत के मामलों का बयान
🔍 *आख़िर वो 12 जानशीन ए रसूलअल्लाह saws कौन हैं जिनकी ख़ुद रसूलअल्लाह saws ने इतनी ताकीद की है ?*
📢🔊 ये वही आइम्मा ए अहलेबैत हैं जो ख़ुद रसूलअल्लाह saws की आल /नस्ल से हैं जिन में से सबसे पहले अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अस हैं और 12 वें नम्बर पर हज़रत इमाम महदी हैं।अल्हम्दुलिल्लाह🤲
*यहाँ सिर्फ़ मुखतसरन उन 12 खुल्फ़ा ए रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलयहे व आलेही व सल्लम के नाम का ज़िक्र किया जा रहा है ताकि आप लोगों को उनकी पहचान हो सके➡️*
*1- हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम*
*2- हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम*
*3- हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम*
*4- हज़रत इमाम ज़ैनुलआब्दीन अलैहिस्सलाम*
*5- हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़ीर अलैहिस्सलाम*
*6- हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम*
*7- हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम*
*8- हज़रत इमाम अली रेज़ा अलैहिस्सलाम*
*9- हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम*
*10- हज़रत इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम*
*11- हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम*
*12- हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम*
🔍 इनके बारे में अपने अपने आलिम से सवाल कीजिए और किसी एक फ़िरके से इनको मंसूब कर के इनका इनकार न कीजिए,की इनको तो वो लोग अपना इमाम/ख़लीफ़ा मानते हैं तो हम क्यों इनको अपना ख़लीफ़ा/इमाम मानें ! आप सिर्फ़ अल्लाह के नबी का हुक्म माने और कुछ नही।वस्सलाम🙏

