क्या सारे सहाबा जन्नती हैं

*क्या सारे सहाबा जन्नती हैं ❓🤔*

यहाँ पर सबसे पहले हम ये बात मालूम  होना चाहिये कि सहाबा किसे कहते हैं ?

अहलेसुन्नत के नज़दीक सहाबा उस शख़्स को कहते हैं जो “हालते ईमान में नबी पाक saws के साथ रहा उनको देखा और उस ही हालते ईमान में उसका ख़ात्मा हुआ” इसको सहबीए रसूलअल्लाह saws कहा जाता है।

अहलेसुन्नत के नज़दीक ही ये भी अक़ीदा है कि सारे सहाबा जन्नती हैं, और इस ही के मुताबिक़ एक हदीस भी बयान होती है कि “मेरे सारे सहाबा सितारोँ की मानिंद हैं जिसने इनमें से किसी की भी पैरवी की वो कामयाब हुआ।”


*अब आईये हम अपने असल मौज़ू की तरफ़ आते हैं कि क्या सारे के सारे सहाबा (ऊपर मौजूद सहाबा की परिभाषा के मुताबिक़) जन्नती हो सकते हैं या नही ??*

ये बात जानने के लिए हमें क़ुरआन पर नज़र डालनी होगी कि जो भी ज़ाहिरी तौर पर ईमान वाला रसूलअल्लाह saws की सोहबत मैं बैठता था (और जो ख़ुद रसूलअल्लाह saws की नज़र में भी ईमानवाले समझे जाते थे) क्या वो सब ईमानवाले होते थे या उनमें कुछ मुनाफ़िक़ (ज़ाहिर में ईमानवाले और दिल से इस्लाम के दुश्मन) भी होते थे ? आईये जानते हैं –

إِذَا جَاءَكَ الْمُنَافِقُونَ قَالُوا نَشْهَدُ إِنَّكَ لَرَسُولُ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِنَّكَ لَرَسُولُهُ وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّ الْمُنَافِقِينَ لَكَاذِبُونَ

[ अल-मुनाफिकून – १ ]
*(ऐ रसूल) जब तुम्हारे पास मुनाफेक़ीन आते हैं तो कहते हैं कि हम तो इक़रार करते हैं कि आप यक़नीन ख़ुदा के रसूल हैं और ख़ुदा भी जानता है तुम यक़ीनी उसके रसूल हो मगर ख़ुदा ज़ाहिर किए देता है कि ये लोग अपने (एतक़ाद के लिहाज़ से) ज़रूर झूठे हैं*

सूरा ए मुनाफिक़ून की ये आयत में अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि आपके पास कुछ लोग आपकी रिसालत का इक़रार करते हैं और ये भी कहते हैं कि आप अल्लाह के रसूल हैं, लेकिन दरअसल ये ईमानवाले नही हैं बल्कि ये सिर्फ़ अपनी ज़बान से आपसे मोहब्बत दिखा रहे हैं और इनके दिलों में अभी भी आपसे बुग़ज़ है लेहाज़ा ये जो आपके साथ बेठे हैं *ये ईमानवाले सहाबी नही बल्कि मुनाफ़िक़ सहाबी हैं।*

*चलिए यहाँ सुरा ए मुनाफ़िक़ून से हमें ये बात तो साफ़ हो गई के नबी के पास दो तरह के सहाबी (साथ रहने वाले) होते थे एक ईमानवाले सहाबी और दूसरा मुनाफ़िक़ सहाबी।*

कुछ लोगों को ये बात बुरी लग सकती है कि आप सहाबा को मुनाफ़िक़ क्यों बोल रहे हैं ? तो हम आपको यहाँ ये बात साफ़ कर देते हैं कि जो  नेक सहाबा होगा वो मुनाफ़िक़ नही होगा जो मुनाफ़िक़ होगा वो नेक सहाबी नही होगा।

➡️➡️ *क्या कहीं किसी मोतबर अहलेसुन्नत की किताब में भी इस बात का ज़िक्र आया है कि नबी पाक अलैहिस्सलाम के कुछ सहाबा जहन्नमी हैं ❓*

जी बिल्कुल आया है और वो भी अहलेसुन्नत की सबसे ज़्यादा बड़ी किताब जिसको अहलेसुन्नत क़ुरआन के बाद सबसे बड़ी और सही किताब मानते हैं (सही बुख़ारी शरीफ़) उसमें एक नही बल्कि कई बार इस तरह की हदीस पेश की गई हैं,  ये देखिए 👇


وَقَالَ أَحْمَدُ بْنُ شَبِيبِ بْنِ سَعِيدٍ الْحَبَطِيُّ : حَدَّثَنَا أَبِي ، عَنْ يُونُسَ ، عَنْ ابْنِ شِهَابٍ ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيِّبِ ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ، أَنَّهُ كَانَ يُحَدِّثُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ :    يَرِدُ عَلَيَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ رَهْطٌ مِنْ أَصْحَابِي ، فَيُحَلَّئُونَ عَنِ الْحَوْضِ ، فَأَقُولُ : يَا رَبِّ ، أَصْحَابِي ، فَيَقُولُ :    إِنَّكَ لَا عِلْمَ لَكَ بِمَا أَحْدَثُوا بَعْدَكَ ، إِنَّهُمُ ارْتَدُّوا عَلَى أَدْبَارِهِمُ الْقَهْقَرَى    .



*नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, ”क़ियामत के दिन मेरे सहाबा में से एक जमाअत मुझ पर पेश की जाएगी। फिर वो हौज़ से दूर कर दिये जाएँगे। मैं कहूँगा : ऐ मेरे रब ! ये तो मेरे सहाबा हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा कि तुम्हें मालूम नहीं कि उन्होंने तुम्हारे बाद क्या-क्या नई चीज़ें घड़ ली थीं ? ये लोग (दीन से) उलटे क़दमों वापस लौट गए थे।*

Sahih Bukhari#6585

Status: صحیح

*एक और देखिए*👇

قَالَ أَبُو حَازِمٍ : فَسَمِعَنِي النُّعْمَانُ بْنُ أَبِي عَيَّاشٍ ، فَقَالَ : هَكَذَا سَمِعْتَ مِنْ سَهْلٍ ، فَقُلْتُ : نَعَمْ ، فَقَالَ : أَشْهَدُ عَلَى أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ ، لَسَمِعْتُهُ وَهُوَ يَزِيدُ فِيهَا ، فَأَقُولُ : إِنَّهُمْ مِنِّي فَيُقَالُ :    إِنَّكَ لَا تَدْرِي مَا أَحْدَثُوا بَعْدَكَ    ، فَأَقُولُ : سُحْقًا سُحْقًا لِمَنْ غَيَّرَ بَعْدِي ، وَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ : سُحْقًا : بُعْدًا ، يُقَالُ : سَحِيقٌ : بَعِيدٌ سَحَقَهُ ، وَأَسْحَقَهُ : أَبْعَدَهُ ،



*मैं शहादत देता हूँ कि मैंने अबू-सईद ख़ुदरी (रज़ि०) से ये हदीस इसी तरह सुनी थी और वो इस हदीस में कुछ ज़्यादती के साथ बयान करते थे। (यानी ये कि नबी करीम (सल्ल०) फ़रमाएँगे कि) मैं कहूँगा कि ये तो मुझ में से हैं) नबी करीम (सल्ल०) से कहा जाएगा कि आप को नहीं मालूम कि उन्होंने आप के बाद दीन में क्या किया नई चीज़ें खोज कर ली थीं। इस पर मैं कहूँगा कि दूर हो वो शख़्स जिसने मेरे बाद दीन में तब्दीली कर ली थी।*

Sahih Bukhari#6584

Status: صحیح


*एक और देखिए*👇

حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُطَرِّفٍ ، حَدَّثَنِي أَبُو حَازِمٍ ، عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ ، قَالَ : قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ :    إِنِّي فَرَطُكُمْ عَلَى الْحَوْضِ مَنْ مَرَّ عَلَيَّ شَرِبَ ، وَمَنْ شَرِبَ لَمْ يَظْمَأْ أَبَدًا ، لَيَرِدَنَّ عَلَيَّ أَقْوَامٌ أَعْرِفُهُمْ وَيَعْرِفُونِي ، ثُمَّ يُحَالُ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ    ،



*नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, ”मैं अपने हौज़े-कौसर पर तुम से पहले मौजूद रहूँगा। जो शख़्स भी मेरी तरफ़ से गुज़रेगा वो उसका पानी पियेगा और जो उसका पानी पियेगा वो फिर कभी प्यासा नहीं होगा और वहाँ कुछ ऐसे लोग भी आएँगे जिन्हें मैं पहचानूँगा और वो मुझे पहचानेंगे लेकिन फिर उन्हें मेरे सामने से हटा दिया जाएगा।”*

Sahih Bukhari#6583

Status: صحیح

*एक और देखिए*👇

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ ، قَالَ : أَخْبَرَنِي يُونُسُ ، عَنْ ابْنِ شِهَابٍ ، عَنْ ابْنِ الْمُسَيَّبِ ، أَنَّهُ كَانَ يُحَدِّثُ ، عَنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ :    يَرِدُ عَلَى الْحَوْضِ رِجَالٌ مِنْ أَصْحَابِي فَيُحَلَّئُونَ عَنْهُ ، فَأَقُولُ : يَا رَبِّ ، أَصْحَابِي ، فَيَقُولُ : إِنَّكَ لَا عِلْمَ لَكَ بِمَا أَحْدَثُوا بَعْدَكَ ، إِنَّهُمُ ارْتَدُّوا عَلَى أَدْبَارِهِمُ الْقَهْقَرَى    ، وَقَالَ شُعَيْبٌ ، عَنْ الزُّهْرِيِّ ، كَانَ أَبُو هُرَيْرَةَ ، يُحَدِّثُ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : فَيُجْلَوْنَ ، وَقَالَ عُقَيْلٌ : فَيُحَلَّئُونَ ، وَقَالَ الزُّبَيْدِيُّ ، عَنْ الزُّهْرِيِّ ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ .



*आप (सल्ल०) ने फ़रमाया, ”हौज़ पर मेरे सहाबा की एक जमाअत आएगी। फिर उन्हें उस से दूर कर दिया जाएगा। मैं कहा करूँगा मेरे रब ! ये तो मेरे सहाबा हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा कि तुम्हें मालूम नहीं कि उन्होंने तुम्हारे बाद क्या किया नई चीज़ें खोज कर ली थीं  ये उलटे पाँव (इस्लाम से) वापस लौट गए थे।*

Sahih Bukhari#6586

Status: صحیح

*एक और देख लीजिए, जिसमे साफ़ साफ़ जहन्नम का लफ़्ज़ इस्तेमाल हुआ है सहाबा की उस जमात के लिए जो रसूलअल्लाह saws की वफ़ात के फ़ौरन बाद उल्टे पाँव वापस पलट गए थे।*👇


حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُلَيْحٍ ، حَدَّثَنَا أَبِي ، قَالَ : حَدَّثَنِي هِلَالُ بْنُ عَلِيٍّ ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ :    بَيْنَا أَنَا قَائِمٌ إِذَا زُمْرَةٌ حَتَّى إِذَا عَرَفْتُهُمْ خَرَجَ رَجُلٌ مِنْ بَيْنِي وَبَيْنِهِمْ ، فَقَالَ : هَلُمَّ ، فَقُلْتُ : أَيْنَ ؟ قَالَ : إِلَى النَّارِ ، وَاللَّهِ قُلْتُ : وَمَا شَأْنُهُمْ ؟ قَالَ : إِنَّهُمُ ارْتَدُّوا بَعْدَكَ عَلَى أَدْبَارِهِمُ الْقَهْقَرَى ، ثُمَّ إِذَا زُمْرَةٌ حَتَّى إِذَا عَرَفْتُهُمْ خَرَجَ رَجُلٌ مِنْ بَيْنِي وَبَيْنِهِمْ ، فَقَالَ : هَلُمَّ ، قُلْتُ : أَيْنَ ؟ قَالَ : إِلَى النَّارِ ، وَاللَّهِ قُلْتُ : مَا شَأْنُهُمْ ؟ قَالَ : إِنَّهُمُ ارْتَدُّوا بَعْدَكَ عَلَى أَدْبَارِهِمُ الْقَهْقَرَى ، فَلَا أُرَاهُ يَخْلُصُ مِنْهُمْ إِلَّا مِثْلُ هَمَلِ النَّعَمِ    .



*नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, ”मैं (हौज़ पर) खड़ा हूँगा कि एक जमाअत मेरे सामने आएगी और जब मैं उन्हें पहचान लूँ गा तो एक शख़्स ( फ़रिश्ता ) मेरे और उन के बीच से निकलेगा और उन से कहेगा कि इधर आओ। मैं कहूँगा कि किधर? वो कहेगा कि अल्लाह की क़सम जहन्नम की तरफ़। मैं कहूँगा कि उन के हालात क्या हैं? वो कहेगा कि ये लोग आप के बाद उलटे पाँव (दीन से) वापस लौट गए थे। फिर एक और गरोह मेरे सामने आएगा और जब मैं उन्हें भी पहचान लूँगा तो एक शख़्स (फ़रिश्ता) मेरे और उन के बीच में से निकलेगा और उन से कहेगा कि इधर आओ। मैं पूछूँगा कि कहाँ? तो वो कहेगा  अल्लाह की क़सम ! जहन्नम की तरफ़। मैं कहूँगा कि उन के हालात क्या हैं? फ़रिश्ता कहेगा कि ये लोग आप के बाद उलटे पाँव वापस लौट गए थे। मैं समझता हूँ कि उन गरोहों में से एक आदमी भी नहीं बचेगा। उन सब को दोज़ख़ में ले जाएँगे।*

Sahih Bukhari#6587

Status: صحیح

अल्लाह हो अकबर, अब तो मेरे उन भाइयों के सारे शक व शुबहात दूर हो गए होंगे जो हमेशा ये राग अलापते रहते हैं कि नबी के सहाबा को बुरा मत बोलिये वो सब के सब जन्नती हैं,अरे भाई कोई भी मुसलमान किसी भी नेक सहाबा को बुरा नही बोलता है लेकिन जिसने भी नबी अलैहिस्सलाम के घरवालों पर ज़ुल्म किया और उनका हक़ ग़स्ब कर लिया या नबी अलैहिस्सलाम की सुन्नतें बदल दीं, उन मुनाफ़िक़ लोगों को तो बुरा बोला जा सकता है जिनका ज़िक्र ऊपर लिखी बुख़ारी शरीफ़ की हदीसों में भी आया है।कोई भी इंसान किसी के साथ रहने से जन्नती नही हो जाता बल्कि उसके ख़ुद के आमाल उसको जन्नती या जहन्नमी बनाते हैं।ऊपर लिखी हदीस की पेशनगोई अल्लाह तआला ने क़ुरआन में बहुत पहले ही कर दी थी ये देखिए 👇

وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ الرُّسُلُ ۚ أَفَإِن مَّاتَ أَوْ قُتِلَ انقَلَبْتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ ۚ وَمَن يَنقَلِبْ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ فَلَن يَضُرَّ اللَّهَ شَيْئًا ۗ وَسَيَجْزِي اللَّهُ الشَّاكِرِينَ

[ अल-ए-इमरान – १४४ ]
(फिर लड़ाई से जी क्यों चुराते हो) और मोहम्मद तो सिर्फ रसूल हैं (ख़ुदा नहीं) इनसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर गुज़र चुके हैं फिर क्या *अगर मोहम्मद अपनी मौत से मर जॉए या मार डाले जाएं तो तुम उलटे पॉव (अपने कुफ़्र की तरफ़) पलट जाओगे और जो उलटे पॉव फिरेगा (भी) तो (समझ लो) हरगिज़ ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा* और अनक़रीब ख़ुदा का शुक्र करने वालों को अच्छा बदला देगा


🙏देखा आपने मेरे भाइयों,क़ुरआन व अहादीस सबमें एक दम खुले अल्फ़ाज़ में बता दिया गया है कि सारे सहाबा जन्नती नही हैं बल्कि रसूलअल्लाह saws के सहाबा में कई सहाबा ऐसे हैं जो नबी saws के वफ़ात के फौरन बाद अपने कुफ़्र की तरफ पलट गए थे,   अब अगर आपको ये पता करना हो कि वो कौन सहाबा थे तो उसका आसान तरीक़ा भी नबी अलैहिस्सलाम ही बता के गए हैं जिसमें उन्होंने फ़रमाया के मेरे बाद क़ुरआन व मेरे अहलेबैत से कभी जुदा मत होना,यहाँ तक के होज़े कौसर पर मेरे पास आ जाओ।

*अब आप ख़ुद चेक कर लीजिए की रसूलअल्लाह saws की वफ़ात के बाद जिस जिस मुकाम पर नबी के अहलेबैत (हज़रत अली,हज़रत फ़ातिमा ज़हरा ,हज़रत इमाम हसन,हज़रत इमाम हुसैन अलैहिमुस्सलाम अजमईन ) को परेशान किया,उन पर ज़ुल्म किया,इन हस्तियों के हक़ पर कब्ज़ा कर लिया और इन ही सब नबी के अहलेबैत को शहीद भी किया। जिन जिन सहाबा ने अहलेबैत पर ज़ुल्म किया (क्योंकि इन सब नबी के घरवालों को परेशान करने वाले इन का हक़ पर नाजायज़ क़ब्ज़ा करने वाले और इनको शहीद करने और करवाने वाले कोई हिन्दू,यहूदी या ईसाई नही थे बल्कि सब ज़ाहिरी तोर पर मुसलमान ही थे,और उस ज़माने में जो भी मुसलमान थे वो सब या तो खुद सहाबा थे या सहाबा की औलाद में से थे) वो सब के सब जहन्नमी हैं।और इस ही के साथ साथ वो सब सहबीए रसूलअल्लाह saws भी जहन्नमी हैं जिन्होंने रसूलअल्लाह के बाद उनकी सुन्नत को बदल दिया और दीन में नई नई बिदआत शुरू कर दीं, चाहे नमाज़ में तब्दीली हो, रोज़े के अहकाम मैं तब्दीली हो या हज के अहकामात में तब्दीलियाँ हों।ये सब वो काम हैं जिनको अन्जाम देने वाले सहाबा जब हौज़ ए कौसर पर रसूलअल्लाह saws के सामने पेश किए जाएँगे तो इनको फ़रिश्ते होज़े कौसर से दूर कर देंगे,और जहन्नम में ले जाकर डाल देंगे।*

आख़िर हमें हमारे आलिम/मौलवी साहब ये क्यों नही बताते के अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद saws ने हमें ये बताया है कि मेरे बाद अमीर/इमाम /ख़लीफ़ा की तादाद 12 होगी ?

🤔 *आख़िर हमें हमारे आलिम/मौलवी साहब ये क्यों नही बताते के अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद saws ने हमें ये बताया है कि मेरे बाद अमीर/इमाम /ख़लीफ़ा की तादाद 12 होगी,जबकि अहलेसुन्नत की बड़ी बड़ी किताबों में हदीसों में ये बात वाज़ेह तौर पर मौजूद हैं !*

ये देखिए 👇

حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ ، سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ سَمُرَةَ ، قَالَ : سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، يَقُولُ :    يَكُونُ اثْنَا عَشَرَ أَمِيرًا ، فَقَالَ كَلِمَةً لَمْ أَسْمَعْهَا ، فَقَالَ أَبِي ، إِنَّهُ قَالَ : كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ    .



मैंने नबी (सल्ल०) से सुना,  *आप (सल्ल०) ने फ़रमाया कि (मेरी उम्मत में) बारह अमीर होंगे।* फिर आप (सल्ल०) ने कोई ऐसी बात फ़रमाई जो मैंने नहीं सुनी। बाद में मेरे वालिद ने बताया कि आप (सल्ल०) ने ये फ़रमाया कि वो सब-के-सब क़ुरैश ख़ानदान से होंगे।

Sahih Bukhari#7222
किताब : हुकूमत और अदालत के बयान में

➡️सही मुस्लिम शरीफ़ में तो रसूलअल्लाह saws ने साफ़ साफ़ फ़रमाया है कि वो 12 इमाम/अमीर मेरे जानशीन होंगें, मुलाहिज़ा फरमाएँ👇

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: ح وحَدَّثَنَا رِفَاعَةُ بْنُ الْهَيْثَمِ الْوَاسِطِيُّ، وَاللَّفْظُ لَهُ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ اللهِ الطَّحَّانَ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ: دَخَلْتُ مَعَ أَبِي عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ: «إِنَّ هَذَا الْأَمْرَ لَا يَنْقَضِي حَتَّى يَمْضِيَ فِيهِمِ اثْنَا عَشَرَ خَلِيفَةً»، قَالَ: ثُمَّ تَكَلَّمَ بِكَلَامٍ خَفِيَ عَلَيَّ، قَالَ: فَقُلْتُ لِأَبِي: مَا قَالَ؟ قَالَ: «كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ



हुसैन (बिन-अब्दुर-रहमान) ने हज़रत जाबिर-बिन-समुरा (रज़ि०) से रिवायत की कि मैं अपने वालिद (हज़रत समुरा-बिन-जुनादा (रज़ि०)) के साथ रसूलुल्लाह (सल्ल०) की ख़िदमत  में हाज़िर हुआ,  *मैंने आप (सल्ल०) को ये फ़रमाते हुए सुना : इस बात का ख़ात्मा  उस वक़्त तक नहीं होगा जब तक  उस  में मेरे बारह जा-नशीं  न गुज़रें।*  फिर आपने कोई बात की जो मुझ पर वाज़ेह नहीं हुई। मैंने अपने वालिद से पूछा : आप (सल्ल०) ने क्या फ़रमाया है? उन्होंने कहा : आपने फ़रमाया है। : वो सब क़ुरैश  में से  होंगे।

Sahih Muslim#4723
किताब : हुकूमत के मामलों का बयान

➡️एक जगह और ज़िक्र हुआ है 👇

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «لَا يَزَالُ أَمْرُ النَّاسِ مَاضِيًا مَا وَلِيَهُمُ اثْنَا عَشَرَ رَجُلًا»، ثُمَّ تَكَلَّمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِكَلِمَةٍ خَفِيَتْ عَلَيَّ، فَسَأَلْتُ أَبِي: مَاذَا قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ فَقَالَ: «كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ

अब्दुल-मलिक-बिन-उमैर ने हज़रत जाबिर-बिन-समुरा (रज़ि०) से रिवायत की कि मैंने *रसूलुल्लाह (सल्ल०) को ये फ़रमाते हुए सुना : लोगों की इमारत जारी रहेगी यहाँ तक कि बारह लोग उनके वाली बनेंगे।* फिर नबी (सल्ल०) ने कोई बात कही जो मुझ पर वाज़ेह नहीं हुई, मैंने अपने वालिद से पूछा : रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने क्या फ़रमाया? उन्होंने कहा : रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया : वो सब क़ुरैश  में से  होंगे।

Sahih Muslim#4724
किताब : हुकूमत के मामलों का बयान

*📣 सहा सित्ता की किताबों में सबसे बड़ी किताबों में मौजूद इन हदीसों का कोई भी आलिम या मौलाना कभी भी कहीं भी ज़िक्र क्यों नही करते हैं ? क्या ये हदीसें मोतबर नही हैं या माज़ अल्लाह इनकी कोई हैसियत नही है ? जबकि इसमें खुल कर इस बात का ज़िक्र आया है कि हुज़ूर अलैहिस्सलाम के बाद उनके 12 ख़लीफ़ा या जानशीन होंगें जो तब तक होंगे जब तक ये दीन ए इस्लाम मौजूद रहेगा !!*


حَدَّثَنَا هَدَّابُ بْنُ خَالِدٍ الْأَزْدِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، قَالَ: سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ سَمُرَةَ، يَقُولُ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «لَا يَزَالُ الْإِسْلَامُ عَزِيزًا إِلَى اثْنَيْ عَشَرَ خَلِيفَةً»، ثُمَّ قَالَ كَلِمَةً لَمْ أَفْهَمْهَا، فَقُلْتُ لِأَبِي: مَا قَالَ؟ فَقَالَ: «كُلُّهُمْ مِنْ قُرَيْشٍ

हम्माद-बिन-सलमा ने सिमाक से हदीस बयान की, उन्होंने कहा : मैंने हज़रत जाबिर-बिन-समुरा (रज़ि०) को ये कहते हुए सुना : *रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया : बारह ख़लीफ़ाओं (के अहद) तक इस्लाम ग़ालिब रहेगा।* फिर आपने एक कलिमा फ़रमाया जिसको मैं नहीं समझ सका, मैंने अपने वालिद से पूछा : आप (सल्ल०) ने क्या फ़रमाया? उन्होंने कहा : आप (सल्ल०) ने फ़रमाया : वो सब क़ुरैश  में से  होंगे।

Sahih Muslim#4726
किताब : हुकूमत के मामलों का बयान


🔍 *आख़िर वो 12 जानशीन ए रसूलअल्लाह saws कौन हैं जिनकी ख़ुद रसूलअल्लाह saws ने इतनी ताकीद की है ?*

📢🔊 ये वही आइम्मा ए अहलेबैत हैं जो ख़ुद रसूलअल्लाह saws की आल /नस्ल से हैं जिन में से सबसे पहले अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अस हैं और 12 वें नम्बर पर हज़रत इमाम महदी हैं।अल्हम्दुलिल्लाह🤲

*यहाँ सिर्फ़ मुखतसरन उन 12 खुल्फ़ा ए रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलयहे व आलेही व सल्लम के नाम का ज़िक्र किया जा रहा है ताकि आप लोगों को उनकी पहचान हो सके➡️*

*1- हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम*
*2- हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम*
*3- हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम*
*4- हज़रत इमाम ज़ैनुलआब्दीन अलैहिस्सलाम*
*5- हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़ीर अलैहिस्सलाम*
*6- हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम*
*7- हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम*
*8- हज़रत इमाम अली रेज़ा अलैहिस्सलाम*
*9- हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम*
*10- हज़रत इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम*
*11- हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम*
*12- हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम*

🔍 इनके बारे में अपने अपने आलिम से सवाल कीजिए और किसी एक फ़िरके से इनको मंसूब कर के इनका इनकार न कीजिए,की इनको तो वो लोग अपना इमाम/ख़लीफ़ा मानते हैं तो हम क्यों इनको अपना ख़लीफ़ा/इमाम मानें ! आप सिर्फ़ अल्लाह के नबी का हुक्म माने और कुछ नही।वस्सलाम🙏

विलायत को कुबूल करना

इब्ने अब्बास (रजीअल्लाहु अन्हू) सूरह यूनुस, आयत 25 की तफ़सीर बयान करते हैं 👇

وَ اللّٰهُ یَدْعُوْۤا اِلٰی دَارِ السَّلٰمِ ؕ وَ یَهْدِیْ مَنْ یَّشَآءُ اِلٰی صِرَاطٍ مُّسْتَقِیْمٍ۝
(10 वीं सूरह यूनुस, आयत 25)

वल्लाहु यद्अू इला दारिस्सलामि, व यह़्दी मंय्यशा-उ इला सिरातिम्-मुस्तक़ीम

और अल्लाह ﷻ तो आराम के घर (जन्नत/स्वर्ग) की तरफ़ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधी राह चलाता है

اور اللہ سلامتی کے گھر (جنت) کی طرف بلاتا ہے، اور جسے چاہتا ہے سیدھی راہ کی طرف ہدایت فرماتا ہے

यानी अली इब्ने अबीतालिब عَلَیهِ‌السَّلام की विलायत को कुबूल करने से है।

📚 ऐहले’सुन्नत हवाला: शवाहिद अल-तंज़ील (हाफ़िज़ अल-हस्क़नी), सफ़ाह नम्बर 263, हदीस 358