चौदह सितारे हज़रत इमाम अली रज़ा(अ.स) पार्ट- 1

17322047060618166610269903296351

हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) रसूले करीम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) के आठवें जां नशीन , मुसलमानो के आठवें इमाम और सिलसिला ए असमत की दसवीं कड़ी थे। आपके वालिदे माजिद इमाम मुसिए काज़िम (अ.स.) थे और वालेदा माजेदा उम्मुल बनीन उर्फ़ नजमा थीं। जनाबे नजमा के मुताअल्लिक़ उलमा का बयान है कि आपका शुमार अशरफ़े अजम में था और आप अक़ल व दियानीयत के लेहाज़ से अफ़ज़ल अन्साँ थीं। हमीदा ख़ातून यानी इमाम मूसिए काज़िम (अ.स.) की वालदा का कहना है कि मैंने उम्मुल बनीन से बेहतर किसी औरत को नहीं पाया।

अली बिन मीसम कहते हैं कि हमीदा ख़ातून को रसूले ख़ुदा (स.अ.) ने ख़्वाब में हुक्म दिया था कि उम्मुल बनीन की शादी इमाम मुसिए काज़िम (अ.स.) से करो ‘‘ क्यों कि सैलदसनहा ख़ैरा हल अर्ज़ ’’ इन से अनक़रीब एक ऐसा फ़रज़न्द पैदा होने वाला है जो मादरे गेती की आग़ोश में बसने वालों में सब से बेहतर होगा।( आलामुल वुरा पृष्ठ 182)

अल्लामा मोहम्मद रज़ा लिखते हैं कि जनाबे उम्मुल बनीन हुस्नो जमाल ज़ोहदो तक़वा में अपनी आप नज़ीर थीं।( जन्नातुल ख़ुलूद पृष्ठ 31)

हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) अपने आबाओ अजदाद की तरह इमाम मन्सूस ‘‘मासूम’’ आलमें ज़माना और अफ़ज़ले काएनात थे। अल्लामा इब्ने हजर मक्की तहरीर फ़रमाते हैं कि आप तमाम लोगों में जलीलुल क़दर और अज़ीम उल मरतबत थे।( सवाएक़े मोहर्रेक़ा पृष्ठ 122)

अल्लामा अब्दुरहमान जामी लिखते हैं कि आप की बातें पुर अज़ हिकमत और आपका अमल दरूस्त और आपका किरदार महफ़ूज़ अनल ख़ता था। आप इल्म हिकमत से भरपूर थे। रूए ज़मीन पर आपकी मिसाल व नज़ीर न थी।( शवाहेदुन नबूअत पृष्ठ 197 प्रकाशित लखनऊ 1904 0)

अल्लामा अबीद उल्लाह लिखते हैं कि इब्राहीम बिन अब्बास का कहना है कि मैंने इन से बड़ा आलम देखा ही नहीं।( अरजहुल मतालिब पृष्ठ 255)

अल्लामा शहीर लिखते हैं कि आप अशरफ़ुल मख़लूके ज़माना थे।( हबीब अल सैर ) आपको इल्मे माकान और मायकून आबाव अजदाद से विरासतन पहुँचा था।( वसीलतुन नजात पृष्ठ 377) आप हर ज़बान और हर लुग़त में फ़सीह और दाना तरीन मरदुम थे और जो शख़्स जिस ज़बान में बातें करता था उसको उसी ज़बान में जवाब देते थे।( रौज़तुल अहबाब ) अल्लामा मोहम्मद बिन तल्हा शाफ़ेई लिखते हैं कि आप बारह इमामों में के तीसरे अली हैं। आपका ईमान हद से बढ़ा हुआ था। आपकी शान इन्तेहां को पहुँची हुई थी। आपका कसरे फ़ज़ीलत निहायत बलन्द था और आपके इमकानाते करम निहायत वसी थे। आपके मद्दगार बे शुमार और आपके शरफ़ व इमामत निहायत रौशन थे इसी वजह से ख़लीफ़ा ए वक़्त मामून रशीद ने आपको अपने दिल में जगह दी , अपनी हुकूमत में शरीक क़रार दिया। ख़लीफ़ा ए हुकूमत बनाया और अपनी लड़की की शादी आपके साथ कर दी। आपके मनाक़िब व सिफ़ात निहायत बलन्द , आपके मकारम और आपके इख़्लाक़ निहायत अज़ीम थे। बस मुख़्तसर यह कि सिफ़ाते हसना की जो मंज़िले थीं उनसे आपका दरजा बलन्द था।( मतालेबुल सूऊल पृष्ठ 252)

पादरी लेनेन एडवर्ड सील डी 0 डी 0 लिखता है कि इमाम मूसिए काज़िम (अ.स.) ने अली बिन मूसा (अ.स.) को अपना वारिस इस लिये क़रार दिया कि वह उनको सब से ज़्यादा मन्सूबे इमामत का अलह समझते थे।( अशना अशरया , पृष्ठ 46 प्रकाशित लाहौर 1925 0)

हज़रत इमाम मूसिए काज़िम (अ.स.) फ़रमाते हैं कि मेरा यह फ़रज़न्द ‘‘ यतर मई फ़िल जाफ़र ला यनजू फ़ीहे इल्ला नबी अव वसी ’’ मेरे साथ जाफ़र जामए को देखता और उसे समझता है जिसे नबी और वसी के अलावा कोई देख नहीं सकता।( जन्नातुल ख़ुलूद पृष्ठ 31) रजाल कशी व दमए साकेबा पृष्ठ 35 व मसन्द इमाम रज़ा (अ.स.) के पृष्ठ 2 में है कि आप आलिम अहले ज़माना और कसीर उल सोम अल इबादत थे।


हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) की विलादत ब सआदत

उलेमा व मुवर्रेख़ीन का बयान है कि आप बा तारीख़ 11 ज़ीक़ादा 153 हिजरी यौमे पंज शम्बा बमक़ाम मदीना ए मुनव्वरा पैदा हुए हैं ( आलामुल वुरा , पृष्ठ 182 जिलाउल उयून पृष्ठ 280 रौज़तुल पृष्ठ जिल्द 3 पृष्ठ 13, अनवारूल नोमानिया पृष्ठ 127) आपकी विलादत के मुताअल्लिक़ अल्लामा मजलिसी और अल्लामा मोहम्मद पारसा तहरीर फ़रमाते हैं कि जनाबे उम्मुल बनीन का कहना है कि जब तक इमाम अली रज़ा (अ.स.) मेरे बत्न में रहे मुझे हमल की गरानियां क़तअन महसूस नहीं हुई। मैं ख़्वाब में अक्सर तसबीह व तहलील और तमजीद व तहमीद की आवाज़े सुना करती थी। जब इमाम रज़ा (अ.स.) पैदा हुए तो आपने ज़मीन पर तशरीफ़ लाते ही दोनों हाथ ज़मीन पर टेक दिये और अपना सरे मुबारक आसमान की तरफ़ बलन्द कर दिया। आपके होंठ जुम्बीश करने लगे। ऐसा मालूम होता था कि जैसे आप ख़ुदा से कुछ बातें कर रहे हैं। इसी असना में इमाम मूसिए काज़िम (अ.स.) तशरीफ़ लाये और मुझसे इरशाद फ़रमाया कि तुम्हे ख़ुदा वन्दे आलम की इनायत व करामत मुबारक हो। फिर मैंने मौलूदे मसूद को आपकी आग़ोश में दे दिया। आपने उसके दाहिने कान में अज़ान और बायें कान में अक़ामत कही। इसके बाद आपने इरशाद किया कि ‘‘ बग़ीर ईं रा कि बक़िया ख़ुदा अस्त दर ज़मीनो हुज्जत ख़ुदा अस्त बाद अज़ मन ’’ इसे ले लो यह ज़मीन पर ख़ुदा की निशानी है और मेरे बाद हुज्जते अल्लाह के फ़राएज़ का ज़िम्मेदार है।

इब्ने बाबविया फ़रमाते हैं कि आप दीगर आइम्मा (अ.स.) की तरह मख़्तून और नाफ़ बुरिदा (यानी ख़त्ना हुये और नाफ़ कटे हुये) पैदा हुये।( नस्ल अल ख़ताब जिलाउल उयून पृष्ठ 269)

Leave a comment