हज़रत शाह नियाज़ बे नियाज़ बरेलवी अलैहिर्रहमा



*विलादत हज़रत शाह नियाज़ बे नियाज़ बरेलवी अलैहिर्रहमा*

🪺आपकी विलादत 6 जमादिउस सानी 1155 हिजरी और अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक 7 अगस्त 1742 को हिन्दोस्तां के सूबा पंजाब के सरहिन्द शरीफ़ मे हुई थी!आपके वालिद का नाम *सैय्यद इलाही शाह* अलैहिर्रहमा और बीवी का नाम **सैय्यदा बीवी गरीब नवाज़ था!*

🪺 *नसब* “
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🪺आप वालिद की तरफ से ” *अलवी* ‘ सादात और वालिदा की और से *काज़मी* (हुसैनी)सादात हैँ यानी दोनों और से आपका ताल्लुक़ *सैय्यदुल अम्बिया* से मिलता है ❤️

🪺 *ख़ानदान* 👇
आपका खानदान बुखारा मे बड़ी शान व शौकत वाला खानदान था.. जहाँ से सबसे पहले सैय्यद अयातुल्लाह अल्वी साहब बुखारा से मुल्तान तशरीफ लाए और उनके बेटे बुखारा से अलग हटकर मुख़्तलिफ जगहों पर रहने लगे जिनमे आपके दादा सैय्यद अजमतुल्लाह अल्वी साहब मुल्तान से सरहिंद शरीफ़ आए और यही आपकी पैदाइश हुई कुछ वक़्त के बाद आपका ख़ानदान दिल्ली चला गया
🪺 *तालीम*
आपकी इब्तिदाई तालीम आपकी वालिदा के ज़रिये हुई है एक तो वो खुद तसव्वुफ मे आला मक़ाम पर फायज़ वलीया सैय्यदा थीं.. जिनका गहरा असर आप पर पड़ा..उसके बाद आपने आला तालीम अपने मुर्शिद-ए-कामिल *हज़रत_फ़खरुद्दीन_देहलवी* उर्फ़ फ़ख्र-ए-जहां रहमतुल्लाह अलैह से सीखी….आपने 15 साल की उम्र मे तमाम ज़ाहिरी उलूम हासिल कर लिए तीन दिन तक आपका इम्तिहान हुआ बाद सूफिया व उलेमा की मौजूदगी मे आपको दस्तार बांधी गयी….!
🪺 *सरकार-ए-गौसे-आज़म से रिश्ता* ।
एक बार आपके पीरों मुर्शिद हज़रत फ़खर-ए-जहां को हुज़ूर #गौसे_आज़म रजियल्लाहु अन्हु ने ख्वाब मे आकर फ़रमाया क़ि “तुम शाह नियाज़ को लेकर मेरे बेटे अब्दुल्लाह बगदादी के पास चले जाना और उनसे तालिब-ए-बैत करवा देना…सुबह होते ही मुर्शिद आपको लेकर चल पड़े…. कई दिन गुजर जाने के बाद भी जब नहीं मिले तो सरकार गौसे आज़म ने फिर से ख्वाब मे उनके हुलिए को बताया इस बार वो आपको दिल्ली की #जामा_मस्जिद मे मिले और आपको तालिब-ए-बैत क़िया और अपनी बेटी की शादी आपसे की…!
🪺 *शादी* “
आपने दो शादी की थी,पहली शादी मुर्शिद की शहज़ादी से की थी जिनके कुछ साल बाद ही विसाल हो ग्या था दूसरी शादी से आपकी दो औलादे थीं.. सैय्यद निजामुद्दीन अल्वी अलैहिर्रहमा व सैय्यद नसीरुद्दीन अल्वी अलैहिर्रहमा” हैँ..!
 
*सोर्स*👉 सैय्यद सालिम अलवी
     

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