हज़रत फ़ातिमा ज़हरा س का घर तमाम अम्बिया के घरों से अफ़ज़ल..

🌹 हज़रत फ़ातिमा ज़हरा س का घर तमाम अम्बिया के घरों से अफ़ज़ल..
इमाम जलालुद्दीन सुयूती रह० ने ‘तफ़सीरे दुर्रे मंसूर’ में सूरह नूर (सूरह नंबर 24) की आयत नंबर 36 की तफ़सीर में लिखा है कि हज़रत मोहम्मद ﷺ ने इस आयत की तिलावत की तो एक आदमी उठा और अर्ज़ किया कि या रसूल अल्लाह ﷺ! यह कौन से घर हैं.?
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया कि अम्बिया के घर।
फ़िर हज़रत अबू बकर उठे और हज़रत अली ع वा फ़ातिमा ज़हरा س के घर की ओर इशारा करते हुए अर्ज़ किया कि या रसूल अल्लाह ﷺ! यह घर भी इनमें से है.??
फ़िर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ने फ़रमाया कि ‘यह इनमें अफ़ज़ल तरीन है’।
         – दुर्रे मंसूर, जिल्द 5, सफ़ाह नंबर 143,
                    सूरह नूर की आयत नंबर 36
      क़ुरआन मजीद की इस आयत की तफ़सीर से यह साबित हुआ कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा س और हज़रत मौला इमाम अली ع का घर अम्बियाओं के घरों से भी अफ़ज़ल है।
घरो की अफ़ज़लियत ईंट और पत्थरों से नहीं होती, बल्कि उस घर में बसने और रहने वाले अफ़ज़ल तरीन इंसानों से होती है।
जिस घर को मोहम्मद ﷺ ने नबियों के घरों से भी अफ़ज़ल कहा, उस घर में ग्यारह इमामों के  वालिद/बाप सय्यदुल औलिया हज़रत मौला इमाम अली ع, सय्यदुन-निसा हज़रत फ़ातिमा-तुज़्ज़हरा س, इमाम हसन ع और इमाम हुसैन ع रहते हैं…और इसी घर में वोह चाचा (हज़रत अबुतालिब ع) रहते थे जो बाप बनकर रिसालत की उंगली पकड़कर जवान किया..
अफ़सोस है कि पूछने वाले ने बाद में खुद इसी घर की तौहीन की और अपने आखिरी लम्हात में अफ़सोस करते रहे कि काश मैंने यह ना किया होता भले वोह हमसे जंग करते..
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा س के घर की अज़मत पर ऐहले’सुन्नत का मजीद हवाला जानने के लिए, देखें

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