
*आख़िर ऐसी क्या वजह थी कि जिस शख़्स मरवान बिन हकम को पैदा होते से ही रसूलअल्लाह saws ने लानती का लक़ब दे दिया था उसे मुसलमानों के तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान ने अपना दामाद बनाया*❓❓
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فَمِنْهَا مَا حَدَّثَنَاهُ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ الْحَمِيدِ الصَّنْعَانِيُّ بِمَكَّةَ حَرَسَهَا اللَّهُ تَعَالَى، ثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبَّادٍ، أَنْبَأَ عَبْدُ الرَّزَّاقِ، وَحَدَّثَنَا أَبُو زَكَرِيَّا يَحْيَى بْنُ مُحَمَّدٍ الْعَنْبَرِيُّ، ثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ السَّلَامِ، ثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الْحَنْظَلِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ الْقُشَيْرِيُّ، وَسَلَمَةُ بْنُ شَبِيبٍ الْمُسْتَمْلِي، قَالُوا: ثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ بْنُ هَمَّامٍ الْإِمَامُ، قَالَ: حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ مِينَاءَ مَوْلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، قَالَ: كَانَ لَا يُولَدُ لِأَحَدٍ مَوْلُودٌ إِلَّا أُتِيَ بِهِ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَدَعَا لَهُ فَأُدْخِلَ عَلَيْهِ مَرْوَانُ بْنُ الْحَكَمِ، فَقَالَ: «هُوَ الْوَزَغُ بْنُ الْوَزَغِ الْمَلْعُونُ ابْنُ الْمَلْعُونِ» هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحُ الْإِسْنَادِ، وَلَمْ يُخْرِجَاهُ “
” حضرت عبدالرحمن بن عوف رضی اللہ عنہ فرماتے ہیں : جس کسی کے ہاں بھی بچہ پیدا ہوتا ، وہ اس کو نبی اکرم ﷺ کی بارگاہ میں لاتا ، نبی اکرم ﷺ اس کے لئے دعا فرماتے ، اسی طرح مروان بن حکم کو بھی رسول اللہ ﷺ کی بارگاہ میں پیش کیا گیا ، آپ نے اس کے بارے میں فرمایا : یہ وزغ بن وزغ ( بزدل باپ کا بزدل بیٹا ) ہے ، ملعون ابن ملعون ( لعنتی باپ کا لعنتی بیٹا ) ہے ۔
Al Mustadrak Hakim#8477
तर्जुमा- हज़रत अब्दुर्रहमान इब्ने औफ़ रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं : जिस किसी के यहाँ भी बच्चा पैदा होता, वो उस बच्चे को नबी करीम स्वल्लल्लाहो अलयहे व आलेही व सल्लम की बारगाह में लाता, नबी अकरम saws उस बच्चे के लिए दुआ फ़रमाते। *इस ही तरह मरवान बिन हकम को भी रसूलअल्लाह saws की बारगाह में पेश किया गया, आप ने मरवान बिन हकम (जो उस वक़्त नोमोलूद बच्चा था) के बारे में फ़रमाया : ये बुज़दिल बाप का बुज़दिल बेटा है, और ये लानती बाप का लानती बेटा है।*
🤔 रसूलअल्लाह saws की ज़बान मुबारक से कभी किसी के लिए इतने सख़्त अल्फ़ाज़ नही निकले वो जो सारे आलम के लिए रहमत बन के आये हों अगर वो ही किसी के लिए लानती लफ़्ज़ बोल दें तो आप समझ सकते हैं कि वो शख्स कम से कम मुसलमान तो नही कहलायेगा।
पर सवाल फिर भी यही है कि जब मरवान को उसके बचपन में ही लानती कहकर हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने अपनी बारगाह से निकाल दिया था तो और ज़ाहिर सी बात है कि जिसके बारे में मदीने का हर इंसान जानता हो कि ये लानती है तो ऐसे मलऊन को मुसलमानों के तीसरे ख़लीफ़ा अपना दामाद क्यों बनाएँगे ?क्या सिर्फ़ इस वजह से की ये मरवान तीसरे ख़लीफ़ा का चचाज़ाद भाई था ? और इस मलऊन मरवान का बाप जिसका नाम हकम था इसको भी हुज़ूर ने लानती कहा है और बुज़दिल भी कहा है ये मुसलमानों के तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान का चचा था।
क्या सिर्फ़ अपनी इन रिश्तेदारियों की वजह से एक गुस्ताखे रसूल और मलऊन को एक ख़लीफ़ा अपनी बेटी दे देगा और न सिर्फ़ बेटी दे देगा बल्कि अपनी ख़िलाफ़त में बड़े बड़े औहदे जैसे अलग अलग शहरों की गवर्नर की पोस्ट तक दे देगा ❓❓
*मरवान बिन हकम का एक और कारनामा*
ये मरवान बिन हकम ने ही अशरा ए मुबश्शेरा में से एक बड़े सहाबी हज़रत तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु को भी शहीद किया था मुलाहिज़ा फरमाएँ👇
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ الْحَافِظُ، أَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ الثَّقَفِيُّ، ثَنَا عَبَّادُ بْنُ الْوَلِيدِ الْعَنَزِيُّ، ثَنَا حَبَّانُ، ثَنَا شَرِيكُ بْنُ الْحُبَابِ، حَدَّثَنِي عُتْبَةُ بْنُ صَعْصَعَةَ بْنِ الْأَحْنَفِ، عَنْ عِكْرَاشٍ قَالَ: كُنَّا نُقَاتِلُ عَلِيًّا مَعَ طَلْحَةَ وَمَعَنَا مَرْوَانُ، قَالَ: فَانْهَزَمْنَا، قَالَ: فَقَالَ مَرْوَانُ: «لَا أُدْرِكُ بِثَأْرِي بَعْدَ الْيَوْمِ مِنْ طَلْحَةَ» ، قَالَ: فَرَمَاهُ بِسَهْمٍ فَقَتَلَهُ
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 5589 – سكت عنه الذهبي في التلخيص
عکراش کہتے ہیں : ہم حضرت طلحہ رضی اللہ عنہ کے ہمراہ ، حضرت علی رضی اللہ عنہ کے ساتھ قتال کر رہے تھے ، ہمارے ساتھ مروان بھی تھا ، عکراش کہتے ہیں : ہمیں شکست ہو گئی ، تو مروان نے کہا : آج کے بعد مجھے طلحہ رضی اللہ عنہ سے بدلہ لینے کا موقع نہیں ملے گا ۔ یہ کہہ کر اس نے تیر مارا جس کی وجہ سے حضرت طلحہ رضی اللہ عنہ شہید ہو گئے ۔
Al Mustadrak Hakim#5589
*तर्जुमा- अक्राश कहते हैं : हम हज़रत तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु(अशरा ए मुबश्शेरा के सहाबी) के हमराह , हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ किताल (जंग) कर रहे थे, हमारे साथ मरवान भी था,अक्राश कहते हैं : हमें शिकस्त हो गई, तो मरवान ने कहा : आज के बाद मुझे तल्हा से बदला लेने का मौक़ा नही मिलेगा,ये कहकर मरवान बिन हकम ने हज़रत तल्हा को तीर मारा जिसकी वजह से हज़रत तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु शहीद हो गए।*
*(इंनलिल्लाहे व इन्ना इलयहे राजेऊन)*
अब यहाँ मेरा तमाम मुसलमानों से एक सवाल है कि अगर कोई सहाबा को उसके किसी अमल की वजह से बुरा बोलदे तो वो राफ़ज़ी और दीन से ख़ारिज हो जाता है तो अब हम उस शख़्स के बारे में क्या कहेंगे जो एक बड़े सहबीए रसूल का क़ातिल हो क्या ऐसा शख़्स जहन्नमी नही कहलायेगा ? क्या ऐसे शख़्स का भी एहतराम किया जाएगा सिर्फ़ इस बिना पर के वो तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान का भाई और दामाद है ??
*मुसलमानों ख़ुदारा इंसाफ करो,अल्लाह की बारगाह में जवाब देना है, तारीख़ में न जाने ऐसे कितने किरदार गुज़रे हैं जिन्होंने न सिर्फ़ सहाबा बल्कि रसूल के अहलेबैत तक के साथ अलग अलग मुक़ामात पर ज़ुल्म व तशद्दुद किये हैं और लोगों ने उनके चेहरे पर पर्दे डाल दिये और उनके मज़ालिम अवाम तक नही पहुँचने दिए,अगर वो सब मज़ालिम लोगों तक पहुंच जाते तो आज इस्लाम का इतना नुक़सान नही होता न ही इतने फ़िरके वजूद में आते।अब भी आप सब साहिबे अक़्ल से गुज़ारिश है कि अल्लाह और उसके रसूल अलैहिस्सलाम के वास्ते से अपनी आँखें खोलिए और तअस्सुब का चश्मा अपनी आंखों से उतार फेंकिए ताकि हम हक़ीक़त से वाकिफ़ हो जाएं और सही दीन पर अमल अंजाम दें।*🙏

