
उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ि. रिवायत करती हैं कि रसूलल्लाह ﷺ ने अपनी चादर के नीचे सैयदा फातिमा, सैयदना अली अलैहीस्सलाम सैयदना हसन, सैयदना हुसैन अलैहीस्सलाम को दाखिल फ़रमाया और फिर ये आयत मुबारका तिलावत फ़रमाई
……… إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّـهُ لِيُذْهِبَ عَنكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا
……. (ऐ पैग़म्बर के अहले बैत) खुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है, वैसा पाक व पाकीज़ा रखे। [सूरह अहज़ाब 33:33]

[सहीह मुस्लिम हदीस 6261]
खलीफा ए अव्वल अमीरुल मोमिनीन सैयदना अबु बक़्र रज़ि. ने इरशाद फ़रमाया
“मुहम्मद ﷺ के अहले बैत (से मुहब्बत) में आप ﷺ की मुहब्बत को तलाश करो”
[सहीह बुखारी हदीस 3751

