
मौला अली अलैहिस्सलाम हादी हैं और कुरआन में मौला अली अलैहिस्सलाम की पैरवी का हुक़्म.
सूरह युनुस की आयत नंबर 35 में है कि-
..اَفَمَنۡ یَّہۡدِیۡۤ اِلَی الۡحَقِّ اَحَقُّ اَنۡ یُّتَّبَعَ اَمَّنۡ لَّا یَہِدِّیۡۤ اِلَّاۤ اَنۡ یُّہۡدٰی..
मौलाना मोहम्मद जूनागढ़ी का तर्जुमा- तो फ़िर आया जो शख़्स हक़ का रास्ता बताता हो वोह ज़्यादा इत्तेबा के लायक है या वोह शख़्स जिसको बग़ैर बताये खुद ही रास्ता ना सूझे..
मौलाना तक़ी उस्मानी का तर्जुमा- अब बताओ कि जो हक़ का रास्ता दिखाता हो, क्या वोह इस बात का ज़्यादा हक़दार है कि उसकी बात मानी जाये या वोह (ज़्यादा हक़दार है) जिसको खुद उस वक़्त तक रास्ता ना सूझे जब तक कोई दूसरा उसकी रहनुमाई ना करे?
अहमद रज़ा खां बरेलवी उर्फ़ आला हज़रत का तर्जुमा- तो क्या जो हक़ की राह दिखाये उसके हुक़्म पर चलना चाहिए या उसके जो खुद ही राह ना पाए, जब तक राह ना दिखाया जाए।
डॉ मोहम्मद ताहिर उल कादरी का तर्जुमा- तो क्या जो कोई हक़ की तरफ़ हिदायत करे वोह ज़्यादा हक़दार है कि उसकी फ़रमां’बरदारी की जाए या वोह जो खुद ही रास्ता नहीं पाता मगर यह कि उसे रास्ता दिखाया जाए।
मौलाना अबुल आला मौदूदी का तर्जुमा- फ़िर भला बताओ जो हक़ की तरफ़ रहनुमाई करता है वोह इसका ज़्यादा मुस्तहिक है कि उसकी पैरवी की जाए या वोह जो रहनुमाई नहीं कर सकता यह कि उसकी रहनुमाई की जाए?
सूरह युनुस में इस आयत की इस इबारत से पता चलता है कि ‘जो हादी हो! हमें उसकी इताआत या पैरवी करनी चाहिए क्योंकि हादी ही गैर-हादी से ज़्यादा इत्तेबा के लायक और हक़दार होता है।
हादी यानि ऐसा हिदायत-याफ़्ता जो दूसरों के रहनुमाई और हिदायत का मोहताज ना हो बल्कि वोह खुद दूसरों को रहनुमाई करने वाला, हक़ और हिदायत की तरफ़ ले जाने वाला हो।
गैर-हादी यानि जो दूसरों के हिदायत के मोहताज हो और जिसे हिदायत वा हक़ की रहनुमाई की ज़रुरत हो।
इसमें कोई शक नहीं कि अंबिया हादी होते हैं मगर इस उम्मत में नबी करीम ﷺ के बाद कौन हादी है जिसकी पैरवी ज़रुरी है?????
इसके लिए कुरआन मजीद की सूरह राद की आयत नंबर 7 देखते हैं! जहां अल्लाह ﷻ ने कहा है कि-
.. اِنَّمَاۤ اَنۡتَ مُنۡذِرٌ وَّ لِکُلِّ قَوۡمٍ ہَادٍ.
मौलाना मोहम्मद जूनागढ़ी का तर्जुमा- “बात यह है कि आप तो सिर्फ़ आगाह करने वाले हैं और हर क़ौम के लिए हादी है।”
तक़ी उस्मानी ने तर्जुमा-
“बात यह है कि तुम तो सिर्फ़ ख़तरे से होशियार करने वाले हो और हर क़ौम के लिए कोई ना कोई ऐसा शख्स हुआ है जो हिदायत का रास्ता दिखाये।”
अमीन इस्लाही का तर्जुमा- “तुम तो बस एक आगाह कर देने वाले हो और हर कौम के लिए एक हादी है।”
मौलाना अबुल आला मौदूदी का तर्जुमा- “तुम तो महज़ ख़बरदार कर देने वाले हो और हर क़ौम के लिए एक रहनुमा है।”
सूरह राद की इस आयत की तफ़सीर लिखते हुए इमाम जलालुद्दीन सुयूती ने दुर्रे मंसूर की आठवीं जिल्द में सफ़ाह नंबर 375 पर लिखा है कि-
وأخرج ابن جرير ، وابنُ مَرْدُويَه ، وأبو نعيم في “المعرفة ” ، والديلمي ، وابن عساكر ، وابن النجار ، عن ابن عباس قال : لما نزلت «إِنَّمَا أَنتَ مندر ولكل قَوْمٍ هَادٍ» وضع رسول الله ﷺ يده على صدره ، فقال : « أنا المنذِرُ » . وأومأ بيده إلى منكب على ، فقال : « أنت الهادى يا على ، بك يهتدى المهتدون من بعدى.
देखें सफ़ाह नंबर 375 पर अरबी मतन👇
https://archive.org/details/eldorrelmanthor/drm08/page/n375/mode/1up?view=theater
हज़रत पीर मोहम्मद करम शाह अल अज़हरी ने दुर्रे मंसूर की चौथी जिल्द में सफ़ाह नंबर 129 पर इसका उर्दू तर्जुमा इस तरह से किया है-
امام ابن جریر رحمہ اللہ نے حضرت عکرمہ اور الضحاک رحمہا اللہ سے روایت کیا ہے کہ رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے اپنے سینے پر ہاتھ رکھا اور فرمایا : میں منذر ہوں اور اپنے ہاتھ سے حضرت علی کے کندھے پر اشارہ کیا اور فرمایا: اے علی ! تو ھادی ہے، میرے بعد تجھ سے ہدایت پانے والے ہدایت پائیں گے.
यानि इमाम इब्ने जरीर ने हज़रत अकरमा और ज़िहाक़ से रिवायत किया है कि रसूल अल्लाह ﷺ ने अपने सीने पर हाथ रखा और फ़रमाया- मैं मुन्ज़िर हूं और अपने हाथ से हज़रत अली अलैहिस्सलाम से फ़रमाया कि ‘ऐ अली, तू हादी है। मेरे बाद तुझसे हिदायत पाने वाले हिदायत पाएंगे।’
देखें सफ़ाह नंबर 129 पर उर्दू तर्जुमा👇
https://archive.org/details/tafseerdurremansoor/TafseerDurreMansoor4of6/page/n133/mode/1up?view=theater
इमाम इब्ने हज़र अस्कलानी ने ‘फ़त्हुल बारी शरह सहीह बुखारी’ की जिल्द नंबर 10 में सफ़ाह नंबर 260 पर सूरह इब्राहीम की तफ़सीर में इमाम इब्ने जरीर के हवाले से इस रिवायत के बारे में लिखा है कि-
وَالْمُسْتَغْرَبُ مَا أَخْرَجَهُ الطَّبَرِيُّ بِإِسْنَادٍ حَسَنٍ مِنْ طَرِيقِ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ بن عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ وَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ عَلَى صَدْرِهِ وَقَالَ أَنَا الْمُنْذِرُ وَأَوْمَأَ إِلَى عَلِيٍّ وَقَالَ أَنْتَ الْهَادِي بِكَ يَهْتَدِي الْمُهْتَدُونَ بَعْدِي.
और हैरान-क़ुन है [कि] जो तबरी ने हसन सनद से सईद बिन ज़ुबैर के तुरुक से हज़रत इब्ने अब्बास رَضِىَ الـلّٰـهُ عَـنْهُ से रिवायत किया है [कि]-
जब यह आयत उतरी ‘आप तो सिर्फ़ आगाह करने वाले हैं और हर क़ौम के लिए हादी है।’ (राद /7).
तो रसूल अल्लाह ﷺ ने अपना हाथ अपने सीने पर रखा और फ़रमाया- मैं मुन्ज़िर हूं, और अली अलैहिस्सलाम की तरफ़ इशारा किया और फ़रमाया- आप हादी हैं, मेरे बाद आपके ज़रिए हिदायत पाने वाले हिदायत हासिल करेंगे।
कहने का मक़सद यह है कि इसकी सनद को इमाम हजर असकलानी ने हसन कहा है, यानि मौला अली अलैहिस्सलाम का हादी होना खुद नबी करीम ﷺ की ज़ुबान मुबारक से साबित है।
देखें सफ़ाह नंबर 260 पर👇
https://archive.org/details/ozkorallh_20181026_2128/fbssb10/page/n255/mode/1up?view=theater
इसके अलावा यही बात ऐहले’सुन्नत की कई बड़ी मोतबर किताबों में दर्ज है, मजीद हवाला ज़ात के लिए-
1) वीडियो देखें- https://youtu.be/1uOt0_jEeEI?si=NFV8bPiUXxaBxa7o
2) पढ़ें 👇
http://kingoflinks.net/ImamAli/1AlAyat/4Mondher/8Other.htm
3) पढ़ें 👇
http://kingoflinks.net/ImamAli/1AlAyat/4Mondher/6Hsakani.htm

