अली अलैहिमस्सलाम के शान में कुरान में 300 आयत नाज़िल हुई हैं।


सहाबिये रसूल हज़रते अब्दुल्लाह बिन अब्बास र०अ० फरमाते हैं कि अली इब्ने अबी तालिब अलैहिमस्सलाम के शान में कुंरान में 300 आयत नाज़िल हुई हैं।
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हवाला जात: कुतुबे अहले सुन्नत 👇
लेखक :अल्लामा जलालुद्दीन सुयूती
किताब :तारीख़ुल ख़ोलफा जिल्द 1, सफा 138

लेखक :एमाम इब्ने असाकिर
किताब :तारीखे मदीना दमिश्क़ जिल्द 42,सफा 364

लेखक :एमाम इब्ने हजर मक्की
किताब :सवायेक़े मोहर्रेक़ा जिल्द 1, सफा 373

अहलेबैत कौन हैं?

अहलेबैत का लफ़ज़ी माअना है: घर वाले।
इस्लाम में अहलेबैत से मुराद नबी ﷺ के घर वाले मुराद हैं।
अहले बैत की शान में कुरान करीम में कई आयतें हैं।
#हदीस:01-  आमिर-बिन-साद-बिन-अबि वक़्क़ास बयान करते है, की जब आयत ए मुबाहिला नाज़िल हुई
“फरमा दो आओ हम बुलाये अपने बेटे और तुम्हारे बेटे,अपनी औरतों तुम्हारी औरतों अपनी जानें और तुम्हारी जानें,फिर मुबाहिला करे तो झूठो पर अल्लाह की लानत डाले”
( 📗सुरह अल-इमरान आयत:61 )
तो हुज़ूर नबी ए #क़रीमﷺ ने हज़रत #अली, हज़रत #फातिमा, हज़रत #हसन और #हुसैन رَضِیَ اللهُ عَنْهُ को बुलाया फिर फरमाया ” #या_अल्लाह_ये_मेरे_अहलेबैत_है”

(📗सहीह मुस्लिम जिल्द:06 सफा:264 किताब-उल-मनाक़िब ए सहाबा, बाब: मन फज़ाइल ए अली इब्न ए अबी तालिब हदीस 6220)

नबी करीम ﷺ ने फरमाया मेरे अहलेबैत कश्ती-ए नूह की तरह है जो इसमें सवार हो गया उसने निज़ात पायी और जिसने इससे मुखालिफ़त वो ग़र्क हो गया “(अल-मुस्तदरक जिल्द 2)
हाँ ये वही आल-ए-रसूल हैं जिनपर फ़र्ज़ नमाज़ में भी
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने सलामती भेजना फ़र्ज़ क़रार दिया”

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