Mustdrak al hakim -2653
Hazrat Ikramah رضی اللہ عنہ farmatay hain: Ibn Abbas رضی اللہ عنہما ne mujhe aur apne betay Ali se kaha: Tum dono Abu Saeed Khudri رضی اللہ عنہ ke paas chale jao aur unse Khawarij ke mutaliq koi hadith sun kar aao. Hum dono chal diye, Hazrat Abu Saeed Khudri رضی اللہ عنہ apne bagh mein kaam kar rahe thay. Jab unho ne humein dekha to apni chadar durust kar ke humse baatain karne lag gaye hatta ke masjid ke mutaliq baat chal nikli, woh kehne lage: Hum ek ek eent utha rahe thay jabke Ammar do do eentein utha rahe thay, jab Rasool e Akram ﷺ ne unko dekha to unke sar se mitti jhaarte huay bole: “Aey Ammar! Apne dosray sathiyon ki tarah tum bhi ek ek eent kyun nahi utha rahe?” Ammar ne jawab’an kaha: “Main Allah Ta’ala ki bargah mein ajar ka talabgaar hoon.” (Abu Saeed) farmatay hain: “Rasool e Akram ﷺ phir unke sar se mitti jhaarne lag gaye aur farmaya: ‘Aey Ammar! Afsos hai ke tujhe ek baghi giroh qatal kar dega.'” Abu Ammar bole: “Main fitnon se Allah ki panah mangta hoon.”
Ye hadith Imam Bukhari رحمۃ اللہ علیہ ke mayaar ke mutabiq sahih hai lekin Shaykhain ne isay in alfaaz ke hamrah naql nahi kiya.
Month: October 2024
वाक़िआ हजरत निजामद्दीन औलिया

हजरत निजमुद्दीन औलिया के यहां लंगर होता था बहुत ही जोर दार लंगर दूर दूर से आने वाले आपके लंगर खाने से लंगर खा कर अपना पेट भरते
तभी कुछ बादशाह के सिपाहियों ने बादशाह के कान भरना शुरू कर दिए की सरकार राशन पानी आपका और लंगर खाने में नाम होता है निज़ामुद्दीन का तभी बादशाह उनकी बातो में आ गया
और अपने सिपाहियों से कहा कि जाओ निज़ामुद्दीन औलिया से कहना कि आज से बादशाह लंगर खाने में कोई चन्दा नहीं देगा
बस फिर बादशाह का सिपाही निज़ामुद्दीन औलिया की बारगाह में आया और बोला कि आज से लंगर खाने में बादशाह की तरफ से जो चन्दा अता है वो बंद
निज़ामुद्दीन औलिया को जलाल आया और बोले अपने बादशाह से कह देना की तेरे बादशाह का चन्दा बंद हुआ है
निज़ामुद्दीन औलिया का लंगर बंद नहीं होगा आज तक एक टाइम चलता था आज से दो टाइम चलेगा
अब सिपाही और मुरीद सब हैरान की एक टाइम के लंगर के लिए चंदे की जरूरत होती थी ये दो टाइम कहा से चलेगा
जब मुरीदों को हैरान परेशान देखा तो अपने फरमाया की घबराते क्यू हो जितना पैसा चाइए मेरे मुसाल्लेे के नीचे से निकाल लेना अल्लाहु अकबर ये है अल्लाह वाले जिस जगह इबादत करले खुदा की कसम उस जगह को भी सोना बनादे
खैर लंगर तो बंद नहीं हुआ लेकिन दूसरे दिन खबर आई कि बादशाह का पेशाब बंद हो गया सारे हकीमों को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं अबे जिसे निज़ामुद्दीन बंद करदे उसे कोई हकीम कैसे खोले
जब बादशाह की मा को सारा माजरा पता चला तो बादशाह की मा हजरत निजामद्दीन औलिया के दरबार में गई और अर्ज़ करने लगी हुजूर मै मानती हूं मेरा बेटा गुस्ताख है मै मानती हू मेरे बेटे ने गलती की है
लेकिन है तो वो मेरा बेटा अगर वो ठीक ना हुआ तो मै आपके दरवाज़े पे सर पटक पटक के अपनी जान दे दूंगी
हजरत निजामुद्दीन औलिया मुस्कुराए और कहा ठीक है तेरा बेटा ठीक हो जाएगा लेकिन मेरी एक शर्त है बुढ़िया ने कहा क्या शर्त है हजरत निजामुद्दीन औलिया ने कागज और कलम दिया और कहा कि अपने बेटे से कहना कि सारी सल्तनत मेरे नाम लिखदे
बुढ़िया ने कलम कागज लिया और अपने बेटे के पास गई और कहा बेटा बाबा ने पर्चा दिया है और कहा है सारी सल्तनत मेरे नाम लिखदे अब मरता क्या नहीं करता उसकी जान पे बनी है उसने फौरन कहा मा जल्दी पर्चा ला और पर्चा लेकर उसमें लिख दिया मेरी सारी सल्तनत निज़ामुद्दीन औलिया के नाम जैसे ही लिख कर साइन करी वैसे ही पेशाब चालू हो गया बादशाह की जान में जान आई
बुढ़िया ने पर्चा लिया और फौरन निज़ामुद्दीन औलिया की बारगाह में गई और कहा बाबा लो पर्चा मैंने सब लिखवा लिया है निज़ामुद्दीन औलिया ने पर्चा देखा आप मुस्कुराए और पर्चा फाड़ के फेक दिया
बुढ़िया कहने लगी बाबा जब फाड़ना था तो लिखवाया क्यू और जब लिखवा लिया था तो फाड़ा क्यू
हजरत निजामुद्दीन औलिया ने फरमाया कि ये इसलिए क्या की तेरे बेटे का गुरूर ख़तम हो जाय और वो। ये जान ले की हुकूमत उसके बाप की नहीं बल्कि हुकूमत कल भी हमारी थी और आज भी हमारी है
सुभानल्लाह क्या शान हे अल्लाह के वालियों की
Amirul Momenin Ali a.s ki Ata’at Sab logo par Wajeeb
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📚 *Mustarak Al Hakeem*
*Hadees .no. 4617*
Hazrat Abu Zar R.A ne Kaha ..Rasool s.a.w ne farmaya… *Jisne Meri Ata’at ki Isne Allah ki Ata’at ki*
*Aur Jisne Meri NA Farmani ki Usne Allah ki NA Farmani KI*
*Aur Jisne Ali a.s ki Ata’at ki usne Meri Ata’at ki*
*aur Jisne Ali a.s ki NA Farmani ki usne Meri NA Farmani ki…*
📚 *Mustarak Al Hakeem*
*Hadees .no. 4617*
Jild 4
page 247.

मुआविया पर लानत करना सुन्नत है हज़रत आईशा और मौला अली عَلَیهِالسَّلام की
मुआविया पर लानत करना सुन्नत है हज़रत आईशा और मौला अली عَلَیهِالسَّلام की
खुद को सुन्नी कहने वाले कुछ नासबी, खारजी उलेमा लोग मुआविया मलाउन की वकालत करते हुए कहते हैं कि मुआविया हक पर था और मुआविया पर लानत करने वाला जहन्नमी है।
आइए..इसका जायज़ा लेते हैं कि मुआविया पर लानत करना दुरुस्त है या नहीं.??
अगर मुआविया पर लानत करना या बद-दुआ करना मुनाफ़िक़त या जहन्नमी होने की दलील है तो ध्यान रहे कि-
1- जब मुआविया ने हज़रत मोहम्मद बिन अबू बक्र رَضِىَ الـلّٰـهُ عَـنْهُ को शहीद करवाकर आप की लाश को मुर्दा खच्चर की खाल में रखकर आग लगा दी थी तो हज़रत मोहम्मद बिन अबू बक्र رَضِىَ الـلّٰـهُ عَـنْهُ की शहादत की खबर पाकर उसी दिन से उम्मतुल-मोमिनीन हज़रत आईशा हमेशा हर नमाज़ में मुआविया पर लानत यानि बद-दुआ करती थी।
2- जंगे सिफ़्फ़ीन के बाद से हज़रत मौला इमाम अली करमुल्लाहु वज्हुल करीम عَلَیهِالسَّلام मुआविया और इनके साथियों पर लानत करते थे।
3- कुरान की सूरह तौबा की आयत नंबर 68 के मुताबिक मुनाफ़िक मर्दों, मुनाफ़िक औरतों और काफ़िरों पर लानत भेजना अल्लाह ﷻ की सुन्नत है और सूरह बकरह की आयत नंबर 159 के मुताबिक अल्लाह ﷻ तो लानत करने वालों पर लानत करता ही है, साथ में इस सुन्नते-इलाही पर अमल करने वाले लोग भी लानत भेजते हैं।
4- इमाम इब्ने अबी सैबा (इमाम बुखारी के उस्ताद) ने मुसन्नफ़े इब्ने अबी शैबा में और इमाम हाकिम रह० ने ‘मुसतदरक अल सहियेन’ में लिखा है कि:-
अली ع हक पर हैं और हक अली ع के साथ है। अली ع कुरान के साथ और कुरान अली ع के साथ है और यह दोनों कभी एक दूसरे से जुदा ना होंगे।
जिसने अली ع को गाली दी या बुरा कहा उसने मुझे ﷺ गाली दी या बुरा कहा। जिसने अली ع को अज़ीयत दी उसने मुझे ﷺ अजीयत दी।
अली ع मुझसे ﷺ हैं और मैं ﷺ अली ع से हूं।
जिसने अली ع को छोड़ा उसने मुझे ﷺ छोड़ा।
जिसने अली ع की इताआत की उसने मेरी ﷺ इताआत की और जिसने अली ع की नाफ़रमानी की उसने मेरी ﷺ नाफ़रमानी की।
मौला अली ع के फज़ायल से मुताल्लिक यह सभी हदीसें सही है और इनका फ़ोटो मैंने यहां पर नही सेन्ड करे हैं क्योंकि इस पोस्ट का सिर्फ़ मकसद यह था कि मुआविया पर लानत करना कैसा है ना कि अली ع की फज़ीलत बयान करना है।
5- मौला अली ع का मुआविया पर लानत करना तो समझ में आ रहा है क्योंकि अली ع हक पर हैं लेकिन मुआविया का इमाम अली ع पर लानत करना या भेजना दरअसल मोहम्मद ﷺ पर लानत भेजना है इसलिए अगर मुआविया भी ऐसा करता है तो जहन्नमी है।
तारीख ऐ इब्ने कसीर [7/607], तारीख ऐ तबरी [4/279, 241],
तारीख ऐ अबुल फ़िदा [38 हिजरी का बयान ],
तज़किरातुल ख्वास [सफ़ाह 125-126]
और कंज़ुल उम्माल [जिल्द 7-8, हदीस नं 21989] के हवाले से नीचे कुछ दलील हैं, जिनको पढ़कर आप समझ सकते हैं कि सुन्नते-इलाही पर अमल करते हुए मुआविया पर अम्मा आईशा और मौला अली ع का लानत करना साबित है कि नहीं..
अब फ़ैसला आप खुद करें कि मुआविया पर लानत करने वाला लानती और जहन्नमी है या लानत ना करने वाला शख्स..!!
तारीखे ऐ तबरी में मौला अली ع का खुतबा भी है कि मुआविया इस्लाम लाने के बाद भी शराब पीने वाला मुनाफ़िक था।

