चौदह सितारे पार्ट 92

हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के मशहूर असहाब और उनकी शहादत

हबीब इब्ने मज़ाहिर

जनाबे हबीब इब्ने मज़ाहिर इब्ने रेयाब इब्ने अश्तर जनजवान इब्ने फ़क़अस

इब्ने तरीफ़ इब्ने उमर बिन क़ैस हरस इब्ने साअलबा, इब्ने दवान, इब्ने असद अबू क़ासिम असदी के बेटे इमाम हुसैन (अ.स.) के बचपने के दोस्त थे। उन्हें रिसालत माब (स.व.व.अ.) के सहाबी होने का भी शरफ़ हासिल था। यह असहाबे अमीरल मोमेनीन (अ.स.) में भी थे और हर जंग में शरीक रहे। उन्होंने कूफ़े में हज़रत मुस्लिम इब्ने अक़ील का पूरा पूरा साथ दिया और यह शहादत के बाद करबला को पा पियादा रवाना हो कर इमाम हुसैन (अ.स.) की खिदमत में पहुँचे थे। करबला पहुँच कर उन्होंने पूरी कोशिश की बनी असद से कुछ मद्द ले आयें लेकिन उमरे साद के लशकर ने रास्ते में मज़ाहेमत की। शबे आशूर एक शब की मोहलत के लिये जब हज़रत अब्बास (अ.स.) गए तो हबीब भी साथ थे। नमाज़े ज़ोहर आशूरा के मौके पर हसीन इब्ने नमीर की बद कलामी का जवाब हबीब ही ने दिया था और उसके कहने पर “ हुसैन की नमाज़ कुबूल न होगी ” हबीब ने बढ़ कर घोड़े के मुंह पर तलवार लगाई थी फिर मैदान में मुसलसल लोगों से लड़ते और उन्हें

क़त्ल करते रहे यहां तक कि बदील इब्ने हरीम अक़फ़ाई ने आप पर तलवार लगाई और बनी तमीम के एक शख़्स ने नैज़ा मारा और हसीन बिन नमीर ने सर काट लिया। हबीब की शहादत के बाद इमाम हुसैन (अ.स.) ने इन्तेहाई दर्द अंगेज़ लहजे में कहा, ऐ हबीब मैं तुम को और अपने असहाब को ख़ुदा से लूंगा ।

जुहैर इब्ने क़ैन

जनाबे जुहैर क़ैन इब्ने क़ैस नमीरी बजल्ली के बेटे थे। यह क़ौम के सरदार और रईस थे। 60 हिजरी में इमाम हुसैन (अ.स.) के साथ हुए। शबे आशूर जब हज़रत अब्बास (अ.स.) एक शब की मोहलत के लिये आगे बढ़े तो आपके हमराह ज़ुहैर भी थे । इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़िन्दगी में जब शिम्र ने खेमे के पास आ कर उसे जलाना चाहा था तो जनाबे जुहैर ही ने इस से मुक़ाबला कर के इसे इस इरादे से बाज़ रखा था और नमाज़े ज़ोहर के लिये सईद के साथ जुहैर ने भी इमाम हुसैन (अ. स.) की हिफ़ाज़त के लिये सीना तान दिया था। आपने मैदान में ज़बरदस्त जंग की बिल आखिर कसीर इब्ने अब्दुल्ला शुएबी और महाजिर इब्ने औस तमीमी ने आप को शहीद कर दिया। शहादत के बाद इमाम हुसैन (अ.स.) लाश पर तशरीफ़ लाए और कहा जुहैर ख़ुदा तुम पर रहमत नाज़िल करे और तुम्हारे क़ातिलों पर जो बन्दरों और रीछों की तरह मसख़ हो गए हैं लानत करे ।

नाफ़े इब्ने हिलाल

जनाबे नाफ़े, हिलाल इब्ने नाफ़े इब्ने जमल इब्ने साद अशीरा इब्ने मद हज जमली के बेटे थे। आप शरीफ़ुन नफ़्स सरदारे काम बहादुर और क़ारीए कुरआन रावी उल हदीस थे। आप हर जंग में अमीरल मोमेनीन (अ.स.) के साथ रहे। करबला में जब हज़रत अब्बास (अ.स.) पानी की जद्दो जेहद के लिये नहरे फ़ुरात पर तशरीफ़ ले गये थे तो नाफ़े इब्ने हिलाल आपके साथ थे। मैदाने में कारज़ार करबला में नाफ़े इब्ने हिलाल ने 12 दुश्मनों को ज़हर से बुझे हुए तीर से क़त्ल किया फिर जब तीर ख़त्म हो गए तो तलवार से लड़ने लगे। बिल आखिर तीर बारानी की गई और आपके दोनों बाज़ू टूट गए और आप गिरफ़्तार हो कर इब्ने साद के सामने लाए गए। फिर शिम्र के हाथों क़त्ल कर दिये गए।

मुस्लिम इब्ने औसजा

जनाबे मुस्लिम, औसजा इब्ने साद इब्ने सआलबा इब्ने दोदान इब्ने असद इब्ने हज़ीमा अबू हजल असदीसादी के बेटे थे। यह शरीफ़ तरीन मर्दुम, आबिदो ज़ाहिद और सहाबी ए रसूल थे। अकसर इस्लामी जंगों में शरीक रहे। कूफ़े में मुस्लिम बिन अक़ील की पूरी ताक़त से मद्द की आपके हमराह मदहज चार क़बीले तमीम व हमदान व कुन्दा व रबीआ थे। जनाबे हानी व मुस्लिम की शहादत के बाद अपने बाल बच्चों समेत करबला आ पहुँचे और इमाम हुसैन (अ.स.) के क़दमों में
शरफ़े शहादत से सरफ़राज़ हुऐ मुवर्रेख़ीन का बयान है कि मुस्लिम इब्ने औसजा नेहायत दिलेरी के साथ जंग फ़रमा रहे थे कि मुस्लिम इब्ने अब्दुल्ला ज़ेआनी तऊन और अब्दुल्ला इब्ने ख़स्तकारह ने मिल कर आपको शहीद कर दिया ।

आबिस शाकरी

जनाबे आबिस, अबू शबीब बिन शाकरी इब्ने रबीह बिन मालिक इब्ने साब इब्ने माविया बिन कसीर बिन मालिक इब्ने चश्म इब्ने हम्दानी के बेटे थे। आप निहायत बहादुर, रईस, आबिद शब ज़िन्दह दार और अमीरल मोमेनीन (अ.स.) के मुख़लिस तरीन मानने वाले थे। आपके क़बीला ए बनू शाकिर पर अमीरल मोमेनीन (अ. स.) को बड़ा एतमाद था। इसी वजह से जंगे सिफ़्फ़ीन मे फ़रमाया था कि अगर क़बीला ए बनी शाकिर के एक हज़ार अफ़राद मौजूद हों तो दुनियां में इस्लाम के सिवा कोई मज़हब बाक़ी न रहे। आबिस ने कूफ़े में जनाबे मुस्लिम का पूरा साथ दिया और जब जनाबे मुस्लिम कूफ़ा पहुँचे तो आपने सब से पहले ताअउन का यक़ीन दिलाया था। आप कूफ़े से जनाबे मुस्लिम का ख़त ले कर मक्का गए थे और वहीं से इमाम हुसैन (अ.स.) के साथ हो गए और यौमे आशूरा शहीद हो गए । आप मैदान में आए और मुबारज़ तलबी की मगर किसी मे दम न था कि आबिस से लड़ता बिल आखिर इन पर इजतेमाई तौर पर पथराव किया फिर बेशुमार अफ़राद ने मिल कर उन्हें शहीद कर के सर काट लिया।
बुरैर हमादानी

जनाबे बुरैर इब्ने ख़ज़ीर हम्दानी मशरक़ी, बनू मशरिक़ के क़बीला ए हम्दान एक मोअम्मर ताबेई थे। यह निहायत बहादुर आबिद और ज़ाहिद और बेमिस्ल क़ारी कुरआन थे। इनका शुमार कूफ़े के शोरफ़ा में था । इन्होंने कूफ़े से मक्के जा कर इमाम हुसैन (अ.स.) की हमराही इख़्तेयार की थी और ता हयात साथ रहे। शबे आशूर पानी लाने में इन्होंने अज़ीम जद्दोजेहद की थी। मैदाने जंग में आपका मुक़ाबला यज़ीद इब्ने माक़ल से हुआ, आप ने उसे क़त्ल कर दिया। फिर रज़ी इब्ने मनक़ज़ अब्दी सामने आया। आपने ज़मीन पर दे मारा। इब्ने में काअब इब्ने जाबिर अज़दी ने आपकी पुश्त में नेजा मारा और आपने उस रज़ी की नाक दांत से काट ली। जिसके सीने पर सवार थे। क़आब का नेजा बुरैर की पुश्त में रह गया और उसने तलवार से बुरैर को शहीद कर दिया।



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