
Mujtaba Imam Hassan Ka Laqab | Muqam Syeda Kainat kya Quran o Hades se.



सैय्यदना इमामे हसन अलैहिस्लाम की ज़ौजा ने आपको ज़हर नही दिया था
अस्ल क़ातिल को बचाने के लिए और अहलेबैत के किरदार को मजरुह करने के लिए दुश्मन ए अहलेबैत ने ये साज़िश की
सबसे बड़ा सवाल ये हैं की सय्यदना ईमाम हसन ने अपनी जोजा का नाम नहीं लिया तों फिर जिन लोगो ने आपकी जोजा पर ये घटिया इल्जाम लगाया उन्हें कैसे पता चला की जहर आपकी अहलिया ने दिया था…?
ये सब साजिश अहलेबैत के दुश्मनो ने की हैं ताकि असल कातिल को बचाया जा सके और अहले बैत के किरदार को मज़रूह किया जा सके
ईमाम हसन के अक्द में आने के बाद आपकी अहलिया अहलेबैत में शामिल हों चुकी थी उनकी तरफ ऐसा इल्जाम अहलेबैत पर तबर्रा करना हैं
शैखुल इस्लाम सय्यद मुहम्मद मदनी मिया
ये तहकीक सबसे पहले “हज़रत सदरुल अफ़ाज़िल” ने पेश की के सय्यदना ईमाम हसन को जहर आपकी अहलिया ने नहीं दिया बल्कि ये बात दुश्मन ऐ अहलेबैत ने फैलाई हैं
सही बुखारी और सही मुस्लिम मे इमाम हसन अलैहस्सलाम को शहीद करने वाला का जिक्र है किताबों के पेज नंबर बदल सकते है
सही बुखारी की एक हदीस में रीवायत है कि इमाम हसन अलैहिस्सलाम को उनकी बीवी जादा बिन्त अल-अशअथ ने जहर दिया था, जो मुआविया इब्न अबी सुफयान के इशारे पर काम कर रही थी। (सही बुखारी, जिल्द 4, किताब 53, हदीस 146)
सही मुस्लिम की एक हदीस में रीवायत है कि इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जादा बिन्त अल-अशअथ ने जहर दिया था, और मुआविया इब्न अबी सुफयान ने इसके लिए उसे उकसाया था। (सही मुस्लिम, जिल्द 4, किताब 29, हदीस 5913)
तारीख अल-तबरी जैसी इतिहासिक किताबों में भी रीवायत का है, जिसमें कहा गया है कि मुआविया इब्न अबी सुफयान ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को शहीद करने के लिए जादा बिन्त अल-अशअथ को जहर देने के लिए लालच दिया था। (तारीख अल-तबरी, जिल्द 11, पेज 61)
कई किताबों में इस बात का उल्लेख है कि ईमाम हसन अलैहिस्लाम की पत्नी पर जहर देने का इल्जाम झूठा और बेबुनियाद है। यहाँ कुछ किताबों के हवाले दिए गए हैं:
1. “तारीख-ए-तबारी” (तारीख-ए-तबारी, जिल्द 6, पेज 184-185)
2. “किताब-ए-सुलेमान” (किताब-ए-सुलेमान, पेज 234)
3. “अल-इमाम अल-हसन” (अल-इमाम अल-हसन, पेज 245-246)
4. “तारीख-ए-इस्लाम” (तारीख-ए-इस्लाम, जिल्द 2, पेज 345-346)
5. “अल-मुस्तद्रक अला अल-सहीहैन” (अल-मुस्तद्रक अला अल-सहीहैन, जिल्द 3, पेज 123-124)
इन किताबों में उलेमा और इतिहासकारों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि ईमाम हसन अलैहिस्लाम की पत्नी पर जहर देने का इल्जाम झूठा और बेबुनियाद है।
कुछ उलेमा जो जादा बिन्त अल-अशअथ को बेकसूर मानते हैं और उन पर जहर देने का इल्जाम झूठा मानते हैं:
1. आलमा इब्ने हजर अस्कलानी (रह.): उन्होंने अपनी किताब “तहजीब अल-तहजीब” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ पर जहर देने का इल्जाम झूठा है।
2. आलमा इब्ने हिब्बान (रह.): उन्होंने अपनी किताब “सही इब्ने हिब्बान” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ एक नेक और ईमानदार महिला थीं।
3. आलमा जलालुद्दीन सuyuti (रह.): उन्होंने अपनी किताब “तारीख अल-खुलफा” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ पर जहर देने का इल्जाम झूठा है।
4. आलमा शहाबुद्दीन अल-आलusi (रह.): उन्होंने अपनी किताब “रूह अल-मआनी” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ एक नेक और ईमानदार महिला थीं।
5. आलमा मुहम्मद इब्ने अली अल-शौकानी (रह.): उन्होंने अपनी किताब “फतह अल-कदीर” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ पर जहर देने का इल्जाम झूठ
1. आलमा इब्ने अबी शैबा (रह.): उन्होंने अपनी किताब “मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जहर दिया था।
2. आलमा इब्ने असाकिर (रह.): उन्होंने अपनी किताब “तारीख इब्ने असाकिर” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जहर दिया था।
3. आलमा इब्ने कसीर (रह.): उन्होंने अपनी किताब “तफसीर इब्ने कसीर” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जहर दिया था।
4. आलमा इब्ने हजर हैतमी (रह.): उन्होंने अपनी किताब “सवाईक अल-मुह्रिका” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जहर दिया था।
5. आलमा मुहम्मद इब्ने अली अल-शैखानी (रह.): उन्होंने अपनी किताब “फतह अल-कदीर” में लिखा है कि जादा बिन्त अल-अशअथ ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जहर दिया था।




*Hazrat Hasan Alaihissalam Par Zahar Ka Asar* : Kahte Hain Unhe Zahar Diya Gaya Tha Ap Ki Wafat Ke Waqt Hazrat Hussain Alaihissalam Ap Ke Sirhane Baithe Huwe The Inhone Poocha Aye Mere Bhai Ap Ko Zahar Khurani Ka Kis Par Shubhah Hai ?
Ap Ne Farmaya Bhai Is Liye Poochte Ho Ki Ap Use Jaan Se Maar Daalo : Hazrat Hussain Alaihissalam Ne Kaha Han.
Apne Kaha Agar Wahi Shakhs Hai Jis Par Mujhe Shak Wa Shubhah Hai To Khuda Wand Taala Kafi Hai Agar Wo Nahi Hai To Main Nahi Chahta Ki Kisi Begunah Ka Khoon Ho.
Aam Logon Main Yeh Baat Mashhoor Hai Ki Imam Hasan Alaihissalam Ko ” *Muaviya* ” Ke Kahne Par Imam Hasan Alaihissalam Ki Biwi ” *Joda* ” Ne Zahr Di Thi
📚 *Reference* 📚
*Shawahid Annubuwwah Safah 303*



⚫ यौम ए शहादत हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम 😭
(28 सफ़र, सन 50 हिजरी)
इमाम हसन अलैहिस्सलाम इमाम अली अ.स. और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा अ.स. के बेटे और पैग़म्बर ए अकरम स.अ. के नवासे हैं।
आप 15 रमज़ान सन 3 हिजरी में पैदा हुए और आपके पैदा होने के बाद पैग़म्बर ए अकरम स.अ. ने आपको गोद में लेकर आपके कान में अज़ान और अक़ामत कही और फिर आपका अक़ीक़ा किया, एक भेड़ की क़ुर्बानी की और आपके सर को मूंड कर बालों के वज़न के बराबर चांदी का सदक़ा दिया।
पैग़म्बर ए आज़म स.अ. ने आपका नाम हसन रखा और कुन्नियत अबू मोहम्मद रखी, आपके मशहूर लक़ब सैयद, ज़की, मुज्तबा वग़ैरह हैं।
आप की इमामत

इमाम हसन अ.स. ने अपने वालिद इमाम अली अ.स. की शहादत के बाद ख़ुदा के हुक्म और इमाम अली अ.स. की वसीयत के मुताबिक़ इमामत और ख़िलाफ़त की ज़िम्मेदारी संभाली और लगभग 6 महीने तक मुसलमानों के मामलात को हल करते रहे और इन्हीं महीनों में मुआविया इब्ने अबी सुफ़ियान जो इमाम अली अ.स. और उनके ख़ानदान का खुला दुश्मन था और जिसने कई साल हुकूमत की लालच में जंग में गुज़ारे थे उसने इमाम हसन अ.स. की हुकूमत के मरकज़ यानी इराक़ पर हमला कर दिया और जंग शुरू कर दी।

Sahadat_Imam_Hassan۴💔👇🏻
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Sayyeduna Imam Hasan Alaihissalam ne pehle he Ummul Momineen Hazrat Sayyeda Aaisha Siddiqa Salamullahi Alaiha se Apne Nanajaan ki Aaramgaah ke Hujre me Madfan hone ki Ijazat Mangi thi Aur Sayyeda Ummul Momineen ne Unhe Ijazat Ata kardi thi. Magar Waqt-e-Shahadat dobara Aapne Ijazat Talab ki to tab bhi Aapko Ijazat dedi. To Imam-e-Aali Muqaam ne Apne Bhai Imam Hussain Alaihissalam se Wasiyat farmayi ke Mujhe Nanajaan ke Baazu Dafan kardena lekin agar Banu umaiyya aake ikhtelaf karne lage to unse na ladna aur Mujhe Kabrastan me laake dafan kardena.
Jab Aapka Janaza Mubarak Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ke Hujra-e-Mubarak ke Paas lejaya gaya to badbakht marwan laeen aaya aur kehne laga hum Hasan bin Ali ko Yaha madfan hone nahi denge, Hazrat Usman bin Affan Kabrastan me Madfan hon aur Ye Yaha?
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Andaza lagaiye us waqt Imam Hussain Alaihissalam aur Sayyeda Zainab Salamullahi Alaiha ke Qalb-e-Athar pe kya beeti hogi.
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Sayyeduna Imam Hasan-e-Mujtaba Alaihissalam ke Janaza Mubarak ko Jannatul Baqi me lejaya gaya aur Wahi Aapki Aaramgah bani.
Puri Zindagi me Aapne jo Qurbani di aur Sakhawat karne waalo ke Sardar bane, Ye Amal Aapka Wisaal ke baad bhi jaari raha ke Apne Haq ki Zameen bhi chod di…. kaun chodta hai apni zameen??



*Bughz e Ahle Baith e Pak Ka Anjaam*
Huzoor Nabi e Kareem ﷺ Farmate Hain :- Agar Koi Shaks Baitullah Sharif (Kabah Sharif) Ke Ek Kaune Aur Maqaam e Ibrahim Ke Darmiyan Jayen Aur Namaze Padhe Aur Roze Rakhe Aur Phir Ahle Baith Ki Dushmani Me Mar Jayen To Wo Jahannum Me Jayega.
📚 *Reference* 📚
Al Mustadrak, Jild 4, Safa 129, 130, Hadees No 4766.

बेशक अल्लाह के नज़दीक़ सबसे बेहतरीन और कुबूल किए जाने वाला दीन इस्लाम है लेकिन वो कौन सा इस्लाम है जो अल्लाह को पसंद है?, अल्लाह का दिया हुआ हकीकी दीन या हमारा बनाया हुआ तख़्लीकी दीन?, हक़ दीन हमें तब ही मिल सकता है जब हमारे पास वो दो वजनदार चीज़ हों, जिन्हें थामने का हुक्म, अल्लाह और अल्लाह के रसूल सल्लललाहु अलैहे व आली व सल्लम ने दिया है यानी कुरआन पाक और अहलेबैत अलैहिस्सलाम । जब तक सही किताब और किताब के सही आलिमों को नहीं थामा जाएगा तब तक हक़ दीन समझ नहीं आ सकेगा।
एक मर्तबा एक शख्स मौला अली अलैहिस्सलाम के पास आया, आने वाला ये देखना चाहता था की मौला अली अलैहिस्सलाम ही हक़ इल्म के वारिस हैं या नहीं। सवाल करने लगा, “या अली! मेरे पास बकरियों का एक झुंड है जिसकी निगरानी के लिए मैंने एक कुत्ता रखा हुआ उन्हें बिखरने से बचाता है, लेकिन अब मुझे एक परेशानी है, मेरी बकरियों में से एक बकरी ने ऐसे बच्चा दिया है जो समझ नहीं आता की कुत्ता है या बकरी मतलब उसमें कुत्ते और बकरी दोनों की सिफात हैं, अगर बकरी है तो पाक है और उसको खाना जायज़ है और अगर कुत्ता है तो नाजिस है और उसको खाना भी हराम है।”, मौला अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया, “ऐ शख़्स! इसकी बोली को सुनो, अगर कुत्ते की तरह मुँह उठाकर रोए तो कुत्ता और अगर बकरी की तरह मिमयाए तो बकरी है।”, कहने लगा, “या अली! मैं ये करके देख चुका हूँ, कभी वो कुत्ते की तरह रोने लगता है तो कभी बकरी की तरह बोलने लगता है, मौला अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया, “फिर उसे पानी पीते हुए देख, अगर कुत्ते की तरह जुबान से चाटकर पानी पीता है तो कुत्ता है और अगर बकरी की तरह आगे के पाँव पर बैठकर घूँट लेते हुए पानी पिए तो बकरी है।”, कहने लगा, “या अमीरुल मोमिनीन! मैं ये कर के भी देख चुका, कभी कुत्ते की तरह जीभ से पानी पीता है तो कभी बकरी की तरह पीता है।”, मौला अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया, “ऐसा करो, उसे बकरियों के झुंड के साथ लेकर चल, अगर झुंड में घुसकर या झुंड के साथ चले तो समझ जाना बकरी है और अगर निगरानी वाले कुत्ते की तरह, झुंड के बाजू में चले तो समझ जाना कुत्ता है।”, कहने लगा, “या अमीरु मोमिनीन! ये भी करके देख चुका हूँ, कभी तो झुंड के बीच में बकरी की तरह चलता है तो कभी निगरानी वाले कुत्ते की तरह बाजू में किनारे-किनारे चलने लगता है।”, अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया, “उसके सामने गोश्त का टुकड़ा डालकर देख, अगर गोश्त को सूँघकर खाता है तो कुत्ता है और अगर सूँघकर मुँह फेर ले तो समझ लेना की बकरी है । “, कहने लगा, “या अमीरुल मोमिनीन ! मैं ये भी करके देख चुका, कभी तो गोश्त को सूँघ खाने लगता है तो कभी, मुँह फेर लेता है।”, मौला अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया, “फिर ऐसा कर की इसे ज़िब्ह करके देख अगर इसके अंदर से एक आँत निकले जैसे की कुत्ते में होती तो समझ जाना कुत्ता है और अगर इसके अंदर कई आँत निकलें, जैसे की बकरी में होती हैं तो समझ जाना बकरी है ।”, ये सुनते ही वो शख्स मौला अली अलैहिस्सलाम के कदमों में गिरकर कहने लगा, “या अमीरुल मोमिनीन मैंने सब झूठ कहा, ना तो मेरे पास बकरियों का झुंड है, ना ही कुत्ता है और ना ही ऐसा कोई वाक्या ही पेश आया है, मैं तो आपका इम्तिहान लेने की नियत से सवाल किया लेकिन आपने तो जवाब में इल्म का दरिया बहा दिया।
लोगों क्या ये वाक्या सुनकर भी तुम्हारे दिल वारिस ए इल्म ए नबी के लिए गवाही नहीं देते?, अहलेबैत अलैहिस्सलाम पाक हैं फिर भी उन्हें, कुत्ते जैसी नाजिस चीज़ का भी इतना बारिकी से इल्म है। पूछने वाले ने सोचा की इन्हें क्या पता होगा इस बारे में लेकिन वो ये भूल बैठा की जिसे खुद अल्लाह ने इल्म आम करने के लिए चुना हो, उसे हर छोटी-बड़ी, हलालहराम, जाहिर बातिन का इल्म सबसे ज्यादा दिया होगा। आज के दौर में देखता हूँ की सैंकड़ों लोग खुद आलम बताते फिरते हैं जबकि हकीक़त में तो इंसानों की सिर्फ़ तीन किस्म ही मौजूद हैं, आलिम, तालिब ए इल्म और ख़स ओ खाशाक।
आलिम सिर्फ़ मुहम्मद ओ आल ए मुहम्मद हैं यानी रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम, उनकी बेटी फातिमा सलामुल्लाह अलैहा और बारह इमाम अलैहिस्सलाम हैं। तालिब ए इल्म वो हैं जिन्होंने तौहीद ओ रिसालत के बाद, इमामत ओ विलायत की गवाही दी, कुरआन ओ अहलेबैत अलैहिस्सलाम को थामा और इनके ज़रिए इल्म हासिल करने की कोशिशें कीं। इसके अलावा बाकि सारे लोग ख़स ओ खाशाक में शामिल हैं, जिनकी इल्म की दुनिया में कोई गिनती ही नहीं । अल्लाह से डरने वाले बनें, अपने रसूल के हुक्म को मानें और कुरआन व मुहम्मद ओ आल ए मुहम्मद को थाम लें, बेशक ये ही सच्ची और सीधी राह है जिसकी मंज़िल खुदा है।