कुरान अलीع के साथ

हदीस :

“कुरान अलीع के साथ और अलीع कुरान के साथ”, इसी तरह एक और हदीस ए पाक में आया “अलीع और कुरान हौज ए कौसर तक एक दूसरे से जुदा नहीं होंगे बल्कि साथ रहेंगे”

📚 अल मुस्तद्रक लील हाकिम, वॉल्यूम: 04, पेज: 120, हदीस:4604,
(इमाम तबरानी ने ये हदीस हज़रत उम्मे सलमा रद्दी अल्लाहु अनहा से नक़ल किया )

📚 इमाम हयथमी अस सवाईके मुहरिका, पेज: 421
(इमाम सुयुती ने जाम उल जवामे)

आजिज़ाना अल्फ़ाज़

नासबी अक्सर एक रिवायत जो हज़रत मुहम्मद बिन हंफ़ीया से मरवी है उसे पेश करते हैं के हज़रत अली ने ख़ुद फ़रमाया ” मैं एक आम मुसलमान हूं “

मौला अली का ख़ुद को आम मुसलमान कहना ये “बड़े लोगों की आला लोगों की शान होती है दूसरों के सामने वो आजिज़ी इंकेसारी ज़ाहिर करते हैं

लेकिन नासबी साज़िशन इस रिवायत को जान बूझ कर मौला अली का मक़ाम ओ मर्तबा कम करने की नाकाम कोशिश के तहेत पेश करते हैं

आईये हम हज़रत अबु बकर के ऐसे ही आजिज़ाना अल्फ़ाज़ दिखाते हैं

“लोगो ने बैत ए सक़िफ़ा के बाद हज़रत अबु बकर की बैत ए आम्मा की इसके बाद हज़रत अबु बकर ने लोगों से खिताब किया और हम्दो सनआ के बाद फ़रमाया

लोगों मुझे तुम्हारा वली बनाया गया है लेकिन मैं तुम्हारा #बेहतरीन आदमी नही हूं” ( अल बिदाया वन्निहया जिल्द 5 /340 )

हज़रत अबु बकर अगर ख़ुद ऐसे आजिज़ाना अल्फ़ाज़ अपने लिए इस्तेमाल करें तो क्या उनका मक़ाम ओ मर्तबा उनकी
फ़ज़ीलत कम हो जाती है ?

नही बल्कि इससे उनकी आला शान ज़ाहिर होती है

AHLE BAIT K MUTALLIK NABI E KARIM صلى الله عليه وسلم KI WASIYAT.

AHLE BAIT K MUTALLIK NABI E KARIM صلى الله عليه وسلم KI WASIYAT

Arabic Matan :

ثُمَّ قَالَ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمًا فِينَا خَطِيبًا بِمَاءٍ يُدْعَى خُمًّا بَيْنَ مَكَّةَ وَالْمَدِينَةِ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَوَعَظَ وَذَكَّرَ ثُمَّ قَالَ ‏”‏ أَمَّا بَعْدُ أَلاَ أَيُّهَا النَّاسُ فَإِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ يُوشِكُ أَنْ يَأْتِيَ رَسُولُ رَبِّي فَأُجِيبَ وَأَنَا تَارِكٌ فِيكُمْ ثَقَلَيْنِ أَوَّلُهُمَا كِتَابُ اللَّهِ فِيهِ الْهُدَى وَالنُّورُ فَخُذُوا بِكِتَابِ اللَّهِ وَاسْتَمْسِكُوا بِهِ ‏
فَحَثَّ عَلَى كِتَابِ اللَّهِ وَرَغَّبَ فِيهِ ثُمَّ قَالَ
Translation :
Hazrat Zaid bin Arqam Radi Allaho Anho Se Rivayat Hai Farmate Hai

“Ek Roz Nabi E Karim صلى الله عليه وسلم Ne Makkah Aur Madina k darmiyan us paani k Makam me jise Khum Kaha Jaata hai, Khade Hokar Khutba Diya Jisme ALLAH Taala ki Hamd Wa Sana Ki Aur waaj Wa Nasihat Farmayi Phir Farmaya AYE LOGO khabardaar Hojao Mai ek bashar hoon ankarib mere Rab Ka Qasid aajaye aur mai uska bulawa kabool karlu aur MAI TUM LOGO ME DO WAZNI CHEEZ CHODE JAA RAHA HU, Jinme PEHLI TO ALLAH KI KITAB HAI JISME HIDAYAT WA NOOR HAI TUM ALLAH KI KITAB LO AUR USKO MAZBOOTI SE THAAM LO phir Kitabullah pe ubhara aur Targeeb di Phir Farmaya DUSRI CHEEZ MERE AHLE BAIT HAI, MAI TUMKO APNI AHLE BAIT K MUTALLIK ALLAH SE DARATA HOON MAI TUMKO APNI AHLE BAIT K MUTTALIK ALLAH SE DARATA HOON ”

References :

(Sahi Muslim, Vol : 06, Pg : 267, Kitabul Manakib E Sahaba, Baab : Man Fazail E Ali Ibn Abu Talib, Hadees : 6225 “English No : 2408”)(Imam Ahmad Ibn Hambal Al Musnad Vol : 04, Pg : 366, Hadees :19265)(Imam Ibn Hibban Sahi Ibn Hibban Vol : 01, Pg : 145, Hadees : 123)(Imam Ibn Khuzaymah Sahi ibn Khuzaymah Vol : 04, Pg : 62, Hadees : 2357)
(Imam Lalka’i Itiqad Ahlus Sunnah Vol : 01, Pg : 79, Hadees : 88)
(Imam Bayhaqi Sunan Al Kubra Vol : 02, Pg :148, Hadees : 2679)
(Ibn Kathir Tafseer Ul Quran Vol : 03, Pg : 487)
(Mishkal Al Masabih Vol : 01, Pg : 68) (Zujatul Masabeeh Vol : 05, Pg : 317,318,319)
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चौदह सितारे पार्ट 37

अमीरल मोमेनीन हज़रत अली (अ.स.)

नुसरते दीं है, अली का काम सोते जागते

ख़्वाबो बेदारी है यकसां यह हैं ऐने किरदिगार

इसकी बेदारी की अज़मत को सने हिजरी से पूछ

जिसका सोना बन गया, तारिखे दीं की यादगार (साबिर थरयानी, कराची)

मौलूदे काबा हज़रत अली (अ.स.) अबुल ईमान हज़रत अबू तालिब व जनाबे फ़ात्मा बिन्ते असद के बेटे पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स. सहीमे नूर, दामाद, भाई, जानशीन और फ़ात्मा स. के शौहर हज़रत इमामे हसन (अ.स.), इमामे हुसैन (अ. स.) ज़ैनबो उम्मे कुलसूम के पदरे बुजुर्गवार थे। आप जिस तरह पैग़म्बरे इस्लाम के नूर में शरीक थे, उसी तरह कारे रिसालत में भी शरीक थे। यौमे विलादत से ले कर पूरी जिन्दगी पेग़म्बरे इस्लाम के साथ उनकी मदद करने में गुज़ारी । उमूरे मम्लेकत हो या मैदाने जंग आप हर मौक़े पर ताज दारे दो आलम के पेश पेश रहे। अहदे रिसालत स. के सही फ़तूहात का सेहरा आप ही के सर रहा। इस्लाम की पहली मंजिल दावते जुल अशीरा से ले कर ता विसाले रसूल स. आपने वह कार हाय नुमायां किये जो किसी सूरत में भूलाये नहीं जा सकतेऔर क्यों न हो जब कि आपका गोश्त पोस्त रसूल स. का गोश्त पोस्त था और अली (अ.स.) पैदा ही किये गये थे इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम के लिये ।
आपकी विलादत आपकी नूरी तख़्लीक़, खिल्क़ते सरवरे कायनात के साथ साथ पैदाईशे आलम व आदम (अ. स.) से बहुत पहले हो चुकी थी लेकिन इन्सानी शक्लो सूरत में आपका ज़ुहूर व नमूद 13 रजब 30 आमूल फ़ील, मुताबिक़ 600 ई0 जुमे के दिन बमुक़ामे ख़ानाए काबा हुआ। आपकी मां फ़ात्मा बिन्ते असद और बाप अबू तालिब थे। आप दोनों तरफ़ से हाशमी थे। इतिहासकारों ने आपके ख़ाना ए काबा में पैदा होने के मुताअल्लिक़ कभी कोई इख़्तेलाफ़ जाहिर न किया बल्कि बिल इत्तेफ़ाक़ कहते हैं कि लम यूलद किबलहा वला बादह मौलूद फ़ी बैतुल हराम आप से पहले कोई न ख़ाना ए काबा में पैदा हुआ है न होगा। इसके बारे में उलेमा ने तवातुर का दावा भी किया है। (मुस्तदरिक इमामे हाकिम जिल्द 3 पृष्ठ 483) तवारिखे इस्लाम में वाकियाए विलादत यूं बयान किया गया है कि फ़ात्मा बिन्ते असद को जब दर्दे ज़ेह की तकलीफ़ महसूस हुई तो आप रसूल करीम के मशवरे के मुताबिक़ ख़ाना ए काबा के क़रीब गईं और उसका तवाफ़ करने के बाद दीवार से टेक लगा कर खड़ी हो गईं और बारगाहे ख़ुदा की तरफ़ मुतावज्जे हो कर अर्ज़ करने लगीं, ख़ुदाया मैं मोमेना हूं तुझे इब्राहीम बानी ए काबा और इस मौलूद का वास्ता जो मेरे पेट में है, मेरी मुशकिल दूर कर दे। अभी दुआ के जुमले ख़त्म न होने पाए थे कि दीवारे काबा शक (टूटना ) हो गई और फ़ात्मा बिन्ते असद काबे में दाखिल हो
गईं और दीवार ज्यों की त्यों हो गई। ( मनाकिब पृष्ठ 132, वसीलतुन नजात पृष्ठ 60) विलादत काबा के अन्दर हुईं। अली (अ.स.) पैदा तो हुए लेकिन उन्होने आंख नहीं खोली। मां समझी की शायद बच्चा बे नूर है, मगर जब तीसरे दिन सरवरे कायनात स. तशरीफ़ लाए और अपनी आग़ोशे मुबारक में लिया तो हज़रत अली (अ. स.) ने आंखे खोल दीं और जमाले रिसालत पर पहली नज़र डाली। सलाम कर के तिलावते सहीफ़ाए आसमानी शुरू कर दी। भाई ने गले लगाया और यह कह कर कि ऐ अली (अ.स.) जब तुम हमारे हो तो मैं तुम्हारा हूं, फ़ौरत मूंह मे ज़बान दे दी। अल्लामा अरबली लिखते हैं वअज़ ज़बाने मुबारक दवाज़दह चश्मा कशूदा शुद ज़बाने रिसालत स. से दहने इमामत में बारह चशमे जारी हो गये और अली (अ.स.) अच्छी तरह सेराब हो गये। इसी लिए इस दिन को यौमुल तरविया कहते हैं क्योंकि तरविया के माने सेराबी के हैं। (कशफ़ुल ग़म्मा पृष्ठ 132)

अल ग़रज़ हज़रत अली (अ.स.) ख़ाना ए काबा से चौथे रोज़ बाहर लाए गये और उसके दरवाज़े पर अली (अ.स.) के नाम का बोर्ड लगा दिया गया। जो हश्शाम इब्ने अब्दुल मलिक के ज़माने तक लगा रहा। आप पाको पाकीज़ा, तय्यबो ताहिर और मख़्तून (ख़तना शुदा) पैदा हुए। आपने कभी बुत परस्ती नहीं की और आपकी पेशानी कभी बुत के सामने नहीं झुकी इसी लिए आपके नाम के साथ करम अल्लाह वजहा कहा जाता है । ( नूरूल अब्सार, पृष्ठ 76, सवाएके मोहर्रेका पृष्ठ 72)

आपके नामे नामी मोर्रेख़ीन का बयान है कि आपका नाम जनाबे अबू तालिब ने अपने जदे आला जामए क़बाएले अरब क़सी के नाम पर ज़ैद और मां फ़ात्मा बिन्ते असद ने अपने बाप के नाम पर असद और सरवरे काएनात स. ने ख़ुदा के नाम पर अली रखा। नाम रखने के बाद अबू तालिब और बिन्ते असद ने कहा हुज़ूर हमने हातिफ़े ग़ैबी से यही नाम सुना था । ( रौज़ातुल शोहदा और किफ़ायत अल तालिब)

आपका एक मशहूर नाम हैदर भी है जो आपकी मां का रखा हुआ है। जिसकी तस्दीक़ इस रजज़ से होती है जो आपने मरहब के मुक़ाबले में पढ़ा था। जिसका पहला मिसरा यह है अना अल लज़ी समतनी अमी हैदरा इस नाम के मुताअल्लिक रवायतों में है कि जब आप झूले में थे एक दिन मां कही गई हुई थीं झूले पर एक सांप जा चढ़ा, आपने हाथ बढ़ा कर उसके मुँह को पकड़ लिया और कल्ले को चीर फेंका, माँ ने वापस हो कर यह माजरा देखा तो बे साख़्ता कह उठीं, यह मेरा बच्चा हैदर है।

कुन्नीयत व अल्क़ाब आपकी कुन्नीयत व अल्क़ाब बे शुमार हैं। कुन्नीयत में अबुल हसन और अबू तुराब और अल्क़ाब में अमीरुल मोमेनीन, अल मुर्तजा, असद उल्लाह, यदुल्लाह, नफ़्सुल्लाह, हैदरे करार, नफ़्से रसूल और साकिये कौसर ज़्यादा मशहूर हैं।