
हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के यहां एक मेहमान आया। उसने खाना खाने के बाद शर्बत तलब किया। हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने दर्याप्त फरमाया कि आपको कौन-सा शर्बत दरकार है? मेहमान ने जवाब दिया वह शर्बत जो न मिलने के वक़्त जान से ज़्यादा कीमती और मिल जाने के वक्त निहायत कम कीमत होता है। इमाम साहब ने नौकरों से फ़रमाया कि मेहमान पानी मांगता है। हाज़रीन को आपकी ज़हानत पर निहायत हैरानी हुई। ( मुग़नियुल वाइजीन सफा २१८)
सबक़ : पानी ख़ुदा तआला की एक बड़ी गिरांकद्र और कीमती नेमत है। शैख़ सादी अलैहिर्रहमः फ़रमाते हैं कि मुर्गी को देखिए कि एक घूंट पानी का पीकर फ़ौरन अपना मुंह ऊपर आसमान की तरफ़ उठाकर गोया अल्लाह का शुक्र अदा कर लेती है। मगर अफ़सोस कि गाफिल इंसान बीसियों मन पानी पीकर भी अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करता ।

