शाही दावत

शाही दावत

एक रोज़ हज़रत उस्मान गनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया या रसूलल्लाह! आज आपकी मेरे घर दावत है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुबूल फरमा लिया। अपने अस्हाब समेत हज़रत उस्मान के घर तशरीफ उस्मान गनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि के पीछे पीछे चलने लगे। हुजूर का एक-एक कदम मुबारक जो उसके घर की तरफ चलते हुए जमीन पर पड़ रहा था गिनने लगे। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दर्याप्त फरमाया- ऐ उस्माना यह मेरे कदम क्यों गिन रहे हो? हज़रत उस्मान ने अर्ज किया या रसूलल्लाहा मेरे मा बाय आप पर कुरबान हो मैं चाहता हूं कि हुजूर के एक-एक कदम के एवज में आपकी ताजीम व तौकीर की खातिर एक-एक गुलाम आजाद करू । चुनाचे हज़रत उस्मान के घर तक जिस केंद्र कदम पड़े, उसी कद गुलाम हजरत उस्मान ने आज़ाद किए। जब यह दावत हो चुकी तो हजरत मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु अपने घर तशरीफ लाए तो हज़रत फातिमा रजियल्लाहु अन्हा ने देखा कि आप बड़े मग़मूम-से थे। हज़रत फातिमा ने दर्याप्त फरमाया कि आप परेशान क्यों हैं? तो फरमाया कि फातिमा आज मेरे भाई उस्मान ने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बड़ी शानदार दावत की है और हुजूर के एक-एक कदम के एवज़ उन्होंने गुलाम आजाद किए। ऐ काश! हम भी हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इसी किस्म की कोई दावत कर सकते। हज़रत फ़ातिमा ने फ़रमाया आप परेशान न हों। जाइये और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को आप भी दावत दे आइये। हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया मगर इस केंद्र बड़ा इंतजाम और एक एक कदम के बदले एक-एक गुलाम आजाद करना, यह कैसे होगा? फ़रमायाः इंशाअल्लाह सारा इंतज़ाम हो जायेगा। चुनांचे हज़रत अली गये और हुजूर की ख़िदमत में हाज़िर होकर दावत अर्ज़ कर दी। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुबूल फ्रमा ली। अपने असहाब समेत हज़रत फ़ातिमा के घर तशरीफ ले चले। हज़रत फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हुजूर को असहाब समेत बिठाया और खुद ख़लवत में में तशरीफ ले जाकर सज्दे में गिर गयीं और अल्लाह से अर्ज़ की कि ऐ अल्लाह! तेरी बंदी फ़ातिमा ने तेरे महबूब और महबूब के असहाब की दावत की है। तेरी बंदी का तुझ ही पर भरोसा है। इलाही! मेरी लाज रख और इस दावत के खाने का तू इंतज़ाम फरमा दे।

यह दुआ मांगकर हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने हंडिया को चुल्हे पर रखा और रो-रोकर फिर अपने अल्लाह से दुआ की कि मौला! अपनी बंदी फ़ातिमा को शर्मिन्दा न करना। खुदा तआला का दरियाए करम जोश में आया और उसने उस हंडिया को जन्नत के खाने से भर दिया। हज़रत फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा ने उस हंडिया में से सबको खाना भेजना शुरू फ्रमाया। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और आपके सारे अस्हाब ने खाना तनावुल फरमा लिया। लेकिन हंडिया में से कुछ भी कम न हुआ।

हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहाबाए किराम से फरमाया जानते हो यह खाना कहां से आया है ?

सहाबा ने अर्ज़ किया नहीं या रसूलल्लाह ! फ़रमाया यह खाना अल्लाह ने हमारे लिये जन्नत से भेजा है। सहाबाए किराम यह सुनकर बड़े खुश हुए।

हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फिर अंदर गयीं और सज्दे में गिरकर दुआ की

‘‘ऐ अल्लाह! उस्मान ने तेरे महबूब के एक-एक कदम के एवज़ में एक-एक गुलाम आज़ाद किया है और तेरी बंदी में इतनी ताक़त नहीं मौला जहां तूने मेरे ख़ातिर जन्नत से खाना भेजकर मेरी शर्म रखा ली है वहां तू मेरी ख़ातिर तेरे महबूब के इन कदमों के बराबर जितने कदम चलकर वह मेरे घर तशरीफ़ लाए हैं महबूब की उम्मत के गुनहगारों को जहन्नम से आज़ाद फरमा दे ।

हज़रत फ़ातिमा जब इस दुआ से फ़ारिग़ हुई तो जिब्रईल अमीन ने हाज़िर होकर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अर्ज़ किया- या रसूलल्लाह! अल्लाह तआला ने मुझे यह बशारत देकर भेजा है कि आपकी साहबजादी की दुआ कुबूल फ़रमाते हुए हमने आपके हर कदम के एवज़ में एक हज़ार गुनाहगारों को जहन्न्म से आज़ाद कर दिया। यह बशारत सुनकर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबए किराम बड़े खुश हुए।

(जामिउल मुजिज़ात मिस्री पेज ६५) सबक: हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा का बड़ा बुलंद मर्तबा है कि आपकी ख़ातिर अल्लाह पाक ने जन्नत से खाना भेजा। आपके तुफ़ैल खुदा ने गुनहगारों को जहन्नम से आज़ाद कर दिया। यह भी मालूम हुआ कि हज़रत उस्मान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु बड़े सख़ी और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सच्चे जांबाज़ थे। यह भी मालूम हुआ कि सहाबाए किराम और अहले बैत इज़ाम सब आपस में मुहब्बत रखते थे।

Leave a comment