
हज़रत अबू करसाफा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का एक बेटा था जो ईसाईयों के साथ एक जंग में लड़ते हुए पकड़ा गया। रोमी उसे कैदी बनाकर अपने मुल्क में ले गये और जेल में डाल दिया। हज़रत अबू-क़रसाफा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु उस वक़्त असकलान में थे। आपको जब अपने बेटे की गिरफ्तारी का और जेल में डाल दिये जाने का इल्म हुआ तो आप अपने शहर से नमाज़ के वक़्त अपने बेटे को यूं पुकारते ।
ऐ बेटे ! नमाज़ का वक़्त हो गया। हज़रत अबू- करसाफा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की यह आवाज़ उनका बेटा जेल में सुन लेता और जवाब देता । हालांकि बाप बेटे के दर्मियान समुंद्र हाइल था। (तबरानी शरीफ सफा ६०)

