कौन है साबिर पाक. ..??

कौन है साबिर पाक. ..?? जिनको बाबा फरीद ने हुक्म किया के मेरा लंगर बांटते रहो आप 12 साल लंगर बांटते रहे लेकिन खुद कुछ भी नहीं खाया 12 साल बाद जब बाबा फरीद ने आपको पूछा के आपने खुद लंगर क्यूँ नहीं खाया… तो साबिर पाक ने कहा मामू आपने मुझे सिर्फ़ बांटने को कहा अपने ये कब कहा के खा भी लेना… आपका जवाब सुनकर बाबा फरीद हैरान रह गए आपका ये सबर देखके बाबा फरीद ने आपका नाम साबिर रखा… तब से आप पूरी दुनिया मे साबिर के नाम से मशहूर है…

कौन है साबिर पाक… कलियर के विरान जंगलो मे 100 साल तक जिनकी मज़ार सिर्फ अकेली थी कोई भी 12-12 कोस दूर तक वहा दाखिल नहीं हो सकता था… इंसान की तो बात छोड़िए कोई जंगली जान्वर भी अगर ग़लती से वहा दाखिल हो गया तो उसी वक़्त फना हो जाता था… 100 साल बाद गंगोह के पीर अब्दुल क़ुद् दुस आए वो भी आपके जलाल की गिरफ्त मे आ गए लेकिन वो आपसे गुजारिश करके अन्दर दाखिल हुए ओर आपसे इल्तीजा की के हजरत आप ख़ुदा के मेहबूब है अगर आप जलाल छोड़‍कर जमाल मे आए तो आपके फैज़ ओ करम से पूरी दुनिया फ़ैज़ पा सकती है… आपकी बार बार इल्तिजा करने से साबिर पाक आपकी इलतीजा क़बूल करते है… ओर ये कलियर शरीफ वही जगह

Qaul e Maula Ali AlaihisSalam.



                 *…….(بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ)…….*

*Imam Ali ibn Abi Talib (عليه السلام)*

Sadqa behtareen kar aamad dwa hai aur logon ke duniya ke aamaal akhirat main in ki nigahon ke saamne honge…..

*امام علی ابن ابی طالب (عليه السلام)*

*صدقہ بہترین کار آمد دوا ہے اور لوگوں کے دنیا کے اعمال آخرت میں ان کی نگاہوں کے سامنے ہوں گے…..*

(qasr al ahkam p6)
(Nehjul-blagha 7 p629)

Intellect is located in the heart.

‘Iyad ibn Khalifa heard ‘Hazrat Ali Bin Abu Talib Raziallahu anhu. say at Siffin, “The intellect is located in the heart. Mercy is located in the liver, Compassion is located in the spleen. The self (nafs) is located in the lungs.”

حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ، قَالَ‏:‏ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُسْلِمٍ قَالَ‏:‏ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ خَلِيفَةَ، عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، أَنَّهُ سَمِعَهُ بِصِفِّينَ يَقُولُ‏:‏ إِنَّ الْعَقْلَ فِي الْقَلْبِ، وَالرَّحْمَةَ فِي الْكَبِدِ، وَالرَّأْفَةَ فِي الطِّحَالِ، وَالنَّفَسَ فِي الرِّئَةِ‏.‏

Grade : Hasan (Al-Albani) حـسـن (الألباني) حكم :

Reference : Al-Adab Al-Mufrad 547

In-book reference : Book 30, Hadith 10

English translation : Book 30, Hadith 547

اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلَی سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَ عَلَی اٰلِ سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَ بَارِکْ وَ س٘لِّمْ