Sayyedna Huzaifa Ibn al-Yaman Ne Farmaya Baad Az Nabi Afzalul Bashar Sayyedna Ali Hein.
Sayyedna Jabir Ibn Abdullah al-Ansari Ne Farmaya Khuda Ki Qasam! Ameer al-Mu’minin Sayyedna Ali Rasoolullah (ﷺ) Ke Baad Saare Logo’n Se Afzal Thae.
Sayyedna Ammar Ibn Yasir Farmate Hein Sayyedna Ali Sabse Pehle Musalman Thae Aur Sabse Zyada Allah ke Deen Ka Ilm Janne Wale Thae.
Imam Abu Bakr al-Baqillani Farmate Hein Ke Sahabae Kiram Ki Ek Jama’at Sayyedna Ali Ki Afzaliyat Sayyedna Abu Bakr Ke Samne Bhi Aur Unke Baad Bhi Zahir Kiya Karti Thi, Unmein Se Sayyedna Abdullah Ibn Abbas Jinhone Khawarij Ke Samne Ye Baat Irshad Farmayi Mein Tumhare Pas Us Shakhs Ki Taraf Se Aaya Hun Jo Sabse Afzal Hai Aur Islam Mai Sabse Pehla Musalman Hai.
पंजतन पाक (अहलेबैत अ.) की मुहब्बत का असर न सिर्फ़ आख़िरत में है बल्कि दुनियावी बीमारियों, मुसीबतों और हादसों से भी बचाव में माना गया है — और इस बारे में कई हदीसें हैं जो बताती हैं कि अहलेबैत से मुहब्बत इबादत, रहमत और हिफाज़त का ज़रिया है।
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✅ 1. रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
> “محبتی ومودة أهل بيتي نافع في سبعة مواطن، أيسرها: عند الموت، وفي القبر، وعند النشور، وعند الكتاب، وعند الحساب، وعند الميزان، وعند الصراط.”
“मेरी मुहब्बत और मेरे अहलेबैत की मुहब्बत सात जगहों पर नफ़ा देती है — सबसे आसान मक़ाम: मौत के वक़्त, क़ब्र में, दोबारा उठाए जाने के वक़्त, किताब मिलने के वक़्त, हिसाब में, मीज़ान (तुलने) में, और सिरात (पुल) पर।”
अहलेबैत (अलैहिमुस्सलाम) की मोहब्बत में मरने वाले के लिए बख़्शिश की बेशुमार हदीसें मौजूद हैं, और यह अकीदा कुरआन और सहीह हदीसों से साबित है कि अहलेबैत की मोहब्बत, ईमान की पहचान और जन्नत की जमानत है।
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📜 हदीस (मौला अली व अहलेबैत की मोहब्बत में मरने वाले की बख़्शिश पर):
✅ 1. हदीस-ए-रसूल ﷺ:
> قال رسول الله ﷺ: “من مات على حب آل محمد مات شهيداً.” (मुस्नद अहमद, मआ जमिउल अहादीस, इब्न हजर, आदि में दर्ज है)
📘 अनुवाद: “जो शख़्स आले-मुहम्मद (अहलेबैत) की मोहब्बत पर मरे, वह शहीद मरेगा।”
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✅ 2. रसूल ﷺ ने फरमाया:
> “من مات على حب آل محمد مات مغفوراً له، ألا ومن مات على حب آل محمد مات تائباً، ألا ومن مات على حب آل محمد مات مؤمناً مستكمل الإيمان.” — (इहया उलूमुद्दीन, ग़ायातुल-मराम, शैख़ सुलैमानी बल्खी हनफ़ी)
📘 अनुवाद: “जो अहलेबैत की मोहब्बत पर मरा:
वह बख़्शा हुआ मरेगा,
तौबा किया हुआ मरेगा,
और ईमान के साथ, मुकम्मल ईमान पर मरेगा।”
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✅ 3. हदीस-ए-क़सा (कम्बल वाली हदीस):
इसमें जब जिब्रील अमीन ने अल्लाह का पैग़ाम दिया:
> “इन्नी मा अकूनु ह़ैसु कान फ़ातिमा व अबूहा व बअलुहा व बनूहा.”
📘 अर्थ: “मैं वहाँ हूँ जहाँ फ़ातिमा, उनके वालिद (रसूल ﷺ), उनके शौहर (अली अ.स), और उनके बेटे (हसन व हुसैन अ.स) हों।”
📚 यह हदीस साबित करती है कि अल्लाह की रहमत, रज़ा, और नजात — अहलेबैत की महब्बत के साथ वाबस्ता है।
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📌 नतीजा:
जो अहलेबैत की मोहब्बत में मरता है, वह शहीद, मग़फ़ूर, मुस्तहक़-ए-जन्नत, और सच्चा मोमिन मरता है।
जो शख्स अहलेबैत की मुहब्बत मे मरा वो बिस्तर पे भी मरा तो शहादत की मौत मरा, इस बात की तस्दीक़ हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की हदीसों से होती है कि:
> “जो अहलेबैत की मोहब्बत पर मरा, वो बिस्तर पर भी मरे तो शहीद मरता है।”
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📜 सहीह हदीस (हवाले के साथ):
✅ 1. हदीस-ए-रसूल ﷺ:
> قَالَ رَسُولُ اللهِ ﷺ: “من مات على حب آل محمد مات شهيداً، ألا ومن مات على حب آل محمد مات مغفوراً له، ألا ومن مات على حب آل محمد مات تائباً، ألا ومن مات على حب آل محمد مات مؤمناً مستكمل الإيمان…”