मुआविया के वालिद अबू सूफियान की मुनाफिकता, हजरत अबू बक्र सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो) के खिलाफ

मुआविया के वालिद अबू सूफियान की मुनाफिकता, हजरत अबू बक्र सिद्दीक (रजी अल्लाह अन्हो) के खिलाफ,,👇🏻

जैद बिन अली अपने वालिद से रिवायत करते है के अबू सूफियान हजरत अली (रजी अल्लाह अन्हो) के पास हाजिर हुए और बोले : ऐ अली! लोगों ने एक ऐसे शख्स की बैत कर ली है जिस ने कुरैश कबीले को रुसवा ओ जलील कर दिया है- अल्लाह की कसम अगर तुम कहो तो इस शख्स पर खिलाफत के सारे दरवाजे बंध करदेता हूं और इसके खिलाफ घोड़े सवार और पायदा लश्करों को कठ्ठा करता हुं – हजरत अली (रजी अल्लाह अन्हो) ने अबू सूफियान को फरमाया : ऐ अबू सूफियान! मोमिनीन ख्वाह उन के वतन और जिस्म एक दूसरे से दूर दूर हों, फिर भी वो एक दूसरे के खैरख्वा होते है – जबकि मुनाफिकीन ख्वाह उन के वतन और नसब करीब करीब हों, लेकिन वो धोखेबाज कोम है जो एक दूसरे को भी धोका देने से बाज़ नहीं आते – लिहाजा हम अबू बक्र की बैत कर चुके है और वो हकीकतन इस खिलाफत के अहल है|

📚 कंज़ुल उम्माल फी सुनन अल-अक़वाल वल-अफ़्आल
जिल्द: 3 हिस्सा: 6 सफाह: 322
तालीफ़: अल्लामा बुरहानुद्दीन अली मुत्तकी बिन हुसामुद्दीन (मुतवफ़्फ़ा 975 हिजरी)
तरजुमा व तहकीक: मौलाना मुफ़्ती एहसानुल अशरफ़ अशरफ़ी साहिब

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