
*क्या आपको मालूम है नबी ए अकरमﷺ सबसे ज्यादा नाराज़ किस कबिले से थे…..?*
عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ، قَالَ: «كَانَ أَبْغَضَ الْأَحْيَاءِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَنُو أُمَيَّةَ، وَبَنُو حَنِيفَةَ، وَثَقِيفٌ
*सहाबी ए रसूल हज़रत अबू बरजाहرض* से रिवायत है आप फरमाते है के *रसूल अल्लाह* तमाम कबीलों में सबसे ज्यादा नाराज़ *बनू उमैय्या* से थे…. आप इन्हें ना पसंद फरमाया करते थे!!
📖मुस्तदरक 8482
जी हां!!आप ने ठीक पढ़ा…..
वो कबीला जिसकी मोहब्बत को कुछ नाम निहाद मुसलमान,कुछ नाम निहाद मौलवी जबरदस्ती आपके दिलों में,आपके अक़ीदो में शामिल करना चाहते हैं *वो कबीला बनू उमैय्या है के जिनसे रसूल अल्लाह ही सबसे ज्यादा नाराज़ हैं* और ना पसंद किया करते थे!
*लेकिन क्यों भाई…..?*
*हुज़ूर क्यों नाराज़ थे…..?*
तो आइए एक नज़र *कुरान ओ हदीस* की रोशनी में….!!
जिस कबिले ने *रसूल अल्लाह* से जंग ए बद्र जंग ए ओहद की वो बनू उमैय्या है!
जो कबीला *रसूल अल्लाह* को शहीद करना चाहता था वो बनू उमैय्या ही है!
*उम्मूल मोमिनिन हज़रत ए आयशाرض* ने फरमाया *कुरान* में सजरा ए ख़ब्बीसा जिस मलउन फर्द के बारे में नाज़िल हुई वो इसी खानदान बनू उमैय्या का!
ये मलउन इब्ने मलउन इब्ने मलउन है!
इस्लाम की सबसे पहली शहीदा *सहाबिया ए रसूल हज़रत ए सुमैयाرض* को बनू उमैय्या ने ही शहीद किया!
इस्लाम में मर्दों में सबसे पहले शहीद *सहाबी ए रसूल हज़रत यासिरرع* को कत्ल बनू उमैय्या ने किया!
*मुकद्दस सहाबी ए रसूल हज़रत बिलालرض* के साथ इसी बनू उमैय्या कबिले ने मार पीट की *इस्लाम* लाने की वज़ह से!
*मुकद्दस सहाबी ए रसूल और रसूल अल्लाह के चाचा हज़रत ए अमीर ए हमज़ाرض* को बनू उमैय्या ने कत्ल करवाया..!
वो कौन से कबिले की औरत थी जिसने *हज़रत अमीर हमज़ाرض* का सीना चाक करके उनके कलेजे को चबाया…..? यही बनू उमैय्या…!
वलीद इब्ने उकबा जो *रसूल अल्लाह के मुकद्दस सहाबा* को परेशान किया करता था और शराब पी कर नशे की हालत में नमाज़ पढ़ाता था वो बनू उमैय्या का ही है!
*जिनलोगों ने हज़रत ए आयशाرض* को जंग ए जमल करने उकसाया वो यही बनू उमैय्या है!
जिनलोगों ने *अहले बैत और सहाबाرض* के खिलाफ़ जंग ए सिफ़्फ़ीन की और हज़ारों *सहाबा* के कत्ल जैसे गुनाहे अज़ीम को अंजाम दिया वो यही बनू उमैय्या है!
शाम की लानती फौज ने *क़ाबे पर हमला किया काबे का ग़िलाफ जलाया…!* किसके कहने पर..? यही बनू उमैय्या के हुक्मरानों के कहने पर…!
सहिह बुखारी की हदीस में है मुकद्दस सहाबा में से एक *सहाबी ए रसूल हज़रत अम्मार इब्ने यासिरرض* के कातिल गिरोह को *रसूल अल्लाह* ने बागी और जहन्नमी गिरोह फरमाया….! वो कौन सा गिरोह था जो सामने था……? यही बनू उमैय्या!
*करबला में अहले बैत और सहाबाرض* का कातिल यजीद इब्ने माविया बनू उमैय्या से है!
कुफ़े में *रसूल के शहजादों* का कातिल उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद, यजीद इब्ने माविया के पहले तख्त पर बिठाया हुआ बनू उमैय्या का गर्वनर था!
शाम की लानती फौज ने *मदीने* पर हमला किया *हजारों सहाबा* को कत्ल किया *मस्ज़िद ए नब्वी* में अज़ान नहीं होने दी, *सहाबा की मुकद्दस औरतों* को फौज के लिए हलाल कर दिया, जिससे हज़ारों नाजायज बच्चे पैदा हुए….! किसके कहने पर…? यही बनू उमैय्या….!
सहिह मुस्लिम की हदीस है!
वो लोग जो मिम्बर पर बैठकर *रसूल अल्लाह और आल ए रसूल अल्लाह* पर लानत किया करते थे नौउज़बिल्लाह वो किसके गवर्नर थे……? यही बनू उमैय्या….!
*हज़रत अबू बक्र सिद्दीकرض* के दोनों बेटों के कातिल बनू उमैय्या है!
किसके कहने पर माविया इब्ने खुदैज ने *हज़रत अबू बक्र सिद्दीकرض* के शहजादे *हज़रत मुहम्मद इब्ने अबू बक्रرض* को कत्ल करके उनके जिस्म के हिस्से को गधे की लाश के साथ जलवाया….?
बनू उमैय्या के कहने पर….!!
अफ़सोस सद अफसोस!
*जिन्हें रसूल अल्लाह ने नापसंद फरमाया, जिनसे आप नाराज़ थे…..!*
*जिनलोगों ने रसूल अल्लाहﷺ से जंग की आपको शहीद करना चाहा…!*
*जिनलोगों ने अहले बैत से दुश्मनी की सहाबाرض से दुश्मनी की इन्हें कत्ल करवाया…..!*
आज इसी बनू उमैय्या की मोहब्बत को आपके दिलों ना सिर्फ जबरदस्ती शामिल करने की नापाक कोशिश हो रही है बल्कि इनकी मोहब्बत को ही ईमान का हिस्सा बताया जा रहा है…..!
इसी बनू उमैय्या के लोगों के नाम पर फातिहा लगाने को कहा जा रहा है! इन्हें जन्नती बताया जा रहा है!
इनलोगों का उर्स मनाने को कहा जा रहा है!
अस्तगफिरुल्लाह!! माज़अल्लाह!!!💔
*इससे बड़ी रसूल अल्लाह की,अहले बैत की सहाबाرض की गुस्ताखी क्या होगी….???*
*के जो इनका दुश्मन है, कातिल है उससे मोहब्बत करने को “सही अकीदे” का नाम दिया जा रहा है!!*
*अस्तगफिरुल्लाह!! माज़अल्लाह!!!* 💔💔
हम कभी तुम्हारे साथ इस गुस्ताखी में, इस लानत भरे काम में शामिल नहीं होने वाले….!
*हर सच्चे आशिक ए रसूलﷺ पर, हम गुलामाने मौला अली पर लाख फतवे लगालो हम नहीं डरने वाले और नाहीं दुश्मन ए रसूल,दुश्मन ए अहले बैत ओ सहाबा के सामने झुकने वाले है..!*
*हम आशिक ए रसूल* ….रसूल अल्लाह की सुन्नत पर अमल करके बनू उमैय्या से या इसके किसी भी फर्द से कभी मोहब्बत नहीं कर सकते, कभी इनलोगों को पसंद करके इनके नाम की फातिहा नियाज़ उर्स नहीं करेंगे….!
*जिस से रसूल अल्लाह नाराज़ उससे रसूलअल्लाहﷺ का उम्मति नाराज़ और सिर्फ़ इब्लिसل का उम्मति ही खुश होगा….!*
हमें दुनिया ओ आख़िरत में *रसूल अल्लाह और उनके घरवालों* से उम्मीदें हैं!
हम *सहाबा* के कातिलों के नाम के साथ कभी भी जन्नती जन्नती का नारा नहीं लगा सकते!!
ये *मुनाफिकत* हमसे ना हो पाएगी….
*के कातिल भी रज़ीअल्लाह और मक़तूल भी रज़ी अल्लाह…..!*
*हम वफादार,जानिसार सहाबी ए रसूल* पर अपनी *जान* फिदा करने वाले लोग कातिल ओ दुश्मन ए सहाबा से कभी मोहब्बत नहीं कर सकते…..!
मैं *रसूल अल्लाहﷺ* के तमाम सच्चे आशिकों से दरख्वास्त करूंगा…..
*ख़ुदारा मेरे मोमिन भाइयों हमारी एक एक बातों की खुद तहकीक करो किताबों को पढ़ो, कुरान ओ हदीस का इल्म हासिल करो वरना ये लोग तुम्हें दुश्मन ए रसूलﷺ बनाकर बर्बाद कर देंगे!!*
*हिदायत के हैं दो ही उसूल…!*
*किताब उल्लाह और आले रसूल!*

