
Prophet Ibrahim: Faith vs Fire | Documentary



*Hazrat Imaam Moosa Kazim Ke Mazar Mubarak Se Barkat Hasil Karna*
Nasir ul Sunnat Hazrat Imaam Abu Abdullah Muhammad Bin Idrees Almaroof Imaam Shafai Razi Allahu Tala Anhu Farmate Hain :- Hazrat Imaam Moosa Kazim Alahis Salam Ki Qabr e Anwar Dua’on Ki Qubooliyat Ke Liye Asar Daar Jagah Hain.
📚 *Reference* 📚
Ash’atul Lam’aat Shar’ha Mishkat ul Masabeeh, Jild 2, Safa 923.
Hazrat Shaikh Abdul Haq Muhaddis Dehlawi Rehmatullah Alaih.

*Hazrat Imaam Moosa Kazim Alahis Salam Ki Sakhawat*
*1.* Ek Martaba Kisi Ghulam Ne Hazrat Imaam Moosa Kazim Ko Halwe Ka Tohfa Pesh Kiya To Aapne Ghulam Ko Uske Halwe Wale Bartan Samait Ek Hazaar Deenar Me Kharid Liya Aur Phir Azad Karte Hue Wo Bartan Bhi Jis Me Halwa Mojood Tha Usi Ghulam Ko De Diya.
📚 *Reference* 📚
Al Bidayah wan Nihayah.
*2.* Hafiz Ibn Kaseer Likhte Hain Hazrat Imaam Moosa Kazim Bhut Zada Ibadat Karne Wale Aur Aala Akhlaaq Ke Hamil The, Jab Kisi Ke Bare Me Maloom Hota Ke Usne Unhe Takleef Pouchai Hain To Use Sona Ya Deegar Qeemti Taha’if Bhej Diya Karte The.
📚 *Reference* 📚
Al Bidayah wan Nihayah.

*Qaid Khane Me Hazrat Maula Imaam Moosa Kazim Ka Mamool*
Hazrat Imaam Moosa Kazim Alahis Salam Ka Qaid Khane Me Ye Mamool Tha Ke Jab Aap Isha Ki Namaz Padh Lete To Allah Ki Hamd o Sana Aur Dua Me Mashghool Ho Jate Hatta Ke Sari Raat Isi Haal Me Guzar Jati Phir Raat Ke Aakhri Hisse Me Khade Hokar Fajr Tak Namaz Padhte Rehte Phir Fajr Ki Namaz Ada Karte Aur Tulu e Shams Tak Zikr Me Masroof Ho Jate, Phir Chasht Ke Waqt Tak Baithe Rehte Baad Aza’n Uth Kar Miswak Karke Kuch Tanawul Farmate Phir Zawal Se Kuch Pehle Tak Aaram Karte Uske Bad Uth Kar Wuzu Karte Aur Zohar Se Asr Tak Namaz Me Mashghool Rehte, Asr Se Maghrib Ke Mabain Qibla Ki Janib Mutawajjah Hokar Zikr Karte Phir Maghrib Se Isha Tak Namaz Me Mashghool Ho Jate The.
📚 *Reference* 📚
Tahzib Al Kamal, Imaam Jamaluddin Abu Al Hajjaj Yusuf Imaam Al Mizzi, Safa 29.

Imam Musa Al Kazim ( علیہ السلام) Ko 15 Saal Tak Qaid Kiya Jiski wajha Se Aap 15 Saal Tak Suraj Ki Roshni Tak Dekh Na Sake.
Haroon Rashid Ne Qaid Khaane Mein Ek Shakhs Ko Moqarar Kiya Jiska Kaam Aapko Zaher Dena Tha . Aap 3 Din Zaher ki wajha Se Tadapte Rahe Aur 25th Rajab Ko Aap Shaheed Hogaye.
*_Imam Musa Kazim As Ki Shahadat Ba’Tarikh 25 Rajab Ul Mujarrab 183 Hijry Yom-E- Juma Ko Wake Huii Aap As Ki Umrr Us Waqt 55 Saal Ki Thi,,_*
_Janab Mirza Dabiri Kahte Hain_
*_Moula Par Intehaein Aseery Guzar Gayi_*
*_Zindan Ma Peeri Jawani Guzar Gayi_*
_Shahadat Ke Baad Lash-E- Mubarak Moula As Ko Qaid Khan-E- Se Nikal Kar Baggad Ke Pul Par Daal Gee Gaya,,_
*_Aur Nihayat Touheen Alfaaz Me Ap As Ko Aur Apke Manne Walo Ko Yaad Kiya Gaya_*
_Log Badasha Ke Khauf Se Numaya Tour Par Mazammat Ki Jurrat Na Karte The,,_
*_Taham Ek Giroh Ne Jiske Sardar Suleman Bin Jafar Ibn-E- Abi Jafar The,,_*
_Himmat Ki Aur Lash-E- Mubarak Dushman’O Se Chheen Kar Gusl’O Kafan Ka Band’O Bass Kiya,,_
*_2500 Ka Kimty Kafan Diya Moula As Ko Jispe Pura Qur’an Likha Hua’n Tha,,_*
_Nihayat Tuzo Wa Ahtisham Se Janaza-E- Musa Ibne Jafar As Lekar Chale In Logo’n Ke Gireban Gham-E- Imam-E- Musa Ibne Jafar Me Chaak The,,_
*_Ye Intehae’n Gham WA Alam Ke Sath Janaza-E- Musa Ibn-E- Jafar As Ko_* *_Lekar Kar Maqbara-E- Quraish Me Pahuche,,


*कभी दीवार हिलती है कभी दर काँप जाता है*
*अली का नाम सुनकर अब भी खैबर काँप जाता है*
*आइये आज यौमे-फतह-ख़ैबर के हवाले से बात करते हैं*
*ज्यादातर हम सिर्फ़ इतना ही जानते हैं की ख़ैबर की जंग हुई थी , लेकिन जंग क्यों हुई वज़ह क्या थी ? हम ये नही जानते हैं*,
*आपके सामने बेमिस्ल शुजाअत की तारीख battle of khaibar की documentary पेश करता हूँ* ,
*खैबर मदीना मुनव्वरा से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर की तरफ़ है*
*यह एक ऐसा इलाक़ा था जहाँ उस दौर में क़िलों* *(Fortresses) की बड़ी संख्या थी , आज उनके कुछ खंडरात बाक़ी हैं वो यहूद क़बीलों की बड़ी बस्तियाँ थीं*
*जंग-ए-खैबर के सबसे बड़े कारण ये थे*
*उनकी मुस्लिम विरोधी साज़िशें और गठजोड़*
*खैबर के यहूद क़बीले*
*बनी नज़ीर*
*बनी कुरैज़ा*
*बनी कैनुक़ा*
*इनमें से कुछ क़बीलों को मदीना से निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने बार-बार मदीने में (षड्यंत्र)साज़िशें कीं मुनाफ़िक़ों के साथ मिलकर , रसूल अल्लाह के ख़िलाफ़ प्लान बनाए और कुफ़्फ़ार-ए-कुरैश को मुस्लिमों के खिलाफ उकसाया*
*ग़ज़वा-ए-अहज़ाब (खंदक)के दौरान खैबर के यहूद ने मक्का के कुरैश ,ग़त़फ़ान क़बीला और दूसरे क़बीलों को मुसलमानों पर हमला करने के लिए जमा किया था। यानी खैबर साज़िश का केंद्र बना हुआ था*।
*मदीना की सुरक्षा का मसला था*
*मदीना के आसपास दो इलाक़े थे-खैबर (उत्तर) मक्का (दक्षिण) कुरैश दक्षिण से खतरा थे और यहूद उत्तर से थे ।इसलिए खैबर की तरफ़ से सुरक्षा ज़्यादा ज़रूरी थी*
*क्योंकि खैबर के यहूद अक्सर मदीना की जमीनों पर छापे मारते क़त्ल और लूट-पाट करते लोगों को भड़काते षड्यंत्र करते और यही कारण उनसे सीधी जंग की वजह बन गया*।
*रसूल अल्लाह 1600 से ज़्यादा अपने असहाब को ले कर खैबर की तरफ़ कूच किया जब यहूद क़बीलो को ये ख़बर मिली तो वो अपने मज़बूत क़िलों में बंद हो गए , खैबर में 8 से 10 बड़े क़िले थे हर क़िला मजबूत, ऊँचा और हथियारों से लैस था इसलिए वहाँ ये लड़ाई हफ्तों तक चली और फ़तह हाथ नही आ रही थी*
*कभी आवारा-ओ-बे-ख़ान’माँ इश्क़*
*कभी शाहे शहाँ नौशेरवां इश्क़*
*कभी मैदां में आता है ज़रहपोश*
*कभी उरयान-ओ-बेतेग़-ओ-सिनाँ इश्क़*
*कभी तन्हाई-ए-कोहो दमन इश्क़*
*कभी* *सोज़-ओ-सुरूर-ओ-अंजुमन इश्क़*
*कभी* *सरमाया-ओ-महराब-ओ-मिम्बर*
*कभी मौला अली ख़ैबर शिकन इश्क़*!
*फिर आक़ा व मौला नबी करीम (सल्लालाहु अलैही वा आलैही वसल्लम) ने फ़रमाया-*
*“कल मैं ऐसे शख़्स के हाथ में झंडा (अलम) दूँगा,जिसके हाथों अल्लाह फ़त्ह़ देगा, वह अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है और अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं*।”
*सारी रात बहुत से रसूल अल्लाह के असहाब फ़िक्र में थे कल झंडा किसे मिलेगा कौन होगा वो? और अगले दिन*
*शेरे खुदा , हैदर-ए-क़र्रार , हज़रत अली अल मुर्तज़ा को झंडा दिया गया*।
*सही मुस्लिम हदीस 6222 पर ये” हदीस मौजूद है 👆*
*खैबर के सबसे मशहूर और सबसे मज़बूत क़िला क़मूस के सामने झंडा हज़रत अली को दिया गया और अल्लाह ने उसी दिन फ़तह नसीब फ़रमाई “हैदर-ए-क़र्रार ने दरे ख़ैबर उखाड़ फैका”*
*“शाह-ए-मरदान, शेर-ए-यज़दान, क़ुव्वत-ए-परवरदिगार ला फ़ता इल्ला अली, ला सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िकार”*
*शाह-ए-मरदान = बहादुरों के बादशाह*
*शेर-ए-यज़दान = अल्लाह का शेर*
*क़ुव्वत-ए-परवरदिगार = अल्लाह की दी हुई ताक़त*
*ला फ़ता इल्ला अली = अली के बराबर कोई बहादुर नहीं*
*ला सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िकार = ज़ुल्फ़िकार जैसी कोई तलवार नहीं*

*क्या आपको मालूम है नबी ए अकरमﷺ सबसे ज्यादा नाराज़ किस कबिले से थे…..?*
عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ، قَالَ: «كَانَ أَبْغَضَ الْأَحْيَاءِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَنُو أُمَيَّةَ، وَبَنُو حَنِيفَةَ، وَثَقِيفٌ
*सहाबी ए रसूल हज़रत अबू बरजाहرض* से रिवायत है आप फरमाते है के *रसूल अल्लाह* तमाम कबीलों में सबसे ज्यादा नाराज़ *बनू उमैय्या* से थे…. आप इन्हें ना पसंद फरमाया करते थे!!
📖मुस्तदरक 8482
जी हां!!आप ने ठीक पढ़ा…..
वो कबीला जिसकी मोहब्बत को कुछ नाम निहाद मुसलमान,कुछ नाम निहाद मौलवी जबरदस्ती आपके दिलों में,आपके अक़ीदो में शामिल करना चाहते हैं *वो कबीला बनू उमैय्या है के जिनसे रसूल अल्लाह ही सबसे ज्यादा नाराज़ हैं* और ना पसंद किया करते थे!
*लेकिन क्यों भाई…..?*
*हुज़ूर क्यों नाराज़ थे…..?*
तो आइए एक नज़र *कुरान ओ हदीस* की रोशनी में….!!
जिस कबिले ने *रसूल अल्लाह* से जंग ए बद्र जंग ए ओहद की वो बनू उमैय्या है!
जो कबीला *रसूल अल्लाह* को शहीद करना चाहता था वो बनू उमैय्या ही है!
*उम्मूल मोमिनिन हज़रत ए आयशाرض* ने फरमाया *कुरान* में सजरा ए ख़ब्बीसा जिस मलउन फर्द के बारे में नाज़िल हुई वो इसी खानदान बनू उमैय्या का!
ये मलउन इब्ने मलउन इब्ने मलउन है!
इस्लाम की सबसे पहली शहीदा *सहाबिया ए रसूल हज़रत ए सुमैयाرض* को बनू उमैय्या ने ही शहीद किया!
इस्लाम में मर्दों में सबसे पहले शहीद *सहाबी ए रसूल हज़रत यासिरرع* को कत्ल बनू उमैय्या ने किया!
*मुकद्दस सहाबी ए रसूल हज़रत बिलालرض* के साथ इसी बनू उमैय्या कबिले ने मार पीट की *इस्लाम* लाने की वज़ह से!
*मुकद्दस सहाबी ए रसूल और रसूल अल्लाह के चाचा हज़रत ए अमीर ए हमज़ाرض* को बनू उमैय्या ने कत्ल करवाया..!
वो कौन से कबिले की औरत थी जिसने *हज़रत अमीर हमज़ाرض* का सीना चाक करके उनके कलेजे को चबाया…..? यही बनू उमैय्या…!
वलीद इब्ने उकबा जो *रसूल अल्लाह के मुकद्दस सहाबा* को परेशान किया करता था और शराब पी कर नशे की हालत में नमाज़ पढ़ाता था वो बनू उमैय्या का ही है!
*जिनलोगों ने हज़रत ए आयशाرض* को जंग ए जमल करने उकसाया वो यही बनू उमैय्या है!
जिनलोगों ने *अहले बैत और सहाबाرض* के खिलाफ़ जंग ए सिफ़्फ़ीन की और हज़ारों *सहाबा* के कत्ल जैसे गुनाहे अज़ीम को अंजाम दिया वो यही बनू उमैय्या है!
शाम की लानती फौज ने *क़ाबे पर हमला किया काबे का ग़िलाफ जलाया…!* किसके कहने पर..? यही बनू उमैय्या के हुक्मरानों के कहने पर…!
सहिह बुखारी की हदीस में है मुकद्दस सहाबा में से एक *सहाबी ए रसूल हज़रत अम्मार इब्ने यासिरرض* के कातिल गिरोह को *रसूल अल्लाह* ने बागी और जहन्नमी गिरोह फरमाया….! वो कौन सा गिरोह था जो सामने था……? यही बनू उमैय्या!
*करबला में अहले बैत और सहाबाرض* का कातिल यजीद इब्ने माविया बनू उमैय्या से है!
कुफ़े में *रसूल के शहजादों* का कातिल उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद, यजीद इब्ने माविया के पहले तख्त पर बिठाया हुआ बनू उमैय्या का गर्वनर था!
शाम की लानती फौज ने *मदीने* पर हमला किया *हजारों सहाबा* को कत्ल किया *मस्ज़िद ए नब्वी* में अज़ान नहीं होने दी, *सहाबा की मुकद्दस औरतों* को फौज के लिए हलाल कर दिया, जिससे हज़ारों नाजायज बच्चे पैदा हुए….! किसके कहने पर…? यही बनू उमैय्या….!
सहिह मुस्लिम की हदीस है!
वो लोग जो मिम्बर पर बैठकर *रसूल अल्लाह और आल ए रसूल अल्लाह* पर लानत किया करते थे नौउज़बिल्लाह वो किसके गवर्नर थे……? यही बनू उमैय्या….!
*हज़रत अबू बक्र सिद्दीकرض* के दोनों बेटों के कातिल बनू उमैय्या है!
किसके कहने पर माविया इब्ने खुदैज ने *हज़रत अबू बक्र सिद्दीकرض* के शहजादे *हज़रत मुहम्मद इब्ने अबू बक्रرض* को कत्ल करके उनके जिस्म के हिस्से को गधे की लाश के साथ जलवाया….?
बनू उमैय्या के कहने पर….!!
अफ़सोस सद अफसोस!
*जिन्हें रसूल अल्लाह ने नापसंद फरमाया, जिनसे आप नाराज़ थे…..!*
*जिनलोगों ने रसूल अल्लाहﷺ से जंग की आपको शहीद करना चाहा…!*
*जिनलोगों ने अहले बैत से दुश्मनी की सहाबाرض से दुश्मनी की इन्हें कत्ल करवाया…..!*
आज इसी बनू उमैय्या की मोहब्बत को आपके दिलों ना सिर्फ जबरदस्ती शामिल करने की नापाक कोशिश हो रही है बल्कि इनकी मोहब्बत को ही ईमान का हिस्सा बताया जा रहा है…..!
इसी बनू उमैय्या के लोगों के नाम पर फातिहा लगाने को कहा जा रहा है! इन्हें जन्नती बताया जा रहा है!
इनलोगों का उर्स मनाने को कहा जा रहा है!
अस्तगफिरुल्लाह!! माज़अल्लाह!!!💔
*इससे बड़ी रसूल अल्लाह की,अहले बैत की सहाबाرض की गुस्ताखी क्या होगी….???*
*के जो इनका दुश्मन है, कातिल है उससे मोहब्बत करने को “सही अकीदे” का नाम दिया जा रहा है!!*
*अस्तगफिरुल्लाह!! माज़अल्लाह!!!* 💔💔
हम कभी तुम्हारे साथ इस गुस्ताखी में, इस लानत भरे काम में शामिल नहीं होने वाले….!
*हर सच्चे आशिक ए रसूलﷺ पर, हम गुलामाने मौला अली पर लाख फतवे लगालो हम नहीं डरने वाले और नाहीं दुश्मन ए रसूल,दुश्मन ए अहले बैत ओ सहाबा के सामने झुकने वाले है..!*
*हम आशिक ए रसूल* ….रसूल अल्लाह की सुन्नत पर अमल करके बनू उमैय्या से या इसके किसी भी फर्द से कभी मोहब्बत नहीं कर सकते, कभी इनलोगों को पसंद करके इनके नाम की फातिहा नियाज़ उर्स नहीं करेंगे….!
*जिस से रसूल अल्लाह नाराज़ उससे रसूलअल्लाहﷺ का उम्मति नाराज़ और सिर्फ़ इब्लिसل का उम्मति ही खुश होगा….!*
हमें दुनिया ओ आख़िरत में *रसूल अल्लाह और उनके घरवालों* से उम्मीदें हैं!
हम *सहाबा* के कातिलों के नाम के साथ कभी भी जन्नती जन्नती का नारा नहीं लगा सकते!!
ये *मुनाफिकत* हमसे ना हो पाएगी….
*के कातिल भी रज़ीअल्लाह और मक़तूल भी रज़ी अल्लाह…..!*
*हम वफादार,जानिसार सहाबी ए रसूल* पर अपनी *जान* फिदा करने वाले लोग कातिल ओ दुश्मन ए सहाबा से कभी मोहब्बत नहीं कर सकते…..!
मैं *रसूल अल्लाहﷺ* के तमाम सच्चे आशिकों से दरख्वास्त करूंगा…..
*ख़ुदारा मेरे मोमिन भाइयों हमारी एक एक बातों की खुद तहकीक करो किताबों को पढ़ो, कुरान ओ हदीस का इल्म हासिल करो वरना ये लोग तुम्हें दुश्मन ए रसूलﷺ बनाकर बर्बाद कर देंगे!!*
*हिदायत के हैं दो ही उसूल…!*
*किताब उल्लाह और आले रसूल!*