
हज़रत ख़ुजेमा बिन साबित रदी अल्लाहू अनहू
जंग-ए-जमल और सिफ़्फ़ीन दोनों में शामिल थे, लेकिन किसी पर तलवार नहीं चलाई।
लेकिन जब जंग-ए-सिफ़्फ़ीन में मुआविया के गिरोह के हाथों हज़रत अम्मार की शहादत हुई, तो उन्होंने कहा:
“अब गुमराह गिरोह मेरे लिए ज़ाहिर हो गया है।”
यह कहकर इमाम अली अलैहिस्सलाम की तरफ से लड़ने लगे और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए।
मोहम्मद बिन अम्मारह कहते हैं कि मेरे दादा हज़रत खुज़ैमा रदी अल्लाहू अनहू ने जंग-ए-जमल के दिन अपनी तलवार म्यान में रखी, लेकिन जंग-ए-सिफ़्फ़ीन में जब हज़रत अम्मार रदी अल्लाहू अनहू शहीद हो गए, तो उन्होंने अपनी तलवार म्यान से निकाल ली और इतना लड़े कि आख़िरकार शहीद हो गए। वह कहते थे कि मैंने नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को यह फरमाते हुए सुना है कि “अम्मार को एक बाग़ी गिरोह क़त्ल करेगा।”
हज़रत मुहम्मद सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम ने एक बद्दू से घोड़ा ख़रीदा। आपने अभी पैसे नहीं दिए थे कि बद्दू ने किसी और से क़ीमत तय कर ली और रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम के मांगने पर जवाब दिया कि मैंने घोड़ा आपके हाथ नहीं बेचा।
रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम ने फरमाया कि मैं तुमसे खरीद चुका हूँ। जिस पर उस बद्दू ने कहा कि “गवाह लाइए।”
इस पर और सभी मुसलमान तो ख़ामोश रहे, लेकिन खुज़ैमा ने आगे बढ़कर कहा: “मैं गवाह हूँ कि तुमने रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम के हाथ घोड़ा बेचा है।”
चूंकि सौदा करते वक्त खुज़ैमा वहाँ मौजूद नहीं थे, इसलिए रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम ने उनसे पूछा कि “तुम किस तरह गवाही देते हो?”
उन्होंने कहा कि “मैं आपकी बात की तस्दीक़ करता हूँ।”
इस पर रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम ने खुश होकर उन्हें “ज़ुश शहादतैन” का लक़ब दिया। यानी उनकी गवाही को दो लोगों की गवाही के बराबर कर दिया।
आपने रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम की 388 हदीसें बयान की हैं जो हदीसों की किताबों में मौजूद हैं।
हवाला जात
* इब्न साद, अत-तबाक़ातुल कुबरा, बैरुत, जि 3, सफ़ा 259
* मुस्नद अहमद: जिल्द 9: हदीस नंबर 1942
* सुनन नसई: जिल्द 3: हदीस नंबर 956
नोट _ जिस शख्स कि गवाही को मौला मुहम्मद सल्ला अल्लाहू अलैहि वा आलिही वसल्लम ने दो ग्वाह के बराबर रखा,,, जंग ए सिफ़्फ़ीन में हज़रत अम्मार यासिर रदी अल्लाहू अनहू के शहीद हो जाने के बाद खुजैमा रदी अल्लाहू अनहू को तो समझ आ गया अमीर ए शाम का गिरोह गुमराह है और फिर मौला अली अलैहिस्सलाम कि तरफ़ से लड़ते हुए शहीद हो गए
अल्लाह हुम्मा सल्ली अला मुहम्मदﷺ वा आले मुहम्मदﷺ ❤️

