
🔹 हदीस और हज़रत अली का दर्द भरा सवाल 🔹
हज़रत मुहम्मद ﷺ रोने लगे ,,, मौला अली अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया:
“या रसूलल्लाह ﷺ! आप क्यों रो रहे हैं?”
हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया:
” उस बुग्ज की वजह से जो लोगों के सीनों में तेरे लिए है जिसका इज़हार मेरे बाद करेंगे ।”
हज़रत अली ( अलैहिस्सलाम) ने फिर अर्ज़ किया:
“या रसूलल्लाह ﷺ! क्या मेरा दीन सलामत रहेगा ?”
रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
“हाँ! आपका दीन सलामत रहेगा।”
📚 मसनद अबू याला, हदीस 561 / मसनद इमाम अहमद: जिल्द 1, सफ़ा 119, 118 / मुजम अल-अउसत: हदीस 2205
नोट_ सवाल ये है उस वक्त कौन लोग हयात थे कौन बाद में बुग्ज जाहिर करने वाले थे याद रहे अगर काफ़िर थे तो उन्हें दिल ही दिल में हुज़ूर ﷺ के हयात में बुग्ज रखने कि जरूरत नहीं थी यक़ीनन वो कलमा पढ़ने वाले ही लोग थे फिर कहते है कि मौला अली अलैहिस्सलाम से कोई बुग्ज नहीं रखता था




