हदीस ए गदीर को छिपाने का अंजाम..

हदीस ए गदीर को छिपाने का अंजाम..

✍️ इमाम इब्ने असीर जज़री ने ‘उस्दुल गाबा फी मआरिफतुस् सहाबा’ की तीसरी जिल्द में सहाबिए रसूल हजरत अब्दुर्रहमान बिन मुदलिज़ के हालात में लिखा है कि-
قال أبو إسحاق : وحدثني من لا أحصي :
أن علياً نشد الناس في الرَّحْبَة : مَنْ سَمِعَ قول رسول الله ﷺ :[مَنْ كُنْتُ مَوْلاهُ فَعَلِيَّ مَوْلاهُ، اللَّهُمْ وَالِ مَنْ والاهُ وَعَادِ مَنْ عاداه] فقام نفر شهدوا أنهم سمعوا ذلك من رسول الله ﷺ ، وكتم قوم ، فما خرجوا من الدنيا حتى عموا، وأصابتهم آفة، منهم : يزيد بن وديعة ، وعبد الرحمن بن مدلج.

यानि ‘अबू इस्हाक़ ने कहा है कि मुझसे बेशुमार लोगों ने बयान किया कि : हजरत अली ने लोगों को कूफा के मैदान में कसम देकर पूछा कि- किन लोगों ने रसूल-अल्लाह सल्ल० का यह फ़रमान सुना कि :
مَنْ كُنْتُ مَوْلاهُ فَعَلِيَّ مَوْلاهُ، اللَّهُمْ وَالِ مَنْ والاهُ وَعَادِ مَنْ عاداه.
‘मैं जिसका मौला हूं, अली उसका मौला है। ऐ अल्लाह, जो इससे मोहब्बत रखें तू उससे मोहब्बत रख और जो इससे दुश्मनी रखें तू उससे दुश्मनी रख।”
कुछ लोग खड़े हो गयें और गवाही दी कि [हमनें] इसको रसूल-अल्लाह सल्ल० से सुना है और कुछ आदमियों ने इसको छुपाया [इस नतीजे में छिपाने वालों की यह हालत हुई] कि दुनिया में अंधे हो गयें और इनको कोई आफत [जरुर] पहुंची।
इनमें [यानि जिन्होंने इस खबर को छिपाया]  से यजीद बिन वदयह और अब्दुर्रहमान बिन मुदलिज़ भी थे।’

आप खुद आनलाइन पीडीएफ में सफा 445 पर देखें 👇
https://archive.org/details/UsdulGhabahFiMarifat-us-Sahabahr.aByShaykhIbnAthirUrduTranslation/UsdulGhabahFiMarifat-us-Sahabahr.a-volume2-ByShaykhIbnAthirUrduTranslationByShaykhMuhammadAbdushShakoorFarooqiLakhnavir.a/page/n445/mode/1up?view=theater
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अल्लामा गुलाम रसूल सईदी और काई लोगों ने इस बात का इकरार किया है कि मौला अली अलैहिस्सलाम के बारे में रसूल-अल्लाह सल्ल० के इस फरमान को सहाबा किराम छिपाने पर मुत्तफिक हो गये थे , देखें 👇
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