रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलयहे व आलेही व सल्लम के बाद किसकी फ़ज़ीलत सबसे ज़्यादा है

*रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलयहे व आलेही व सल्लम के बाद किसकी फ़ज़ीलत सबसे ज़्यादा है*❓


चलिए हम इस बात का पता हुज़ूर पाक स अ व स की एक हदीस से ही लगा लेते हैं जो अहलेसुन्नत की मशहूर किताब अल मुस्तद्रक हाकिम में वारिद हुई है👉

حَدَّثَنَا لُؤْلُؤُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْمُقْتَدِرِيُّ، فِي قَصْرِ الْخَلِيفَةِ بِبَغْدَادَ، ثنا أَبُو الطَّيِّبِ أَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الْوَهَّابِ الْمِصْرِيُّ، بِدِمَشْقَ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ عِيسَى الْخَشَّابُ، بِتِنِّيسَ، ثنا عَمْرُو بْنُ أَبِي سَلَمَةَ، ثنا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ، عَنْ بَهْزِ بْنِ حَكِيمٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَمُبَارَزَةُ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ لِعَمْرِو بْنِ عَبْدِ وُدٍّ يَوْمَ الْخَنْدَقِ أَفْضَلُ مِنْ أَعْمَالِ أُمَّتِي إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ»
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4327 – قبح الله رافضيا افتراه

حضرت بہز بن حکیم اپنے والد سے ، وہ ان کے دادا سے روایت کرتے ہیں کہ رسول اللہ ﷺ نے ارشاد فرمایا : جنگ خندق کے دن حضرت علی ابن ابی طالب رضی اللہ عنہ کا عمرو بن عبد ود کو جنگ کیلئے پکارنا قیامت تک میری امت کے تمام اعمال سے افضل ہے ۔

غزوہ اور جہاد کی کتاب#4327

तर्जुमा👉
*हज़रत बहज़ बिन हाकिम अपने वालिद से ,वो उनके दादा से रिवायत करते हैं कि रसूलअल्लाह स अ व स ने इरशाद फ़रमाया : “जंगे खन्दक के दिन हज़रत अली इब्ने अबुतालिब अस का उमरू बिन अब्दुवद को जंग के लिए पुकारना क़यामत तक मेरी उम्मत के तमाम आमाल से अफ़ज़ल है।”*
*(अल्लाह हो अकबर)*

किसी भी शख्स की फ़ज़ीलत उसके आमाल से ही नापी जाती है कि उसका मर्तबा अल्लाह और उसके रसूल की नज़र में क्या है? अगर आमाल अच्छे हैं तो वो बफज़ीलत शख्सियत मानी जाती है और अगर उसके आमाल कम या बेकार हों तो वो बेफज़िलत शख्सियत मानी जाती है।

हुज़ूर अलैहिस्सलाम की उम्मत जिसमे तमाम सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुमा अजमाइन भी आ गए,ताबेईन और तबे ताबेईन भी आ गए मतलब हर वो फ़र्द इस क़ौल में शामिल हो गया जो रसूलअल्लाह अलैहिस्सलाम का उम्मती है, उन सब के तमाम आमाल एक तरफ़ और हज़रत अली के पूरे आमाल नही बल्कि एक अमल एक तरफ़(अल्लाह हो अकबर)! बल्कि यह कहने दीजिए कि कमो बेश सवा लाख असहाबे नबी के तमाम ज़िंदगी के तमाम आमाल से हज़रत अली अस का एक दिन का सिर्फ़ एक अमल अफ़ज़ल हो गया तो हज़रत अली की पूरी ज़िंदगी के पूरे आमाल का क्या मुक़ाम होगा?? अल्लाह ही जाने या अल्लाह के रसूल अलैहिस्सलाम जाने !

*अब मुझे यहाँ ये समझाने की ज़रूरत तो नही है कि हुज़ूर पाक के बाद इस तमाम उम्मत में सबसे बड़ा अहम आला मर्तबा किस का है ??*

*मनकुंतो मौला फ़हज़ा अली उन मौला…. अली मौला…. अली मौला*

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