चौदह सितारे हज़रत इमाम अबु जाफ़र हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी(अ.स) पार्ट- 7

हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी (अ.स.) के बाज़ करामात

साहबे तफ़सीर हुसैनी अल्लामा हुसैन वाएज़ काशफ़ी का बयान है कि हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी (अ.स.) के करामात बेशुमार हैं।(रौज़तुल शोहदा पृष्ठ 438 ) में बाज़ तज़केरा मुख़्तलिफ़ कुतुब से करता हूँ।

अल्लाम अब्दुरर्रहमान जामी तहरीर फ़रमाते हैं कि 1. मामून रशीद के इन्तेक़ाल के बाद हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी (अ.स.) ने इरशाद फ़रमाया कि अब तीस माह बाद मेरा भी इन्तेक़ाल होगा , चुनान्चे ऐसा ही हुआ।

2. एक शख़्स ने आपकी खि़दमत में हाज़िर हो कर अर्ज़ किया कि एक मुसम्मता (उम्मुल हसन) ने आपसे दरख़्वास्त की है कि अपना कोई जामये कुहना (पुराने कपड़े) दीजिए ताकि मैं उसे कफ़न में रखूं। आपने फ़रमाया कि अब जामेय कुहना की ज़रूरत नहीं है। रावी का बयान है कि मैं वह जवाब ले कर जब वापस हुआ तो मालूम हुआ कि 13 14 दिन हो गए हैं वह इन्तेक़ाल कर चुकी है।

3. एक शख़्स उमय्या बिन अली कहता है कि मैं और हमाद बिन ईसा एक सफ़र में जाते हुए हज़रत की खि़दमत में हाज़िर हुए ताकि एक से रूख़सत हो लें , आपने इरशाद फ़रमाया कि , तुम आज अपना सफ़र मुलतवी करो , चुनान्चे हस्बे अल हुक्म ठहर गया , लेकिन मेरे साथी हमाद बिन ईसा ने कहा कि मैंने सारा सामाने सफ़र घर से निकाल रखा है अब अच्छा नहीं मालूम होता है कि सफ़र मुलतवी करूँ , यह कह कर वह रवाना हो गया और चलते चलते रात को एक वादी में जा पहुँचा और वहीं क़याम किया , रात के किसी हिस्से में एक अज़ीमुश्शान सेलाब आ गया और वह तमाम लोगों के साथ हमाद को भी बहा ले गया।(शवाहेदुन नबूवत पृष्ठ 202 )

4. अल्लामा अरबली तहरीर फ़रमाते हैं कि मिम्बर बिन ख़लाद का बयान है कि एक दिन मदीना मुनव्वरा में जब कि आप बहुत कमसिन थे मुझसे फ़रमाया कि चलो मेरे हमराह , चुनान्चे मैं साथ हो गया , हज़रत ने मदीने से बाहर एक वादी में जा कर मुझ से फ़रमाया कि तुम ठहरो मैं अभी आता हूँ , चुनान्चे आप नज़रों से ग़ायब हो गए और थोड़ी देर बाद वापस हुए , वापसी पर आप बेइन्तेहा मलूल और रंजीदा थे , मैंने पूछा फ़रज़न्दे रसूल (स अ व व ) आपके चेहरा ए मुबारक से आसारे हुज़न व मलाल हुवैदा हैं। इरशाद फ़रमाया ! कि इसी वक़्त बग़दाद से वापस आ रहा हूँ वहां मेरे वालिदे माजिद हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) ज़हर से शहीद कर दिये गए हैं , मैं उन पर नमाज़ वग़ैरा अदा करने गया था।

5. क़ासिम बिन अब्दुर्रमान का बयान है कि बग़दाद में मैंने देखा किसी शख़्स के पास बराबर लोग आते जाते हैं और मैंने दरियाफ़्त किया कि जिसके पास आने जाने का ताता बंधा हुआ है यह कौन है ? लोगों ने कहा कि अबू जाफर बिन अली (अ.स.) हैं , अभी यह बातें हो ही रहीं थी कि आप नाक़े पर सवार उस तरफ़ से गुज़रे , क़ासिम कहता है कि उन्हें देख कर मैंने दिल में कहा कि लोग बड़े बेवकूफ़ हैं जो आपकी इमामत के क़ाएल हैं और आपकी इज़्ज़त व तौक़ीर करते हैं , यह तो बच्चे हैं और मेरे दिल मे इनकी कोई वक़त महसूस नहीं होती। मैं अपने दिल मे यही सोच रहा था कि आप ने क़रीब आ कर फ़रमाया कि , ऐ क़ासिम बिन अब्दुर्रहमान ! जो शख़्स हमारी इताअत से गुरेज़ाँ हैं वह जहन्नम में जायेगा। आपके इस फ़रमाने पर मैंने ख़्याल किया कि यह जादूगर हैं कि इन्होंने मेरे दिल के इरादे को मालूम कर लिया है। जैसे ही यह ख़्याल मेरे दिल में आया , आपने फ़रमाया कि तुम्हारा ख़्याल बिल्कुल ग़लत है तुम अपने अक़ीदे की इस्लाह करो। यह सुन कर मैंने आपकी इमामत का इक़रार किया और मुझे मानना पड़ा कि आप हुज्जतुल्लाह हैं।

6. क़ासिम इब्नुल हसन का बयान है कि मैं एक सफ़र में था , मक्का और मदीना के दरमियान एक मफ़लूक़ुल हाल ने मुझसे सवाल किया , मैंने उसे रोटी का एक टुकड़ा दे दिया। अभी थोड़ी देर गुज़री थी कि एक ज़बर दस्त आंधी आई और वह मेरी पगड़ी उड़ा ले गई। मैंने बड़ी तलाश की लेकिन वह दस्तयाब न हुई। जब मैं मदीने पहुँचा और हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी (अ.स.) से मिलने गया तो आपने फ़रमाया , ऐ क़ासिम ! तुम्हारी पगड़ी हवा उड़ा ले गई। मैंने अर्ज़ कि जी हुज़ूर। आपने अपने ग़ुलाम को हुक्म दिया कि इनकी पगड़ी ले आओ। ग़ुलाम ने पगड़ी हाज़िर की। मैंने बड़े ताज्जुब से दरियाफ़्त किया कि मौला ! यह पगड़ी यहां कैसे पहुँची ? आपने फ़रमाया तुमने जो राहे ख़ुदा में रोटी का टुकड़ा दिया था , उसे ख़ुदा ने क़ुबूल फ़रमा लिया है। ऐ क़ासिम ! ख़ुदा वन्दे आलम यह नहीं चाहता कि जो उसकी राह में सदक़ा दे वह उसे नुक़सान पहुँचने दे।

7. उम्मुल फ़ज़ल ने हज़रत इमाम मोहम्मद तक़ी (अ.स.) की शिकायत अपने वालिद मामून रशीद अब्बासी को लिख कर भेजी , कि अबू जाफ़र मेरे होते हुए दूसरी शादी भी कर रहे हैं। उसने जवाब दिया कि मैंने तेरी शादी इस लिये नहीं की कि हलाले ख़ुदा को हराम कर दूँ। उन्हें क़ानूने ख़ुदा वन्दी इजाज़त देता है वह दूसरी शादी करें इसमें तेरा क्या दख़ल है। आइन्दा से इस क़िस्म की कोई शिकायत न करना और सुन तेरा फ़रीज़ा है कि तू अपने शौहर अबू जाफ़र को जिस तरह हो राज़ी रख। इस तमाम ख़तो किताबत की इत्तेला हज़रत को हो गई।(कशफ़ुल ग़म्मा पृष्ठ 120 )

अल्लामा शेख़ हुसैन बिन अब्दुल वहाब तहरीर फ़रमाते हैं कि एक दिन उम्मुल फ़ज़ल ने हज़रत (अ.स.) की एक बीवी को जो अम्मार यासीर की नस्ल से थीं , देखा तो मामून रशीद को कुछ इस अन्दाज़ से कहा कि वह हज़रत के क़त्ल पर आमादा हो गया मगर क़त्ल न कर सका।(अयुनूल मोजिज़ात पृष्ठ 154 प्रकाशित मुलतान)

Razes (Al-Razi)

In the 9th century, Baghdad was one of the most advanced cities in the world, especially in science and medicine. Razes (Al-Razi), a famous Persian scholar and physician, was tasked with picking a site for a new hospital in the city. Hospitals back then, called Bimaristans, weren’t just places to treat the sick; they were also centers for learning and research. Razes was known for his hands-on approach and innovative thinking, so he needed to make sure the hospital was built in a location that would keep patients as healthy as possible.

To figure out the best spot, Razes came up with a rather unusual test. He hung pieces of meat at different locations around Baghdad and watched how quickly they rotted. The location where the meat rotted the slowest was chosen for the hospital. His reasoning? The slower the decay, the cleaner the air, and the healthier the environment for patients. While today it might sound like an odd way to pick a spot for a hospital, it shows how Razes was thinking about factors like air quality and hygiene, long before those ideas became common knowledge.

Razes’ method might seem strange, but it was actually an early attempt to make sure that the hospital would be in a safe and healthy environment for people. His approach was part of a broader movement in the Islamic world at the time, where scholars were making huge advances in medicine, hygiene, and public health. Though today, we wouldn’t hang meat to test air quality, Razes’ thinking was years ahead of its time, helping lay the groundwork for modern hospitals and health standards.