विलायत को कुबूल करना

इब्ने अब्बास (रजीअल्लाहु अन्हू) सूरह यूनुस, आयत 25 की तफ़सीर बयान करते हैं 👇

وَ اللّٰهُ یَدْعُوْۤا اِلٰی دَارِ السَّلٰمِ ؕ وَ یَهْدِیْ مَنْ یَّشَآءُ اِلٰی صِرَاطٍ مُّسْتَقِیْمٍ۝
(10 वीं सूरह यूनुस, आयत 25)

वल्लाहु यद्अू इला दारिस्सलामि, व यह़्दी मंय्यशा-उ इला सिरातिम्-मुस्तक़ीम

और अल्लाह ﷻ तो आराम के घर (जन्नत/स्वर्ग) की तरफ़ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधी राह चलाता है

اور اللہ سلامتی کے گھر (جنت) کی طرف بلاتا ہے، اور جسے چاہتا ہے سیدھی راہ کی طرف ہدایت فرماتا ہے

यानी अली इब्ने अबीतालिब عَلَیهِ‌السَّلام की विलायत को कुबूल करने से है।

📚 ऐहले’सुन्नत हवाला: शवाहिद अल-तंज़ील (हाफ़िज़ अल-हस्क़नी), सफ़ाह नम्बर 263, हदीस 358

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