चौदह सितारे इमामे जाफ़रे सादिक़ (अ.स) पार्ट- 14

17322047060618166610269903296351

इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) और दरबार के शेर

एक दिन का ज़िक्र है कि मन्सूर ने बाबुल से सत्तर जादूगरों को बुला कर दरबार में बैठाये हुए था और उनसे कह दिया था कि मैं अन्क़रीब अपने एक दुश्मन को बुलाने वाला हूँ वह जब यहां पर आये तो तुम उसके साथ कोई ऐसा करतब करना जिससे वह ज़लील हो जाय। वहां पहुँच कर अपने देखा कि सत्तर मसनवी शेर दरबार में बैठे हुए हैं। आपको ग़ुस्सा आ गया और आपने उन शेरों की तरफ़ मुतव्वजे हो कर कहा कि अपने बनाने वालों को निगल लो। वह नक़ली शेर की तस्वीरें मुजस्सम हुईं और उन्होंने सब जादूगरों को निगल लिया। यह देख कर मन्सूर कांपने लगा , फिर थोड़ी देर के बाद बोला , ऐ इब्ने रसूल अल्लाह (अ.स.) इन शेरों को हुक्म दीजिये कि इन जादूगरों को उगल दें। आपने फ़रमाया यह नहीं हो सकता। अगर असाए मूसा ने सांपों को उगल दिया होता तो यक़ीन है कि यह भी उगल देते।(दमए साकेबा जिल्द 2 पृष्ठ 513 बा हवाला ए शरह शाफ़िया अबी फ़ारस)


इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) को दरबार में क़त्ल किये जाने का बन्दो बस्त

अल्लामा दहर शती ब हवाला ए किताब मशारिको अनवार अल्लामा तबरीसी रक़म तराज़ हैं कि मन्सूर अब्बासी जब आपकी रूहानियत से आजिज़ आ गया और किसी मरतबा क़त्ल करने में कामयाबी न हासिल कर सका तो उसने सवालिये अफ़राद तलाश किये जो कुछ जानते और पहचानते ही न थे , बिल्कुल अल्लढ़ और कुन्दा ए ना तराश थे। उसने मालो दौलत दे कर इस अम्र पर राज़ी किया कि जब इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की तरफ़ इशारा किया जाय तो वह उन्हें क़त्ल कर दें। प्रोग्राम मुरत्तब होने के बाद रात के वक़्त हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) को बुलाया गया। आप तशरीफ़ लाए , हुक्म था कि बिल्कुल तन्हा तशरीफ़ लायें। आप अकेले आये। जब आप दरबार में दाखि़ल हुए और उन लोगों की नज़रे आप पर पड़ीं जो तलवारें सूते हुए खड़े थे तो वह सब के सब तलवारें फें़क कर आपके क़दमों पर गिर पड़े। यह हाल देख कर मन्सूर ने कहा , इब्ने रसूल अल्लाह आप रात के वक़्त क्यों तशरीफ़ लाये हैं ? आपने फ़रमाया कि तूने मुझे गिरफ़्तार करा के मंगवाया है , अब कहता है क्यों आए हैं। उसने कहा माअज़ अल्लाह कहीं यह भी हो सकता है। आप तशरीफ़ तशरीफ़ ले जायें और क़याम गाह में आराम फ़रमायें। आप वापस चले गये। वहां से मदीना तशरीफ़ ले गये। इमाम (अ.स.) के चले जाने के बाद उन लोगों से पूछा गया कि तुमने खि़लाफ़ वरज़ी क्यों की और उन्हें क़त्ल क्यों नहीं किया ? उन्होंने जवाब दिया कि यह तो वह इमामे ज़माना हैं जो हमारी शबो रोज़ ख़बर गिरी करता है और हमेशा हमारी अपने बच्चों की तरह परवरिश करते हैं। यह सुन कर मन्सूर डर गया और उसे ख़्याल हुआ कि कहीं यह लोग मुझ से इसका बदला न लेने लगें इसी लिये उन्हें रात ही में रवाना कर दिया। ‘‘ सम क़त्ल बिल इसमा ’’ फिर आपको ज़हर से शहीद करा दिया।(दम ए साकेबा पृष्ठ 481 जिल्द 2 प्रकाशित नजफ़) अल्लामा अरबली का कहना है कि आपको क़ैद ख़ाने में ज़हर दिया गया।(कशफ़ुल ग़म्मा पृष्ठ 100 ) रवायात से मालूम होता है कि आपको कई मरतबा ज़हर दिया गया।(जन्नातुल ख़ुलूद पृष्ठ 28 ) बिल आखि़र आप इस आख़ेरी ज़हर से शहीद हो गये , जो अंगूर के ज़रिये से दिया गया था।(जिलाउल उयून पृष्ठ 268 )


हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) की शहादत

उलेमा ए फ़रीक़ैन का इत्तेफ़ाक़ है कि ब तारीख़ 15 शव्वाल 148 हिजरी 65 साल की उम्र में आपने इस दारे फ़ानी से ब तरफ़े मुल्के जावेदानी रेहलत फ़रमाई।(इरशादे मुफ़ीद पृष्ठ 413 आलामु वुरा पृष्ठ 159 नूरूल अबसार पृष्ठ 132 मतालेबुस सूऊल पृष्ठ 277 ) यौमे वफ़ात दोशम्बा था और मक़ामे दफ़्न जन्नतुल बक़ी है।

अल्लामा इब्ने हजर अल्लामा सिब्ते इब्ने जौज़ी अल्लामा शिब्लन्जी अल्लामा इब्ने तल्हा शाफ़ेई तहरीर फ़रमाते हैं कि ‘‘ माता मस्मूमन अय्यामल मन्सूर ’’ मन्सूर के ज़माने में आप ज़हर से शहीद हुए।(सवाएक़े मोहर्रेक़ा पृष्ठ 121, ग़ाएतुल इख़्तेसार पृष्ठ 62 सहा अल अख़बार पृष्ठ 44, तज़किरा ए ख़वासुल उम्मता , नूरूल अबसार पृष्ठ 133, अरजहुल मतालिब पृष्ठ 450 )

उलेमा ए अहले तशीय का इत्तेफ़ाक़ है कि आपको मन्सूर दवानक़ी ने ज़हर से शहीद कराया था और नमाज़ हज़रत इमाम मूसी ए काज़िम (अ.स.) ने पढ़ाई थी। अल्लामा क़ुलैनी और अल्लामा मजलिसी का इरशाद है कि आपको निहायत क़ीमती कफ़न दिया गया और आपके मक़ामे वफ़ात पर हर शब चराग़ जलाया जाता रहा।(किताब काफ़ी व जिलाउल उयून मजलिसी पृष्ठ 269 )

आपकी औलाद

आपकी मुख़्तलिफ़ बीबीयों से दस औलादें थीं जिनमें से सात लड़के और तीन लड़कियां थीं। लड़कों के नाम यह हैं। 1. जनाबे इस्माईल , 2. हज़रत मूसी ए काज़िम (अ स ) , 3. अब्दुल्लाह , 4. इस्हाक़ , 5. मोहम्मद , 6. अब्बास , 7. अली , और लड़कियों के नाम यह हैं। 1. उम्मे फ़रवा , 2. असमा , 3. फ़ात्मा।(इरशाद व जन्नातुल ख़ुलूद) अल्लामा शिब्लंजी ने सात औलाद तहरीर किया है। जिन्में सिर्फ़ एक लड़की का हवाला दिया है जिसका नाम उम्मे फ़रवा था।(नूरूल अबसार पृष्ठ 133 )

आपकी ही औलाद से ख़ुल्फ़ा ए फ़ात्मिया गुज़रे हैं जिनकी सलतनत 267 हिजरी से 567 हिजरी तक 270 साल क़ायम रही। उनकी तादाद 14 थी।

Leave a comment