
हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने खिलाफ़त के लिए तलवार क्युं नहीं उठाई ?
मौला अली ع ने जब भी तलवार उठाई तो खिलाफ़त हासिल/पाने के लिए बल्कि मुनाफ़िकों से इस्लाम की हिफ़ाज़त के लिए उठाई!!!!!
हज़रत शाह अब्दुल हक़ मुहददिस देहलवी ने मदारिजुन्नबुवत में लिखा है कि:-
हुज़ूर ऐ अक़रम ﷺ ने फ़रमाया:- ऐ अली (ع), फ़ुलां यहूदी के चंद दिरहम मेरे ज़िम्मे हैं! जिसे उससे लश्कर ऐ असामा रज़ि’अल्लाह की तैयारी के लिए कर्ज़ लिए थे।
खबरदार! उसके हक़ को मेरी तरफ़ से तुम उतारना और फ़रमाया:- ऐ अली (ع), तुम उन आदमियों में पहले [शख्स] होंगे जो हौज़-ऐ-क़ौसर पर मुझसे मिलेंगे और मेरे बाद बहुत से नागवार बातें तुम्हें पेश/सामने आएंगी! [तो ऐसी सूरत में] तुम्हें लाज़िम है कि दिल तंग ना करना और सब्र करना। जब तुम देखो कि लोग दुनिया को पसंद करते हैं।
जिल्द 2, सफ़ाह 500
उर्दू में इस तरह से लिखा हुआ है:-
حضور اکرم صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا- اے علی رضی اللہ عنہ، فلاں یہودی کے چند درہم میرے ذمہ ہے۔ جسے اس سے لشکر اسامہ رضی اللہ عنہ کی تیاری کیلئے قرض لیے تھے۔ خبردار اس کے حق کو میری طرف سے تم اتارنا اور فرمایا- اے علی رضی اللہ عنہ، تم ان اشخاص میں پہلے ہوگے جو حوض کوثر پر مجھ سے ملیں گے اور میرے بعد بہت سے ناگوار باتیں تمہیں پیش آئیں گی، تمہیں لازم ہے کہ دل تنگ نہ کرنا اور صبر کرنا۔ جب تم دیکھو کہ لوگ دنیا کو پسند کرتے ہیں۔
आप खुद भी देखें,सफ़ाह 500 पर छठी इबारत 👇
https://archive.org/details/35521645MadarijUnNabuwwatVol1Of2UrduTranslation/35521700-Madarij-un-Nabuwwat-Vol-2-of-2-Urdu-Translation/page/n497/mode/1up?view=theater
मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के विसाल के बाद उम्मत ने मौला अली ع से गद्दारी करी और मौला अली ع को बहुत से नागवार बातों वा मौकों का सामना करना पड़ा लेकिन आपने बहुत ही सब्र और हिक़मत से काम लिया।

🤔अक्सर लोगों का यह सवाल होता है कि मौला अली ع ने तलवार क्यों नहीं उठायी? जब आपका हक़ ग़स्ब किया गया तो?????
कंज़ुल उम्माल की रक़म नम्बर 31519,
जो कि कुछ इस तरह से है👇
“रसूल अल्लाह ﷺ ने मौला अली ع से कहा:- “जब लोग दुनिया को चाहने लगेंगे और मीरास को हड़प कर लेंगे और पैसों से इतनी मोहब्बत करने लगेंगे और अल्लाह یٰصَاحِبَیِ के दीन का इस्तेमाल आमदनी के लिए और ख़ुद के मतलब के लिए करने लगेंगे तो तुम क्या करोगे?????””
मौला अली ع ने जवाब दिया:
“मैं उनको उनके हाल पर छोड़ दूंगा और अल्लाह یٰصَاحِبَیِ और उसके रसूल की इताअत में रहूँगा! मैं दुनिया के मसलों में सब्र करूँगा जब तक आप से मिल न मिलूं”
फ़िर रसूल अल्लाह ﷺने कहा:- “बिल्कुल सही कहा और कहा: ऐ अल्लाह یٰصَاحِبَیِ अली को सब्र अता करना”
कंज़ुल उम्माल, जिल्द11, पेज नम्बर 143, रक़म नम्बर 31519

