
हदीस:- 1
“अली का चेहरा देखना इबादत है”।
सन्दर्भ :-📚📚 (मुस्तद्रक अल-हकीम vol 3 पेज 11)
हदीस नं.:-2
“अली को याद करना इबादत है”।
सन्दर्भ:-📚📚 (कंज उल उमाल 11)
(पेज 601)
हदीस नं.:-3
“अली का मुझसे वही रिश्ता है जो मूसा का हारून से था, सिवाय इसके कि मेरे बाद कोई नबी नहीं है।”
सन्दर्भ :-📚📚 (सहीह बुखारी जिल्द 3 पेज 1142)
(सहीह मुस्लिम जिल्द 31 पेज 5931)
हदीस:- 4
खैबर का दिन, “कल मैं अलम उसे दूंगा जो अल्लाह और उसके रसूल का महबूब तारीन है
सन्दर्भ:-📚📚 (सहीह मुस्लिम जिल्द 31,पेज 5917)
हदीस:- 5
“मेरे बाद जिन चीजों में एकतिलाफ़ होगी, उनमें अली की अदालत सबसे अच्छी है।”
📚📚( कँजुल उमाल 13, पेज 120)
हदीस संख्या:- 6
“अली तुममें से सबसे अच्छा शासक है।”
📚📚(कंजुल उमाल 13, पेज 120)
हदीस नंबर:- 7
“मैं आदम की औलाद का सरदार हूं, (अली) अरबों का सरदार हूं।”
सन्दर्भ :-📚📚 (मुस्तद्रक अल-हकम vol 3, पेज 123)
हदीस नंबर:- 8
“यौमे खनदक़ अली का वार सकलैन की इबादत से बेहतर है।”
सन्दर्भ :-📚📚 (मुस्तद्रक अल-हकीम vol 3 पेज 34)
हदीस नंबर :- 9
“अली के घर को छोड़कर, मस्जिद ए नबवी के अंदर खुलने वाले सभी दरवाजे बंद कर दिए जाने चाहिए।”
सन्दर्भ:- (मुस्तद्रक अल-हकीम vol 3, पेज 125)
हदीस संख्या:- 10
“अली मुझसे है और मैं अली से हूँ”।
सन्दर्भ :-📚📚 (मुसनद अहमद इब्न हम्बल vol 5, पेज 606)
(सहीह तिर्मिज़ी vol 13, पेज 168)
हदीस संख्या:- 11
लश्कर को रवाना करते वक्त रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया, “ऐ अल्लाह जब तक मैं अली को दोबारा न देख लूं, मुझे मौत न देना।”
सन्दर्भ:-📚📚 (सहीह तिर्मिज़ी जिल्द 13 पेज 178)
हदीस संख्या:- 12
अली हक़ के साथ हैं और हक़ अली के साथ हैं. सन्दर्भ:-📚📚 (सहीह तिर्मिज़ी जिल्द 31,पेज 166)
हदीस संख्या:- 13
अहल अल-सुन्नत के मुफासिर इमाम जलाल अल-दीन सुयुती रहमत उल्लाह ने अपनी तफ़सीर में लिखा है जब कुरान की यह आयत नाजिल हुई –
ऐ रसूल (ﷺ ) पहुंचा दीजिए जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम पर नाज़िल किया गया है… (सूरह माइदा 67)
इस आयत के बाद, आखिरी हज से लौटने पर, खुम ग़दीर की जगह पर, पैगंबर ﷺ ने सहाबा राजी ० के मजमे में मौला अली का हाथ बुलंद कर के ऐलान किया कि :- “जिस जिस का मै मौला अली इस इस का मौला “

