चौदह सितारे अबु जाफ़र हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर पार्ट 6

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इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) की शहादत

आप अगरचे अपने इल्मी फ़ैज़ व बरकात की वजह से इस्लाम को बराबर फ़रोग़ दे रहे थे लेकिन इसके बावजूद हश्शाम बिन अब्दुल मलिक ने आपको ज़हर के ज़रिए से शहीद करा दिया और आप बतारीख़ 7 ज़िल्हिज्जा 114 हिजरी यौमे दोशम्बा मदीना मुनव्वरा में इन्तिक़ाल फ़रमा गए। इस वक़्त आपकी उम्र 57 साल की थी आप जन्नतुल बक़ीह में दफ़्न हुए।(कशफ़ुल ग़म्मा पृष्ठ 93 जिलाउल उयून पृष्ठ 264 जनात अल ख़लूद पृष्ठ 26, दमए साकेबा पृष्ठ 449, अनवारूल हुसैनिया पृष्ठ 48, शवाहेदुन नबूअत पृष्ठ 181 रौज़तुल शोहदा पृष्ठ 434 )

अल्लामा शिबलंजी और अल्लामा इब्ने हजर मक्की फ़रमाते हैं , ‘‘ मात मसमूमन काबहू ’’ आप अपने पदरे बुज़ुर्गवार इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ.स.) ही की तरह ज़हर से शहीद कर दिए गए।(नुरूल अबसार पृष्ठ 31 व सवाक़े मोहर्रेक़ा पृष्ठ 120 ) आपकी शहादत हश्शाम के हुक्म से इब्राहीम बिन वालिये मदीना की ज़हर ख़ूरानी के ज़रिए वाक़े हुई है। एक रवायत में है कि ख़लीफ़ा ए वक़्त हश्शाम बिन अब्दुल मलिक की मुरसला ज़हर आलूद ज़ीन के ज़रिए से वाक़े हुई थी।(जनात अल खुलूद व दमए साकेबा जिल्द 2 पृष्ठ 478 )

शहादत से क़ब्ल आपने हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) से बहुत सी चीज़ों के मुताअल्लिक़ वसीअत फ़रमाई और कहा कि बेटा मेरे कानों में मेरे वालिदे माजिद की आवाज़ आ रही है। वह मुझे जल्द बुला रहे हैं।(नुरूल अबसार पृष्ठ 131 )

आपने ग़ुस्लो कफ़न के मुताअल्लिक़ ख़ास तौर पर हिदायत की क्यों कि इमाम राजिज़ इमाम नशवेद , इमाम को इमाम ही ग़ुस्ल दे सकता है।(शवाहेदुन नबूवत पृष्ठ 181 ) अल्लामा मजलिसी फ़रमाते हैं कि आपने अपनी वसीअतों में यह भी कहा कि 800 दिरहम मेरी अज़ादारी और मेरे मातम पर सर्फ़ करना और ऐसा इन्तेज़ाम करना कि दस साल तक मिना मेंब ज़मानए हज मेरी मज़लूमियत का मातम किया जाए।(जिलाउल उयून पृष्ठ 264 ) उलमा का बयान है कि वसीयतों में यह भी था कि मेरे बन्दे कफ़न क़ब्र में खोल देना और मेरी क़ब्र चार उंगल से ज़्यादा ऊँची न करना।(जनात अल ख़ुलूद पृष्ठ 27 )

 

अज़वाज व औलाद

आपकी चार बीबीयाँ थीं और उन्हीं से औलाद हुई। उम्मे फ़रवा , उम्मे हकीम , लैला और एक बीबी उम्मे फ़रवा क़ासिम बिन मोहम्मद बिन अबी बक्र जिन से हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) और अब्दुल्लाह अफ़तह पैदा हुए और उम्मे बिन्ते असद बिन मोग़ैरा शक़फ़ी से इब्राहीम व अब्दुल्लाह और लैला से अली और ज़ैनब पैदा हुये और चौथी बीबी से उम्मे सलमा मोता वल्लिद हुइ।(इरशाद मुफ़ीद पृष्ठ 294 मनाक़िब जिल्द 5 पृष्ठ 19 व नुरूल अबसार सफ़़ा 131 )

अल्लामा मोहम्मद बाक़िर बहभानी , अल्लामा मोहम्मद रज़ा आले काशेफ़ुल ग़ता और अल्लामा हुसैन वाएज़ काशफ़ी लिखते हैं कि हज़रत मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) की नस्ल सिर्फ़ इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) से बढ़ी है उनके अलावा किसी की औलादें ज़िन्दा और बाक़ी नहीं रहीं।(दमए साकेबा जिल्द 2 पृष्ठ 479 अनवारूल हुसैनिया जिल्द 2 पृष्ठ 48, रौज़तुल शोहदा पृष्ठ 434 प्रकाशित लखनऊ 1284 0 )

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