शान ए फातिमा बिन्ते असद बिन हाशिम (रजी अल्लाह अन्हा)

हजरत सईद ने उनसे : ऐ अबू मोहम्मद ! आप हमे फातिमा बिन्ते असद बिन हाशिम, हजरत अली इब्ने अबू तालिब (रजी अल्लाह अन्हो) की वालिदा के बारे मै कुछ बताए – उन्होंने कहा : जी हां – मेरे वालिद मोहतरम ने मुझे बताया के अमीर उल मोमिनिन हजरत अली इब्ने अबू तालिब (रजी अल्लाह अन्हो) फरमाते है : जब फातिमा बिन्ते असद बिन हाशिम (रजी अल्लाह अन्हा) का इन्तेकाल हुआ तो रसूलल्लाह (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) ने उनको अपनी कमीज़(जुबा मुबारक) कफन के लिए दिया और उनका जनाजा पढ़ाया और 70 तकबीरें पढ़ी – और आप (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) बाज़ात खुद उनकी कबर मे उतरे और कबर मे इर्द गिर्द इस तरह इशारे फरमा रहे थे गोया के उसको खुला कर रहे हों , फिर जब आप (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) कबर से बहार निकले तो आप (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) की आंखों से आंसू बह रहे थे – फिर आप (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) ने उनकी कबर पर मिट्टी डाली , आप वहां से तशरीफ ले आए तो हजरत उमर बिन खत्ताब (रजी अल्लाह अन्हो) ने अर्ज की : या रसूलल्लाह (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) जितनी शफकत आपने इस खातून पर फरमाई है, मैने किसी और पर आपको ऐसे शफकत फरमाते नहीं देखा – आप (सलअल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) ने फरमाया : ऐ उमर ! ये औरत मेरी उस मां की तरह थी जिसने मुझे जनम दिया है , बेशक अबू तालिब (रजी अल्लाह अन्हो) काम काझ किया करते थे और उनका दस्तरख्वान होता था , ये औरत उस मैसे बचा कर मेरे लिए रख लिया करती थी और दोबारा मुझे दिया करती थी – और जिब्राइल (अलैहिस्सलाम) ने मुझे बताया के अल्लाह ताअला ने उसको जन्नती कर दिया है और मुझे जिब्राइल (अलैहिस्सलाम) ने बताया के अल्लाह ताअला ने 70 हजार फरिश्तों को उनके लिए दुआ ए मगफिरत के लिए मुकर्रर फरमाए है|

अल मुस्तद्रक लिल हाकिम जिल्द: 4 हदीस नं: 4574

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