हज़रत उम्मे कुलसूम की विलादत, वफ़ात और उनका मदफ़न

हज़रत उम्मे कुलसूम की विलादत, वफ़ात और उनका मदफ़न तारीख़ के औराक़ शाहीद हैं कि हज़रते उम्मे कुलसूम अपनी बहन हज़रते ज़ैनब के कारनामों में बराबर की शरीक थीं। वह तारीख़ में अपनी बहन के दोश ब दोश नज़र आती हैं वह मदीने की ज़िन्दगी, करबला के वाकेयात, दोबारा गिरफ़्तारी और मदीने से अख़राज सब में हज़रते ज़ैनब के साथ रहीं। उनकी विलादत 9 हिजरी में हुई । उनका अक़्द 1. मोहम्मद बिन जाफ़र बिन अबी तालिब से हुआ। उनकी वफ़ात हज़रत ज़ैनब से दो महीने 20 दिन पहले हुईं। वह शाम में दफ़्न हैं। (ख़सा से ज़ैनबिया )

(मोअज़्ज़म अल बलदान याकूत हम्वी जिल्द 4 पृष्ठ 216 ) उनका मज़ार और सकीना बिन्तुल हुसन (अ.स.) का मज़ार शाम में एक ही इमारत में वाक़े है। उनकी उम्र 51 साल की थी। इनकी औलाद का तारीख़ में पता नहीं मिलता। अलबत्ता हज़रते ज़ैनब के अब्दुल्लाह बिन जाफ़रे तय्यार से चार फ़रज़न्द अली, मोहम्मद, औन, अब्बास और एक दुख़्तर उम्मे कुलसूम का ज़िक्र मिलता हैं। (ज़ैनब अख़्तल हुसैन पृष्ठ 55 व सफ़ीनतुल बेहार जिल्द 8 पृष्ठ 558)

हाशिया 1. हज़रत उम्मे कुलसूम के साथ उमर बिन ख़त्ताब के अक़द का फ़साना तौहीने आले मोहम्मद ( स.व.व.अ.) का एक दिल सोज़ बाब है। इसकी रद के लिये मुलाज़ा हों मुक़द्देमा अहयाउल ममात अल्लामा जलालउद्दीन सियूती मतबूआ लाहौर।

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